2024 में ग्लोबल जीडीपी में अमरीका से ज्यादा रहेगी भारत की हिस्सेदारी

  • ग्लोबल जीडीपी में भारत का शेयर 15.5 फीसदी रहने का अनुमान
  • अमरीका की हिस्सेदारी 13.8 फीसदी से घटकर 9.2 फीसदी का अनुमान
  • ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुासार ग्लोबल जीडीपी में चीनी हिस्सेदारी होगी कम

नई दिल्ली। ग्लोबल स्लोडाउन के कारण दुनिया की तमाम बड़ी अर्थव्यवस्था परेशान हैं। आईएमएफ की रिपोर्ट में भी साफ कहा जा चुका है कि दुनिया के 90 फीसदी देशों की विकास दर कम ही रहेगी। इस बार तो भारत भी इसकी चपेट में आ चुका है। खास बात तो ये है कि आने वाले पांच सालों में भारत की स्थिति ग्लोबल जीडीपी में अमरीका से भी बेहतर होने का अनुमान जताया गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में ग्लोबल जीडीपी में भारत की हिस्सेदारी अमरीका से ज्यादा हो जाएगी। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर ब्लूमगर्ब की रिपोर्ट में क्या कहा गया है...

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भारत की विकास दर में आएगी रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले पांच सालों यानी 2024 तक देश की जीडीपी का आकार 5 ट्रिलियन डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। वो बात अलग है कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की विकास दर की रफ्तार बेहद धीमी है। साथ ही इस वर्ष और भी नीचे जा सकी है। वहीं जानकारों का कहना है कि आने वाले सालों में भारत की जीडीपी में इजाफा होगा। जिसके 7 से फीसदी से भी आगे जाने के चांस दिखाई दे रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो बात वल्र्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार अगले वित्त वर्ष से ग्रोथ रेट में तेजी आएगी। 2021 में ग्रोथ रेट 6.9 फीसदी और संभव है कि 2022 में यह 7.2 फीसदी तक पहुंच जाए।

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अमरीका से आगे होगा भारत
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट की मानें तो 2024 तक वैश्विक विकास दर के 3 फीसदी से नीचे जाने के आसार दिखाई दे रहे हैं। वहीं चीन की हिस्सेदारी भी कम होती दिखाई दे रही है। 2024 में चीन का योगदान 28.30 फीसदी रहने का अनुमान है। जबकि 2018 में यह हिस्सेदारी 32.70 थी। वहीं बात भारत की करें तो पांच साल के बाद भारत की हिस्सेदारी 15.5 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि अमेरिका का योगदान 13.8 फीसदी से घटकर 9.2 फीसदी पर पहुंच जाएगा।

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ट्रेड वॉर का बुरा असर
इस रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेड वॉर का त्रष्ठक्क पर बुरा असर पड़ा है। इंटरनेशनल ट्रेड में अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है, जिसका असर अगले पांच सालों तक दिखाई देगा। मौजूदा समय में चीन और अमरीका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर का असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। चीन की बात करें तो तिमाही के नतीजों में चीन की विकास दर 25 साल के निचले स्तर पर आ गई है। वहीं अमरीका में राष्ट्रपति के चुनाव ऐसे समय पर होने जा रहे हैं जब दुनिया में मंदी अपने चरम पर होगी।

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Saurabh Sharma
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