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रिपोर्ट का दावा, भारत के पास विकसित देश बनने के लिए सिर्फ दस साल का समय

एसबीआर्इ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करन के लिए सिर्फ एक दशक यानी 10 साल का ही वक्त है। ऐसा करने के लिए उसे सबसे ज्यादा शिक्षा क्षेत्र पर ध्यान देना होगा।
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No work is difficult if passion and emotion are concerned - collector

नर्इ दिल्ली। कर्इ अंतरार्ष्ट्रीय एजेंसियां आैर देश भारत को दुनिया की सबसे ज्यादा उभरती अर्थव्यवस्था का दर्जा दे चुके हैं। कर्इ संस्थान को यहां तक कह चुके हैं कि आने वाला भविष्य सिर्फ भारत का है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। लेकिन जो रिपोर्ट सामने आर्इ है वो ज्यादा अच्छी नहीं है। क्योंकि अगर एेसा अगले दस सालों में नहीं हुआ तो भारत को बड़ा नुकसान होगा। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर ये रिपोर्ट है किसकी आैर इसमें आैर क्या है?

एसबीआर्इ की रिपोर्ट
भारत के पास विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करन के लिए सिर्फ एक दशक यानी 10 साल का ही वक्त है। ऐसा करने के लिए उसे सबसे ज्यादा शिक्षा क्षेत्र पर ध्यान देना होगा। वहीं अगर वह इस मोर्चे पर सफल नहीं रहता है तो जनसांख्यिकी लाभांश नुकसान तब्दील हो जाएगा। यह जानकारी देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च विंग की एक रिपोर्ट में दी गर्इ है।

अभी नहीं तो फिर कभी नहीं
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर भारत इन प्रयासों को एक साथ करने में सक्षम नहीं हुआ तो फिर वो कभी भी विकसित राष्ट्रों की कतार में शामिल नहीं हो पाएगा। इस रिपोर्ट में कहा गया, “भारत के पास अब विकसित देश का टैग पाने के लिए सिर्फ एक दशक की ही सीमित खिड़की है, नहीं तो वो फिर हमेशा ही उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले ग्रुप में अटका रहेगा। नीति निर्माताओं को जागना चाहिए और इसका अनुभव करना चाहिए।”

इस बात पर देना होगा ध्यान
इस रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार और नीति निर्माताओं को देश की युवा आबादी पर ध्यान देना होगा ताकि उनका एक बेहतर नागरिक बनना सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही जनसांख्यिकीय लाभांश को समझने और अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा में निवेश करना चाहिए।

2030 तक घातक हो सकता है भारत के लिए
इस रिपोर्ट में चेताया गया है कि देश का जनसांख्यिकी लाभांश, जो कि उसकी ताकत है वास्तव में 2030 तक उसके लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। इसमें आगे कहा गया कि जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्ति दर्शाती है कि पिछले दो दशकों में वृद्धिशील जनसंख्या वृद्धि स्थिर बनी हुई है और लगभग 18 करोड़ है।