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आयकर विभाग ने दिल्ली में किया 21,000 करोड़ रुपए के हवाला कारोबार का पर्दाफाश

आयकर विभाग ने दिल्ली में तीन अलग-अलग मामलों में करीब 21 हजार करोड़ रुपए के हवाला कारोबार का पर्दाफाश किया है।
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Saurabh Sharma

Feb 12, 2019

Hawala

आयकर विभाग ने दिल्ली में किया 21,000 करोड़ रुपए के हवाला कारोबार का पर्दाफाश

नई दिल्ली। सोमवार को आयकार विभाग ने तीन अलग अलग मामलों में हवाला कारोबार का पर्दाफाश किया है। यह विभााग के अनुयार इन तीनों मामलों में करीब 21 हजार करोड़ रुपए का मामला सामने आया है। जहां एक आेर तीन 12 कंपनियों के 18 हजार करोड़ रुपए के फर्जी बिल बनाकर गोरखधंधा किया जा रहा था। वहीं दूसरी आेर बड़ी कंपनियों के पुराने शेयर्स को नया बताकर बेचा जा रहा है। वहीं आखिरी मामले में एक विदेशी खाते का खुलाया हुआ है। जिसमें फर्जी बिल बनाकर जीएसटी का दावा करते थे।

18 हजार करोड़ रुपए का मामला
कालेधन और हवाला लेन-देन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए आयकर विभाग ने देश की राजधानी दिल्ली में 18,000 करोड़ रुपये के जाली बिलों का भंडाफोड़ किया। यह जानकारी सोमवार को विभाग के अधिकारियों ने दी। आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभाग द्वारा पिछले कुछ सप्ताह से लगातार तलाशी व सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा था, जिसमें जाली प्रविष्टियों व हवाला लेन-देन के कारोबार में संलिप्त तीन ग्रुप ऑपरेटरों का भंडाफोड़ किया गया। उन्होंने बताया कि मध्य दिल्ली के नया बाजार में एक ग्रुप पर किए गए सर्वेक्षण में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक के जाली बिल पाए गए। इस ग्रुप ने फर्जी बिल प्रदान करने के लिए 12 नकली कंपनियां बनाई थीं। विभाग ने आरोपियों की पहचान का खुलासा नहीं किया।

मनी लांड्रिंग का खुलासा
अधिकारी ने कहा कि दूसरे मामले में एक बेहद संगठित मनी लॉन्ड्रिंग गिरोह का पता चला। ये लोग बड़ी कंपनियों के शेयरों को धोखाधड़ी के जरिए वर्षों से रखे गए पुराने शेयर बताकर बेच रहे थे। उन्होंने कहा कि इस तरीके से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ का फर्जी दावा कर पैसे कमाए जा रहे थे। अधिकारियों का अनुमान है कि इस तरीके से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला किया गया। अधिकारी के अनुसार धोखाधड़ी का यह तरीका कई साल से इस्तेमाल किया जा रहा था।

जीएसटी का करते थे फर्जी दावा
विभाग को इसी तरह एक अन्य समूह का भी पता चला जिनके पास अघोषित विदेशी बैंक खाता पाया गया। यह समूह निर्यात का कीमत से अधिक बिल बनाकर जीएसटी के तहत फर्जी दावा भी करते थे। उन्होंने कहा, ‘शुरुआती अनुमान के अनुसार ये फर्जी निर्यात 1,500 करोड़ रुपए से अधिक के हैं।’ छापेमारी करने वाले दल को करीब 100 करोड़ रुपए के हस्ताक्षर किए गए तथा बगैर हस्ताक्षर के दस्तावेज, समझौते, अनुबंध, नकदी कर्ज और उसपर अर्जित ब्याज, वित्तीय विवादों का नकद के बदले निस्तारण तथा इनके एवज में पैसे लेने की रसीदें आदि मिलीं हैं। अधिकारी ने कहा, ‘तीसरे मामले की जांच में लोगों को विदेशी यात्रा कराने तथा विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराने के भी सबूत मिले हैं।