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मोदी ही नहीं बल्कि अटल जी को भी प्रधानमंत्री बनाने वाले हैं ये शख्स, ऐसे मिला इकोनॉमी को बढ़ावा

आज यानी गुरुवार को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का निधन हो गया है।
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नई दिल्ली। आज यानी गुरुवार को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का निधन हो गया है। उन्होंने दिल्ली के एम्स अस्पताल में शाम 5.05 बजे के करीब अंतिम सांस ली। वो पिछले 2 महीने से अस्पताल में भर्ती थे। 93 साल की उम्र में अटल जी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर है। हर देशवासी अटल जी के निधन से बहुत आहत हुआ है। लेकिन क्या आपको पता है कि केवल मोदी ही नहीं बल्कि अचल जी को भी प्रधानमंत्री बनाने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि उनका अपना दोस्त था। आइए जानते हैं कौन है दोस्त और कैसे बने अटल जी इस देश के प्रधानमंत्री.…

अबकी बारी अटल बिहारी

जी हां ये नारा देने वाला कोई और नहीं बल्कि आज पर्दे के पीछे जा चुके अटल बिहारी के खास दोस्त लालकृष्ण आडवाणी है। इन्होनें ही संघ से बिना पूछे ये घोषणा कर दी कि अटल बिहारी बाजपेयी देश के अगले प्रधानमंत्री के उम्मीदवार होंगे। और साथ में ये नारा भी दिया कि 'अबकी बारी अटल बिहारी'

ऐसे बने बिजनेस जगत के लिए अहम

नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया ने अपनी किताब में लिखा है कि साल 1999 में वाजपेयी जी की टेलिकाॅम सेक्टर को लेकर लिए गए फैसले ने ही भारतीय टेलिकाॅम सेक्टर की नर्इ इबारत लिखी। 3 मार्च 1999 को वाजपेयी सरकार द्वारा लाया गया नर्इ टेलिकाॅम नीति (NTP) ने ही देश में टेलिकाॅम पेनीट्रेशन का बड़े स्तर पर प्रभावी बनाया। अाप इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि साल 1999 में देश में जो टेलिकाॅम पेनीट्रेशन 3 फीसदी था वो नाटकीय रूप से बढ़ाकर साल 2012 में 70 फीसदी से भी अधिक कर दिया।

अार्थिक विकास की आेर
इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर वाजपेयी ने दो महत्वाकांक्षी परियोजनाआें लाॅन्च किया। इसमें पहली परियोजना गोल्डेन क्वाड्रिलेटरल के जरिए देश के चार महानगरों को जोड़ने के लिए नेशनल हाइवे डेवलपमेंट प्रोजेक्टर (NHDP) थी। दूसरी परियोजना देश के सभी ग्रामीण इलाकों को जोड़ने को लेकर था जिसका नाम प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PGMSY) थी। इन दोनों परियाेजनाअों ने देश के रियल सेक्टर, काॅमर्स आैर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को क्रांतिकारी रूप से बदल दिया। रोड को लेकर इन परियोजनाआें के बाद भारत को एक के बाद एक कर्इ एेसे वर्ल्ड क्लास हार्इवे मिले जो कि आगे चलकर भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में मददगार रहीं।