देश की आर्थिक मंदी को देख मूडीज ने घटाया जीडीपी ग्रोथ रेट, 6.2 फीसदी किया

देश की आर्थिक मंदी को देख मूडीज ने घटाया जीडीपी ग्रोथ रेट, 6.2 फीसदी किया

Shivani Sharma | Publish: Aug, 23 2019 04:57:23 PM (IST) | Updated: Aug, 23 2019 04:58:57 PM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

  • देश में बढ़ती आर्थिक मंदी के कारण मूडीज ने घटाई रेटिंग
  • मूडीज ने भारत का आर्थिक विकास दर अनुमान घटाया

नई दिल्ली। देश में पिछले कुछ समय से चल रही आर्थिक मंदी के बीच एक और बुरी खबर आई है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने साल 2019 के लिए भारत के आर्थिक विकास दर अनुमान को घटाकर 6.2 फीसदी कर दिया है। इससे पहले, एजेंसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.8 फीसदी की दर से आगे बढ़ने का अनुमान जताया था। एजेंसी ने साल 2020 के लिए जीडीपी विकास दर अनुमान को 7.30 से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है।


मूडीज ने जारी किया बयान

मूडीज ने एक बयान में बताया कि अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती ने एशियाई निर्यात पर प्रतिकूल असर डाला है और कारोबार का अनिश्चित माहौल निवेश पर भारी पड़ा है। दरअसल, मूडीज ने कहा कि कमजोर ग्लोबल वातावरण का एशियाई क्षेत्र में एक्सपोर्ट्स को घटाने के पीछे बड़ा हाथ है और इससे कई देशों की आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।


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सुस्ती के दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था

उल्लेखनीय है कि अर्थव्यवस्था इन दिनों भारी सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। ऑटोमोबाइल सेक्टर की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि कंपनियों को बिक्री में आई भारी गिरावट से निपटने के लिए न सिर्फ कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ रही है, बल्कि अस्थायी तौर पर उत्पादन पर भी ब्रेक लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।


रघुराम राजन ने जताई चिंता

इसके अलावा देश में बढ़ती आर्थिक मंदी पर पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने भी चिंता जताई है। हाल ही में इसके संकेत भी देखने को मिले हैं। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति ने अपने 3 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इसके साथ ही देश की सबसे पुरानी बिस्कुट बनाने वाली कंपनी पारले भी मंदी के कारण परेशान है और कंपनी ने जानकारी देते हुए बताया है कि अगर देश में ऐसे ही हालात रहे तो हमें अपने कई कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पड़ेगा।


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ऑटो सेक्टर झेल रहा मंदी का मार

बाजार में कैश का संकट देखा जा रहा है, ऑटो सेक्टर मंदी की मार झेल रहा है, कारों की बिक्री 20 सालों में सबसे कम हो गई है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है। प्राइवेट कंपनियों में नौकरियां जाने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है और रियल एस्टेट सेक्टर में भारी गिरावट जारी है।

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