अबकी बार आर्थिक मोर्चे पर 'सरकार' के सामने मुश्किलें हजार

अबकी बार आर्थिक मोर्चे पर 'सरकार' के सामने मुश्किलें हजार

Saurabh Sharma | Publish: May, 17 2019 07:05:04 AM (IST) | Updated: Jun, 01 2019 10:42:27 AM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

  • देश में मौजूदा समय में रोजगार दर 45 फीसदी के निचले स्तर पर
  • इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास
  • देश में खुदरा महंगाई दर छह महीने के उच्चतम स्तर पर
  • देश का व्यापार का घाटा पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची

नई दिल्ली। 2019 की मोदी 2.0 सरकार बन चुकी है। शुक्रवार को प्रधानतंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पसंद के नेताओं को उनके मंत्रालय भी बांट दिए। यानी से आज शनिवार से उनका काम शुरू हो गया है। लेकिन काम शुरू करने से पहले मोदी 2.0 सरकार के सामने दो सबसे बड़ी चुनौतियां आकर खड़ी हो गई हैं। पहली बेरोजगारी दर के आंकड़े और दूसरा जीडीपी के आंकड़े। इस बार नरेंद्र मोदी और उनकी टीम पहले से ज्यादा मेंडेट मिला है। ऐसे में उनके सामने चुनौतियां भी ज्यादा होंगी। लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने का भार भी ज्यादा होगा। ऐसे में यह जानना काफी जरूरी है कि बेरोजगारी और जीडीपी के आंकड़ों को सुधारने के अलावा और कौन-सी चुनौतियां उनके सामने हैं...

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1. रोजगार 45 साल के निचले स्तर

Unemployment

शुक्रवार को संख्याकिकी मंत्रालय के बेरोजगारी के आंकड़े काफी परेशान करने वाले है। ताज्जुब की बात तो ये है कि मंत्रालय के आंकड़ों दो और रिपोर्ट से भी काफी मैच खा रहे हैं। पहली रिपोर्ट एनएसएसओ की वो रिपोर्ट है जो लीक हो गई थी, जिसे सरकार ने मानने से इनकार कर दिया था। दूसरी रिपोर्ट अजीमजी प्रेमजी की हालिया रिपोर्ट यह बात सामने आई है कि देश में रोजगार 45 साल के निचले स्तर पर चला गया है। अब यही बात संख्याकिकी मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कही है कि देश की बेरोजगारी 6.1 फीसदी पर आ गई है, जो 45 साल का सबसे उंचा स्तर है। वहीं सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की दो महीने पहले की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि कहा था कि नोटबंदी के बाद से 2018 तक एक करोड़ 10 लाख लोगों ने रोजगार खो दिया है। यानि आने वाले दिनों में नई सरकार के सामने देश के युवाओं के लिए रोजगार देने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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2. जीडीपी की ग्रोथ

GDP

जीडीपी के आंकड़े बताते हैं कि आपका देश किस रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा हैै। लेकिन सरकार की शुुक्रवार की रिपोर्ट ने सभी को हिलाकर रख दिया। आंकड़ों के अनुसार देश की जीडीपी 6 फीसदी से नीचे यानी 5.8 फीसदी पर आ गई है। ताज्जुब की बात तो ये है कि दुनिया की बड़ी आर्थिक एजेंसियों ने भारत की वित्तीय वर्ष 2019-20 में जीडीपी की अनुमानित दर को कम कर दिया है। पहले बात आईएमएफ की करें तो देश की जीडीपी 7.3 फीसदी तक रह सकती है। वहीं एशियाई विकास बैंक ने भारत की जीडीपी दर में 0.4 फीसदी की कटौती कर 7.2 फीसदी कर दिया है। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी भारत की जीडीपी को 6.8 से 7.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। इससे पहले इन सभी एजेंसियों ने भारत की जीडीपी दर के 7.5 फीसदी या उससे आगे रहने का अनुमान लगाया था। ऐसे भारत की जीडीपी दर को तेजी से आगे ले जाने का दबाव नई सरकार के सामने होगा।

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3. महंगाई दर में इजाफा

Inflation Rate

नई सरकार के सामने महंगाई दर भी एक बड़ा सवाल होगा। हाल ही में सरकार की ओर से थोक और खुदरा महंगाई दर के आंकड़े पेश किए हैं। खुदरा मंहगाई दर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। आंकड़ों की बात करें तो अप्रैल 2019 में देश में खुदरा महंगाई दर 2.92 फीसदी हो गई है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले महीने में यह दर 3 फीसदी के आसपास पहुंच जाएगी। वहीं थोक महंगाई दर (3.07 फीसदी) से देश को भले ही राहत मिली हो, लेकिन सब्जियों की थोक कीमतों में 40.65 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़कर 4.95 फीसदी हो गई है। इसके अलावा गैर खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 2.83 फीसदी से बढ़कर 5.23 फीसदी हो गई है। ऐसे में नई सरकार के सामने इनको काबू में रखना बड़ी चुनौती होगी।

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4. व्यापार घाटा अपने उच्चतम स्तर पर
व्यापार घाटा, पहले आपको आसान भाषा में समझाने का प्रयास करते हैं कि आखिर ये होता क्या है। वास्तव में आयात यानी इंपोर्ट में इजाफा हो और निर्यात कम हो तो ऐसी स्थिति में उसे देश का व्यापार घाटा कहते हैं। देश की सरकारें यह कोशिश करती हैं कि जिस सामान को वो विदेशों से आयात करती हैं उसका प्रोडक्शन अपने ही देश में शुरू करें। ताकि आयात कम हो और निर्यात ज्यादा से ज्यादा किया जा सके। ताकि व्यापार घाटा कम हो सके। लेकिन ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का व्यापार घाटा पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। जो देश और उसकी नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में 26 अरब डॉलर का निर्यात और 41.4 अरब डॉलर का आयात हुआ, जिससे व्यापार घाटा 15.33 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह ट्रेड डेफिसिट का नवंबर, 2018 का उच्चतम स्तर है।

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5. पेट्रोल और डीजल की कीमत
पेट्रोल और डीजल की कीमत देश की इकोनॉमी को सबसे ज्यादा इफेक्ट करती है। जो इंटरनेशनल मार्केट के उतार-चढ़ाव तय करती है। ऐसे समय में सरकार की सूझबूझ से ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर या कम किया जा सकता है। मौजूदा समय की बात करें तो इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। जाने आने वाले दिनों में और इजाफा हो सकता है। वास्तव में ईरान वेनेजुएला पर अमरीकी प्रतिबंध की वजह से भारत को क्रूड ऑयल भरपूर मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। वहीं ओपेक देशों ने भी क्रूड के उत्पादन में कटौती की हुई है। ऐसे में क्रूड ऑयल के दाम में इजाफा होने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमत देश की नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

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