US-Iran dispute: टेंशन में क्यों है भारत, जानिए कितना होगा नुकसान?

US-Iran dispute: टेंशन में क्यों है भारत, जानिए कितना होगा नुकसान?

Saurabh Sharma | Updated: 24 Jun 2019, 10:30:08 AM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

US-Iran dispute के बीच भारत के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil price) में इजाफा का असर भारत की इकोनॉमी पर दिखाई दे सकता है।

नई दिल्ली। अमरीका और ईरान विवाद ( US-Iran dispute ) अपने चरम पर है। भले ही अमरीका ( America ) ने आदेश के बाद कोई हमला ना किया हो, लेकिन स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। ऐसे में भारत के लिए काफी परेशानियां खड़ी हो सकती है। अमरीका और ईरान के बीच युद्घ भारत की योजनाओं और विकास में बाधा पहुंचा सकता है। युद्घ की स्थिति बनती है तो कच्चे तेल की कीमत ( crude oil Price ) में तेजी आएगी। जिससे भारत के कच्चे तेल का आयात बिल ( Crude oil import bill ) बढ़ जाएगा। विदेशी खजाने में कमी आएगी और रुपए की स्थिति कमजोरी होगी। जिसका असर भारत की कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा। हाल ही में कच्चे तेल की कीमत में 5 फीसदी की तेजी देखने को मिली थी। जिसके बाद भारत ने सऊदी अरब ( Saudi Arabia ) से बात कर कच्चे तेल की कीमतों स्थिर रखने को कहा था।

बढ़ जाएगा आयात बिल
जब भी इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होता है, तब-तब भारत के आयात बिल में इजाफा देखने को मिलता है। इसका कारण है कि भारत कच्चे तेल का आयात काफी मात्रा में करता है। अगर आंकड़ों की बात करें तो फरवरी 2019 में भारत का कुल आयात बिल 507 अरब डॉलर था, जिसमें 114 अरब डॉलर सिर्फ कच्चे तेल का आयात बिल था। अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2019 में यह बढ़कर 115 अरब डॉलर के पार जा सकता है।

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विदेशी पूंजी भंडार होगा खाली
जैसा कि हमने आपको बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होने से भारत का आयात बिल बढ़ जाएगा। अगर आयात बिल में इजाफा होता है तो भारत जैसे देश का विदेशी पूंजी भंडार काफी प्रभावित होता है। क्योंकि जब आप कच्चा तेल खरीदते हैं तो उसका भुगतान डॉलर में करते हैं। जितना महंगा तेल होगा, आपको उतना ज्यादा डॉलर देना होगा। आंकड़ों के अनुसार मौजूदा समय में भारत का विदेशी पूंजी भंडार करीब 425 अरब डॉलर है। इसका आंकड़ा हर सप्ताह बदलता रहता है।

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रुपए में आएगी कमजोरी
विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आती है तो किसी देश की मुद्रा अमरीकी मुद्रा के हिसाब से कमजोर होती है। कुछ ऐसे ही हालात भारत में भी देखने को मिलते हैं। जिस तरह के हालात पैदा हो रहे हैं आने वाले समय में भारतीय रुपए के कमजोर होने के संकेत मिल रहे हैं। क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार में कमी का असर का मुद्रा पर पड़ेगा। देश के पास जितनी विदेशी मुद्रा कम होगी, रुपए की वैल्यू उतनी ही कम हो जाएगी। मौजूदा समय की बात करें तो अमरीकी डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू 70 रुपए के आसपास पहुंच गई है। जिसके आने वाले दिनों में 72 और 73 रुपए तक पहुंचने के आसार दिख रहे हैं।

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देश की जीडीपी पर पड़ेगा असर
कच्चे तेल की कीमतों के बढऩे का असर देश की जीडीपी पर भी पड़ता हैं। हाल ही में क्रिकेट एजेंसियों ने कहा है कि कच्चे तेल की कीमतें अगर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती हैं तो जीडीपी पर इसका 0.4 फीसदी असर होता है और इससे चालू खाता घाटा 12 अरब डॉलर या इससे भी ज्यादा बढ़ सकता है। भारत की जीडीपी की बात करें तो 6 फीसदी से नीचे चली गई थी। जिसे भारत की ओर से एक बार फिर से बढ़ाने का प्रयाय किया जा रहा है। यह तभी संभव है जब कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहें।

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कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा असर
वहीं कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होने से भारत की कल्याणकारी योजनाओं पर काफी असर पड़ सकता है। अगर अमरीका और ईरान में जंग के हालात बनते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होता है तो सरकार के लिए स्वच्छता, सबको घर, स्वास्थ्य, बिजली, गरीबों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर भारी-भरकम खर्चा करने में काफी मुश्किल आएगी।

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