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कर्नाटक चुनाव: राज्य में पीने को पानी नहीं लेकिन चुनावी रैलियों में पार्टियां बरबाद कर रही है करोड़ों रुपए का पानी

अपने रैली में अपने नेताओं को धूल से बचाने के लिए इन रैलियों में टैंकर के टैंकर पानी बहाए जा रहे हैं.. आइए जानते है पूरा मामला..

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rahul modi

नई दिल्ली। कावेरी जल विवाद देश के लिए कितनी बड़ी समस्या है ये आपसे बताने की जरूरत नहीं। सरकार इससे निपट नहीं पा रही। लेकिन 12 मई को होने वाले कर्नाटक टुनाव के लिए ताबड़तोड़ रैलियां की जा रही हैं। फिर चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों पार्टियों ने जी जान झोंक दिया है। लेकिन इन सबके बीच जो सबसे अहम है उसपर आपका ध्यान नहीं गया होगा। आपको बता दें कि जिस बैंगलुरु में ये पार्टियां चुनावी मैदान मारने के लिए रैलियां कर रही है.. वहां पानी की इतनी समस्या है कि लोगों को पानी खरीद कर पीना पड़ता है। लेकिन अपने रैली में अपने नेताओं को धूल से बचाने के लिए इन रैलियों में टैंकर के टैंकर पानी बहाए जा रहे हैं.. आइए जानते है पूरा मामला..

करोड़ों रुपए का पानी बरबाद
एक तरफ जहां बैंगलुरु लोग पीने के पानी के लिए 40 से 80 रुपए प्रति बोतल चका रहे हैं। वहीं देश की बड़ी पार्टियां टैंकर भर पानी केवल चुनावी रैली के मैदान पर इसलिए डाल रही हैं कि उनके नेता मिट्टी के धूल से गंदे न हो जाएं.. एक न्यूज चैनल के मुताबिक कांग्रेस पार्टी के मुखिया राहुल गांधी के रैली में स्टेज के बगल में केवल इसलिए एक टैंकर पानी बहाया गया ताकि उनको धूल न पड़ें। ठीक इसी तरह बीजेपी के अमित शाह की रैली को मिट्टी के उड़ते धूल से बचाने के लिए हजारों लीटर पानी बरबाद कर दिया जा रहा है। वो भी उस राज्य में जहां पानी के लिए लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही हैं।

पानी की कीमत
जैसा कि आपको पता है कि एक 20 लीटर पीने की पानी की कीमत 40 से 80 रुपए के बीच आती है। ऐसे में अगर एक टैंकर पानी जिसकी कीमत करीब 5000 से 10000 की बैठती है, और एक रैली में करीब 10 टैंकर बहाए जा रहे हैं तो आप समझ सकते हैं कि कैसे ये नेता पानी की बरबादी कर रहे हैं।

ऐसे बरबाद हो रहा करोड़ों का पानी
देश में कुछ इलाके ऐसे हैं जो सूखे की मार झेल रहे हैं और वहां पीने का पानी भी नसीब नहीं हो पा रहा है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सूखा प्रभावित इलाकों के दौरे पर निकले तो उससे पहले जमकर पानी बर्बाद किया गया। सिद्धारमैया को रास्ते में धूल न मिले इसके लिए उनके आने से पहले पूरे रास्ते में पानी पटाया गया। विपक्ष ने इसकी आलोचना की है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि गांववालों ने रास्ते को साफ़-सुथरा रखने के लिए पानी डाला।