Govt School: वर्ष 2000 Vs 2010 Vs 2019 में भारत में सरकारी स्कूलों की स्थिति: एक समीक्षा

Govt School: वर्ष 2000 Vs 2010 Vs 2019 में भारत में सरकारी स्कूलों की स्थिति: एक समीक्षा
Condition of Government Schools (2019) vs conditions of government schools (2010) vs conditions of government schools (2000)

Sunil Sharma | Updated: 18 Sep 2019, 02:18:01 PM (IST) शिक्षा

Govt School: लंदन की एक संस्था द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार भारत के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या पिछले पांच वर्षों में लगातार गिरती ही जा रही है।

Govt School: लंदन की एक संस्था द्वारा किए गए अध्ययन (मार्च 2017 में पब्लिश हुई रिपोर्ट) के अनुसार भारत के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या पिछले पांच वर्षों में लगातार गिरती ही जा रही है जबकि दूसरी ओर भारत के प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भारत में सरकारी टीचर्स की एवरेज सैलेरी चीन के सरकारी अध्यापकों से लगभग चार गुणा अधिक है परन्तु यहां की सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या चीन की तुलना में बहुत कम हैं।

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वर्ष 2000 Vs 2010 Vs 2019 में सरकारी स्कूलों की स्थिति
वर्ष 2010-11 की तुलना में वर्ष 2015-16 में प्राइवेट स्कूलों की संख्या में लगभग 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि सरकारी स्कूलों की संख्या में एक प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हुई। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 में लगभग 4400 सरकारी स्कूल ऐसे थे जहां एक भी छात्र ने एडमिशन नहीं लिया, वर्ष 2015-16 में ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़कर 5,000 से भी अधिक हो गई। इन आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 तथा 2010 के मुकाबले वर्ष 2000 सरकारी स्कूलों के लिए ज्यादा संभावनाओं से भरा था। उस समय तक देश में निजी स्कूलों की संख्या इतनी अधिक नहीं थी और देश के महत्वपूर्ण एग्जाम्स यथा बोर्ड एग्जाम, इंजीनियरिंग, मेडिकल एंट्रेस एग्जाम आदि में भी सरकारी स्कूलों के ही छात्र मेरिट लिस्ट में आते थे जबकि प्राइवेट स्कूलों का नाम तक नहीं होता था।

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आज वर्तमान में भी कुछ स्कूल यथा केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय स्कूल (तथा कुछ हद तक आर्मी स्कूल भी) हैं जो इन तमाम आंकड़ों के विपरीत जाकर छात्रों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं और जिनमें एडमिशन लेने के लिए छात्र उत्सुक रहते हैं। देखा जाए तो सरकार की पॉलिसी भी इसके लिए जिम्मेदार है। सरकारी स्कूलों में छात्रों की गिरती संख्या के पीछे सबसे बड़ा कारण है कि ये स्कूल अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा उपलब्ध नहीं करवाते। यदि इन स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई हो तथा अच्छे शिक्षक हो तो सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई आरंभ करवाई तो काफी सारे छात्रों ने वापिस सरकारी स्कूलों में एडमिशन लेना आरंभ कर दिया। इसी प्रकार राजस्थान सरकार ने सभी जिलों में अंग्रेजी मीडियम वाले मॉडल स्कूल खोलने की घोषणा की तो उनमें एडमिशन के लिए अभिभावकों की लाइनें लग गई।

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ऐसे में सहज ही कहा जा सकता है कि यदि सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई हो, अच्छी पढ़ाई हो तथा छात्रों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जाए तो सरकारी स्कूल पुनः एक बार ग्रोथ कर सकते हैं।

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