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आखिर करहल विधानसभा सीट से ही क्यों चुनाव लड़ना चाहते हैं अखिलेश यादव

यूपी विधानसभा चुनाव में 2022 दो हॉट सीटें इस वक्त पूरे देश में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। पहली गोरखपुर सदर और दूसरी करहल विधानसभा सीट। आखिर इन सीटों को लेकर लोगों में इतनी उत्सुकता क्यों है। वजह बहुत साफ है। गोरखपुर सदर से वर्तमान में यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ने वाले है तो करहल विधानसभा सीट से पूर्व सीएम व समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव भाजपा को चुनौती पेश करेंगे।
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लखनऊ

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Sanjay Kumar Srivastava

•

Updated: 21 Jan 2022, 2:53 PM IST

आखिर करहल विधानसभा सीट से ही क्यों चुनाव लड़ना चाहते हैं अखिलेश यादव

आखिर करहल विधानसभा सीट से ही क्यों चुनाव लड़ना चाहते हैं अखिलेश यादव

यूपी विधानसभा चुनाव में 2022 दो हॉट सीटें इस वक्त पूरे देश में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। पहली गोरखपुर सदर और दूसरी करहल विधानसभा सीट। आखिर इन सीटों को लेकर लोगों में इतनी उत्सुकता क्यों है। वजह बहुत साफ है। गोरखपुर सदर से वर्तमान में यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ने वाले है तो करहल विधानसभा सीट से पूर्व सीएम व समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव भाजपा को चुनौती पेश करेंगे। इन दोनों प्रत्याशियों में कई समानता है। दोनों ही मुख्यमंत्री पद बने। दोनों ही सांसद रहे हैं और पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। गोरखपुर संसदीय सीट से योगी पांच बार लगातार सांसद रह चुके हैं। इस सीट पर कई दशकों से मंदिर का ही प्रभाव रहा है, लेकिन इतनी चर्चा में यह सीट कभी नहीं रही है। मुख्यमंत्री योगी के उम्मीदवार बनते ही गोरखपुर सदर सीट सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है।

करहल से लड़ेंगे अखिलेश यादव

जब से अखिलेश यादव ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया है तब हर कोई कयास लगा रहा था कि अखिलेश या तो आजमगढ़ की किसी सीट से चुनाव लड़ेंगे या फिर सैफेई से चुनाव लड़ेंगे। पर सभी कयासों को दरकिनार करते हुए अखिलेश यादव ने करहल विधान सभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इस सीट से मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह भी एमएलए रह चुके हैं। वैसे अखिलेश यादव साल 1999 में कन्नौज संसदीय सीट से सांसद चुने गए थे। 2002 से लगातार चार बार से इस सीट पर सपा विधायक सोबरन सिंह का कब्जा है।

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करहल विधानसभा है समाजवादियों का गढ़

करहल विधानसभा क्षेत्र को समाजवादियों का गढ़ माना जाता है। यह मैनपुरी जिले का अंग है। करहल विधानसभा क्षेत्र में कुल 371261 मतदाता है। जातीय समीकरण के लिहाज से यादव मतदाताओं की संख्या 1.25 लाख के आसपास है। वहीं शाक्‍य 35 हजार, क्षत्रिय 30 हजार और दलित मतदाताओं की संख्‍या कुल 22 हजार है। इसके अलावा ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 16 हजार है। इस सीट पर 1980 में पहली बार कांग्रेस के शिवमंगल सिंह व चुनाव 2002 में भाजपा से सोबरन सिंह जीते थे। बाद में सोबरन सिंह सपा में आ गए थे।

जिसके साथ गोरखनाथ मंदिर वोट उसी को

गोरखपुर सीएम योगी आदित्यनाथ की संसदीय सीट रही है। अब सीएम योगी गोरखपुर सदर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। योगी पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इस सीट से योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ हिंदू महासभा से विधायक चुने गये थे। वैसे गोरखपुर सदर ऐसी सीट है जहां पर लाख कोशिश करने के बाद भी सारी पार्टियों का जातीय समीकरण बिगड़ जाता है। प्रत्याशी चाहे जो भी हो गोरखनाथ मंदिर जिसके साथ है, यहां की जनता उसी को वोट करती है।

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जाति को देखकर नहीं मिलता है वोट

गोरखपुर सदर सीट पर करीब 4.50 लाख वोटर हैं। जिनमे सबसे अधिक 95 हजार कायस्थ वोटर हैं। इसके अलावा 55 हजार ब्राह्मण, 50 हजार मुस्लिम, 25 हजार क्षत्रिय, 45 हजार वैश्य, 25 हजार निषाद, 25 हजार यादव, 20 हजार दलित हैं। इसके अलावा पंजाबी, सिंधी, बंगाली और सैनी कुल मिलाकर करीब 30 हजार वोटर हैं। पर सभी जातियों के वोटर चुनाव में जाति को देखकर नहीं बल्कि गोरखनाथ मंदिर यानी योगी आदित्यनाथ के नाम पर वोट देते हैं। इस हिसाब से गोरखपुर सदर सीट योगी के लिए सुरक्षित सीट है।

करहल से लड़ेंगे अखिलेश यादव

- करहल विधानसभा क्षेत्र को समाजवादियों का गढ़
- अखिलेश पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे
- करहल मुलायम के राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह की सीट
- 2002 से लगातार चार बार सपा का कब्जा
- कुल चार लाख में 1.25 लाख यादव मतदाता
- मैनपुरी मुलायम परिवार के बच्चों को दी राजनीति पहचान

गोरखपुर सदर से सीएम योगी की चुनौती

- गोरखपुर, योगी आदित्यनाथ की संसदीय सीट रही है।
- योगी पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे
- योगी के गुरु विधायक चुने गये थे।
- जातीय समीकरण काम नहीं आता
- जहां गोरखनाथ मंदिर वोट भी वहीं पड़ेगा
- गोरखपुर सदर सीट पर करीब 4.50 लाख वोटर।