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राजस्थान चुनाव: राजनीतिक दलों की कथनी और करनी में अंतर, महिलाओं को टिकट देने में रुचि नहीं दिखा रहीं पार्टियां

Rajasthan Election: देश में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का बिल पास कर दिया गया है। राजनीतिक दल भी चुनाव के वक्त महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने एवं टिकट वितरण में उनकी बराबरी की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात जरूर करते हैं, लेकिन टिकट की घोषणा के वक्त वे पीछे हट जाते हैं।

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टोंक

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Nupur Sharma

Oct 28, 2023

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राकेश वर्मा
Rajasthan Assembly Election 2023 : देश में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का बिल पास कर दिया गया है। राजनीतिक दल भी चुनाव के वक्त महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने एवं टिकट वितरण में उनकी बराबरी की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात जरूर करते हैं, लेकिन टिकट की घोषणा के वक्त वे पीछे हट जाते हैं। टोंक जिले की चारों विधानसभा टोंक, निवाई, देवली-उनियारा व मालपुरा सीटों के 1952 से अब तक के इतिहास पर नजर डालें तो यहां ऐसा ही देखने को मिल रहा है। अब तक हुए चुनाव में सिर्फ एक महिला ही विधायक चुनी गई है। ये महिला टोंक विधानसभा क्षेत्र की पूर्व विधायक जकिया इनाम है। वे दो बार मंत्री भी रहीं। हालांकि उनका निधन हो चुका है। दूसरी ओर मालपुरा सीट से स्वतंत्र पार्टी ने जिले की पहली महिला प्रत्याशी के रूप में पूर्व राजमाता गायत्री देवी को टिकट दिया गया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इनके अलावा भाजपा-कांग्रेस ने महिलाओं को टिकट में तरजीह नहीं दी है।

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गायत्री देवी जिले की पहली महिला उम्मीदवार रही, लेकिन चुनाव हार गई थीं
बहरहाल 1967 में टोंक जिले की मालपुरा विधानसभा क्षेत्र से स्वतंत्र पार्टी से राजमाता गायत्री देवी चुनाव लड़ी थीं। कहा जाता है कि जिले में विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ने वाली ये पहली महिला थीं। मालपुरा में हुए 1967 के विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार दामोदर व्यास का मुकाबला स्वतंत्र पार्टी की राजमाता गायत्री देवी से हुआ। इस चुनाव में दामोदर व्यास को 26 हजार 408 मत मिले, वहीं गायत्री देवी को 17 हजार 388 मतों से ही संतोष करना पड़ा।

टोंक से तीन बार जीतने वाली पहली महिला थी जकिया, मंत्री भी बनी थी
कांग्रेस सरकार में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास मंत्री रही जकिया इनाम टोंक से 3 बार विधायक रही थी। उन्होंने वर्ष 1985 में पहली बार कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में भाग्य आजमाया था। पहली बार में विधायक चुनने के बाद हरिदेव जोशी मंत्रिमंडल में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री बनी थीं। जकिया इनाम 1985, 1990, 1998, 2003, 2008 और 2013 में टोंक से कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं। 1985, 1998 और 2008 में वे विधायक चुनी गई। 1993 के चुनाव में उनको टिकट नहीं मिला था। 2013 के चुनाव में जकिया इनाम को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में उनकी जमानत भी नहीं बच पाई। टोंक जिले में अब तक जकिया ही एक ऐसी महिला उम्मीदवार रही हैं जो तीन बार विधायक बनीं थीं। वे दूसरी बार अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल में महिला एवं बाल विकास मंत्री रहीं।

भाजपा ने एक भी महिला को प्रत्याशी नहीं बनाया
कांग्रेस ने तो टोंक से जकिया को छह बार महिला प्रत्याशी के रूप में उतारा था, लेकिन इस मामले में भाजपा पीछे रही है। उसने किसी भी सीट एक भी महिला को मैदान में नहीं उतारा है। हालांकि चुनाव से पहले भाजपा नेताओं की ओर से महिलाओं को टिकट वितरण में पूरी तरजीह देने का वादा भी किया था। पर परििस्थतियां बदलती देख पार्टियों का जिताऊ उम्मीदवारों पर ही फोकस होकर रह गया है।

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इस बार भी अब तक एक भी महिला को टिकट नहीं
जिले की दो-दो सीटों पर कांग्रेस एवं बीजेपी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। लेकिन महिला को टिकट नहीं दिया गया है। जबकि टिकट मांगने वालों की फेहरिस्त में कई महिलाएं थी। कांग्रेस ने टोंक से सचिन पायलट व देवली उनियारा से हरीश मीणा को मैदान में उतारा है। जबकि भाजपा ने मालपुरा से वर्तमान विधायक कन्हैयालाल चौधरी व देवली उनियारा से विजय बैंसलों को टिकट दिया है। अब भाजपा को शेष बीच टोंक व निवाई में प्रत्याशी घोषित करने है, जबकि कांग्रेस को निवाई व मालपुरा में उम्मीदवार उतारना है। देखना ये है कि क्या इन जगहों से कोई महिला प्रत्याशी की किस्मत चमकेगी या नहीं।

इनका कहना है...मोदी सरकार ने महिलाओं को आगे बढ़ाया है। महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का बिल पास कर दिया है। पार्टी स्तर पर भी उनको आगे बढ़ाने में सतत अग्रसर हैं।-राजेन्द्र पराणा, जिलाध्यक्ष, भाजपा