
Raebareli Ground Report Before UP Assembly Elections 2022
रायबरेली. अपनी छोटी सी पान की गुमटी से बाहर पैर लटकाए बैठे अधेड़ उम्र के गुडडू शर्मा जैसे यादों में खो गए हैं। सोच-सोच कर कहते हैं- 'आज आप जो कुछ देख रहे हैं सब कांग्रेस का ही तो किया है। इतने बड़े-बड़े प्रोजेक्ट और किसने लगाए? उन्हें दुकान पर ही खड़े उन युवाओं की परवाह नहीं, जो उन्हें सुनकर नजर तिरछी कर रहे हैं। उनकी बात इस लिहाज से मायने रखती है कि इंदिरा गांधी के यहां से खास तौर पर दूसरी बार सांसद बनने के बाद से यहां लगभग दो दर्जन बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगीं। गुड्डू शर्मा इनमें से इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्री (आईटीआई), कपड़ा, चीनी और पेपर मिल के अलावा रेल कोच फैक्ट्री को गिनाते हैं। मलिक मऊ रोड पर उनकी दुकान के आगे खड़े संजू मिश्रा को यह पसंद नहीं आता। आवाज थोड़ी सख्त करते हुए कहते हैं- 'बाबा, इन फेर में ना पड़ो। नौकरियां तो बाहर वालों को मिलीं।' लगता है ऐसी बहस यहां कई दफा पहले हो चुकी हो। गुड्डू ने झट जवाब दिया, 'रोजगार का वादा तो मोदी ने किया था! कितनों को दिलाए? और ये जो फ्री राशन है। चुनाव बाद कुछ ना मिले...। ऐसी दिलचस्प बहसों का लब्बोलुआब यही समझिए कि अब लोग राजनीति में बदलते दौर को भांप रहे हैं।
चटनी नहीं, भरपेट चाहिए...
दरअसल, रायबरेली एक वीआइपी सीट कही जाती है जहां से फिरोज गांधी, इंदिरा गांधी, अरुण नेहरू और सोनिया गांधी ने प्रतिनिधित्व किया है। इस कारण यहां न सिर्फ औद्योगिक इकाइयां बल्कि राष्ट्रीय स्तर के कई अन्य संस्थान और उनकी शाखाएं भी खुलीं। इनमें एम्स, निफ्ट, फुटवियर डिजाइन और विकास संस्थान, राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, उड्डयन विश्वविद्यालय शामिल हैं। कांग्रेस राज में खेती के लिए नहरों की व्यवस्था भी दूसरे इलाकों से बेहतर हुई। लेकिन सोनिया नगर में अखिलेश कुमार साहू कहते हैं, 'हमें चाहिए भरपेट भोजन और यह सब हैं चटनी। पिछली जनगणना के आंकड़े भी देखें तो घर में पेयजल, शौचालय, मोटरसाइकिल, कार, इंटरनेट, मोबाइल, टीवी, साक्षरता, लैंगिक अनुपात जैसे 13 पैमानों में से सात में यह जिला उत्तर प्रदेश के औसत से भी पीछे है। वैसे भी अब उत्तर प्रदेश में वीआइपी क्षेत्र बनारस और गोरखपुर हो गए हैं।
दूर बैठा तो क्या नेता!
बस्तेपुर के राकेश मौर्य कहते हैं, 'नेता तो वही हो जो साथ रहे। इतनी दूर बैठा वो क्या नेता? काम नहीं आए तो वीआइपी का क्या करें? यहां रायबरेली का तो बच्चा-बच्चा राय बहादुर है।Ó सोनिया गांधी के सांसद रहते हुए भी यहां की पांच विधानसभा सीटों में से सिर्फ एक कांग्रेस के पास बची है। अमेठी ने तो राहुल गांधी को भी हरा कर वापस भेज दिया है। अब सोनिया गांधी भी दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। 44 माह उनके इंतजार के बाद अब जिला विकास और अनुश्रवण समन्वय समिति प्रमुख अमेठी सांसद स्मृति ईरानी हो गई हैं।
चमक देखें या अपनी जान
यों तो पूरे यूपी में ही स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर जगतपुर ब्लॉक में विजय सिंह कहते हैं कि आप लोग बाहर से आने वाले यहां एम्स की बिल्डिंग और चमक-दमक देखते हैं, पर हम तो अपनी जान को देखते हैं। बुजुर्ग महिला नगीना कहती हैं गरीबों के लिए कहीं कुछ नहीं है। चार दिन पहले भदोखर गांव की औरत को एएनएम सेंटर के बाहर सड़क पर बच्चा जनना पड़ा और वह मर भी गया। बड़े स्पेशलाइज्ड शिक्षण संस्थान तो खुले, पर स्कूल-कॉलेजों की स्थिति बुरी है। जिले में सड़कों का बुरा हाल है, जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है।
100 साल का किसान आंदोलन
मुंशीगंज में साई नदी किनारे अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन करते शहीद हुए किसानों का शहीद स्मारक तलाशते हमें शाम हो जाती है तो स्थानीय किसान सतन पटेल हमें रास्ता दिखाते हैं। कहते हैं हम किसानों को कोई रास्ता नहीं दिख रहा। लागत, कीमत और फसल की आवारा मवेशियों से सुरक्षा को ले कर परेशान हैं। 07 जनवरी 1921 को अंग्रेजों ने आंदोलनकारी किसानों पर गोली चलवाई थी। पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी ने जलियांवाला बाग कांड से तुलना की थी। जवाहर लाल नेहरू का बयान भी दर्ज हुआ था- 'लाशों से लदे एक ही तांगे पर मैंने लगभग 12 टांगें देखीं।' जिले के लोग मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हैं और इसमें आमदनी उस तरह बढ़ नहीं रही। कृषि अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह चंदेल के मुताबिक यहां बहुत सी कृषि योग्य परती जमीन है जिसे सिंचाई के बेहतर इंतजाम से उपयोग लायक बनाया जा सकता है। दो बीघे की खेती करने वाले दामोदर पासवान कहते हैं, 'किसान पहले किसान बन कर वोट करें तब तो उसके काम हों...।'
Updated on:
09 Dec 2021 10:30 am
Published on:
09 Dec 2021 10:29 am
बड़ी खबरें
View Allचुनाव
ट्रेंडिंग
