
दौलत सिंह चौहान
Rajasthan Assembly Election 2023 : राजस्थान के सचिवालय में अधिकारी-कर्मचारी भले ही लेटलतीफ हों, मगर राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के सबसे बड़े केंद्र में कोई ऐसी भी है जो टाइम की बड़ी पंक्चुअल है, अरे आप कुछ उलटा-सुलटा दिमाग मत दौड़ाइए, मैं तो आग की बात कर रहा हूं। ये आग अपने फिक्स टाइम से कभी इधर-उधर नहीं होती। ईडी की तरह इसकी टाइमिंग भी हर बार सवालों के घेरे में रहती है।
जैसे ही इस शासन मुख्यालय में बैठने वाली सरकार चुनाव में जनता के पास जाती है पीछे से सचिवालय के किसी न किसी कक्ष में आग लग जाती है। इसको लेकर उस समय जो भी सत्ता में होता है वो कहता है आग शॉर्ट सर्किट से लगी है और विपक्ष कहता है आग लगी नहीं लगाई गई है भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने के लिए। कौन-सच्चा कौन झूठा आप-हम सब जानते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि हमारे राजस्थान, जहां लंबे समय से जनता हर पांच साल में सरकार बदल देती है, ऐसे में सचिवालय के किसी कक्ष में आग लगने पर पक्ष और विपक्ष जो प्रतिक्रिया देते हैं वह बिलकुल एक-दूसरे की कॉपी पेस्ट होती है। पिछली बार की आग के समय शॉर्ट सर्किट वाली जो प्रतिक्रिया सत्ता पक्ष भाजपा ने दी, वो इस बार सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेताओं ने दी है और भ्रष्टाचार के सबूत जलाने की जो प्रतिक्रिया इस बार भाजपा ने दी है वह पिछली बार कांग्रेस ने दी थी। इस बार खास बात यह है कि सचिवालय के जिस कक्ष में आग लगी, वह सीएम अशोक गहलोत के विशेषाधिकारी लोकेश शर्मा का है। सभी जानते हैं लोकेश अभी फोन टेपिंग कांड में कानूनी लड़ाई में उलझे हुए हैं। सीएम गहलोत का सोशल मीडिया का काम देखने वाले शर्मा ने सरकार पर आए संकट के दौरान एक फोन कॉल की रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था। उनके खिलाफ राजस्थान से केंद्र में एक मंत्री ने केस कर दिया, जिसकी लंबे समय से पेशियां पड़ रही है। विपक्ष (जो अभी भाजपा है) के नेताओं का आरोप है कि आग किसी शॉर्ट सर्किट से नहीं लगी बल्कि फोन टेपिंग और भ्रष्टाचार के सबूत जला कर नष्ट करने के लिए लगाई गई है। पांच साल पहले अगर आपको याद हो तो सचिवालय में लगी आग के बाद सेम टू सेम बयान कांग्रेस (तब विपक्ष) के नेताओं ने दिया था। कि आग किसी शॉर्ट सर्किट से नहीं लगी बल्कि भ्रष्टाचार के सबूत जला कर नष्ट करने के लिए लगाई गई है।
कहने का मतलब ये आग हर बार चुनावों से ऐन पहले लगती है, इसका कारण जो भी हो, लेकिन हकीकत में दोनों ही स्थितियों में जनता की गाढ़ी कमाई फुंक जाती है। इनमें से किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि आज तक सचिवालय में आग लगने की जितनी भी घटनाएं हुई उनमें से एक की भी गहराई से छानबीन कर किसी ने कोई निष्कर्ष नहीं बताया कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी या किसी ने भ्रष्टाचार के सबूत नष्ट करने के लिए लगाई। ऐसे में तमाशबीन बनी जनता हर बार इस नाटक को देखती भर रह जाती है।
Published on:
06 Nov 2023 09:00 am
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