
शादाब अहमद
अलीगढ़ ताले और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के लिए मशहूर है। सियासी दलों को विधानसभा चुनाव जीतने के लिए अलीगढ़ में जीत की चाबी धार्मिक ध्रुवीकरण में ही नजर आ रही है। यही वजह है कि मतदाता खुलकर एएमयू व धार्मिक मुद्दों पर बात भी कर रहे हैं। इनके सामने सड़कों पर पल-पल में लगने वाले ट्रैफिक जाम के साथ बदहाल सड़कों व स्मार्ट सिटी मिशन में लेटलतीफी जैसे मुद्दे पिछड़ते दिख रहे हैं। दूसरी तरफ कासगंज में पुलिस हिरासत में अल्ताफ की मौत भी चुनावी मुद्दा बन गया है।
हाथरस से अलीगढ़ पहुंचते ही हमारा सामना लंबे ट्रैफिक जाम से हुआ। इस बीच फूल चौराहे पर हमने एक चाय की दुकान पर कुछ लोगों से चुनाव की चर्चा शुरू कर दी। ट्रैफिक जाम को दिखाते हुए रामहेत अग्रवाल कहने लगे कि पिछले साढ़े चार साल में इसको नहीं सुधारा जा सका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यही सबसे बड़ा विकास है। यह बात सुन उनके पास खड़े युवक राजेन्द्र दुबे विकास कार्य गिनाते हुए कहने लगे, 'ऑवर लेडी ऑफ फातिमा स्कूल के पास, किशनपुर, मैरिस रोड, केला नगर रोड, कलक्ट्रेट के यहां ट्रैफिक लाइट लगाई गई हैं। स्मार्ट सिटी के तहत सड़क और रोड लाइट लगाने को यह विकास कार्य नहीं कहेंगे क्या?'
यहां से हम आगे बढ़ते हुए डॉ. कमल याज्ञनिक के क्लीनिक पहुंचे। उन्होंने महंगाई, विकास कार्यों को मुद्दा तो बताया, लेकिन कहा कि सियासी दलों को ये मुद्दे रास नहीं आते हैं। उन्हें अलीगढ़ में जीत की चाबी ध्रुवीकरण में ही दिखती है। इसका माहौल तैयार होना शुरू हो चुका है। यहां से बस स्टैंड परिसर में एएमयू पर चर्चा शुरू की, तो इमरान खान कहने लगे कि एएमयू के कुछ प्रोफेसर लेक्चर तो देते हैं, लेकिन वोट देने नहीं जाते हैं। नेताओं को अब ध्रुवीकरण छोड़ अलीगढ़ के विकास की बात करनी चाहिए।
यहां से हम एएमयू क्षेत्र पहुंचे। जहां अस्पताल के पास मेडिकल स्टोर संचालक रशीद जमाल से चुनावी चर्चा शुरू की, तो वह खुलकर कहने लगे कि कोविड के समय 25 दिन लगा ही नहीं कि यहां सरकार भी थी। वह महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा की समस्या के साथ कानून व्यवस्था को सबसे बड़ा मुद्दा मानते हैं। उनका कहना है कि अलीगढ़ समेत यूपी में मुस्लिम व दलितों को दबाकर डराने की कोशिश की गई है। युवा राशिद खान इस पर सहमति जताते हुए कहने लगे, भेदभाव की हद यह है कि सरकार ने एएमयू में ऑफलाइन क्लासेज शुरू करने की मंजूरी अब तक नहीं दी है। यहां से आगे निकले तो सेन्ट्रल पाइंट पर युवा व्यापारी विशाल वाष्र्णेय से भाजपा के चुनाव पूर्व घोषणा पत्र व वादों पर चर्चा शुरू हो गई। वह कहने लगे, 'स्मार्ट सिटी के तहत कुछ सड़कों को चौड़ा कर ट्रैफिक लाइट लगाई है। यह माइनर डेवलपमेंट है, मेजर डेवलपमेंट कुछ नहीं हुआ है।'
राम मंदिर निर्माण के फिर से चुनाव में मुद्दे बनने पर विशाल ने साफगोई से कहा, 'अब यह क्या मुद्दा बनेगा, भाजपा ने वादा किया और अब उस पर निर्माण चल रहा है। अब महंगाई ही सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा।' राजस्थान के पूर्व राज्यपाल दिवंगत कल्याण सिंह के दबदबे वाले अतरौली पहुंचे, जहां युवक विकास कुमार ने विकास कार्यों के नाम पर गंदगी दिखा दी, लेकिन एक विवादित वीडियो दिखाते हुए कहा, 'अब हम क्या करें?'
यहां से हम कासगंज पहुंचे और यहां के प्रमुख चौराहे पर खड़े कुछ लोगों से चुनावी चर्चा शुरू की तो मनोज लोधी बोलने लगे, 'कुछ वादे पूरे हुए हैं और कुछ नहीं। कासगंज में गिनाने को कोई बड़ा काम नहीं है। जनता को मौका मिलते ही अपना जौहर दिखाकर तख्ता पलट देती है।' महंगाई व राम मंदिर के सवाल पर तपाक से कहने लगे, 'राम मंदिर निर्माण को अब सरकार व सुप्रीम कोर्ट जाने, जनता को इससे कोई लेना-देना नहीं है। महंगाई की बात तो छोड़ ही दो, जिस तन लागे सो तन जाने, कोई न जाने पीर पराई।' उनके पास खड़े अब्दुल खालिक कहने लगे,' विकास के नाम पर कासगंज सिफर है।बारिश में सड़कों पर पानी भर जाता है।' अल्ताफ की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में खालिक ने कहा, 'यह आत्महत्या नहीं है। सरकार का रवैया भेदभाव वाला है।' कोरोना प्रबंधन पर सवाल करते ही कासगंज की एक होटल में मैनेजर सौरभ चौधरी कहने लगे कि वह मथुरा में 20 हजार रुपए की नौकरी छोड़कर यहां 8 हजार रुपए में काम कर रहे हैं। इससे अंदाजा लगा लीजिए कि क्या हाल रहा होगा।
Published on:
19 Nov 2021 11:26 am
बड़ी खबरें
View Allचुनाव
ट्रेंडिंग
