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Uttar Pradesh Assembly Election 2022 : यूपी की राजनीति में नई पौध का कमाल, विरासत आगे बढ़ाने को काम कर रहे बेमिसाल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों ( Uttar Pradesh Assembly Election 2022 ) की घोषणा होने के बाद राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है। दावेदार टिकट को लेकर दौड़भाग कर रहे हैं। जाति और अपराध की राजनीति को लेकर बढ़ रहे बाहुबलियों के बीच राजनीति में एक युवा पीढ़ी भी मजबूती से कदम रख रही है, ये युवा अपराध से दूर साफ-सुथरी राजनीति करते कामयाबी की इबारत लिख रहे हैं।

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लखनऊ

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Shiv Singh

Jan 10, 2022

Uttar Pradesh Assembly Election 2022 :  यूपी की राजनीति में नई पौध का कमाल, विरासत आगे बढ़ाने को काम कर रहे बेमिसाल

Uttar Pradesh Assembly Election 2022 : यूपी की राजनीति में नई पौध का कमाल, विरासत आगे बढ़ाने को काम कर रहे बेमिसाल

शिव सिंह
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. यूपी की राजनीति में नई पौध लहलहा रही है। नई नस्ल के यह नुमाइंदे अधिकतर सियासतदां परिवारों से जुड़े हैं। Uttar Pradesh Assembly Election 2022 में यह नयी पौध अपना जलवा दिखाने को बेताब है। अच्छा संकेत यह है कि तमाम युवा चेहरे ऐसे हैं, जो बाहुबल, अपराध और दबंगई की राजनीति से दूर ईमानदार और खूब पढ़े लिखे और समझदार हैं। भाजपा,सपा, बसपा और कांग्रेस चारों प्रमुख दलों में युवा चेहरों की भरमार है जो अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए इस बार चुनाव मैदान में होंगे।
यूपी के तीन मुख्यमंत्रियों के परिवारीजन राजनीति में
विरासत में सियासत का विरोध करने वाली भारतीय जनता पार्टी में नयी नस्ल के नुमांइदों की लंबी फौज मौजूद है। यूपी के पूर्व सीएम और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह नोएडा से विधायक हैं। यूपी के ही एक और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के 26 साल के पोते संदीप सिंह अतरौली से विधायक हैं। यह योगी सरकार में राज्य मंत्री हैं। इनके पिता राजवीर सिंह एटा से भाजपा के सांसद हैं। यूपी के सीएम रहे हेमवती नंदन बहुगुणा की विरासत संभाल रहीं प्रयागराज से भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी भी इस बार टिकट के दावेदार हैं। लखनऊ उत्तर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नीरज बोरा के पिता डीपी बोरा भी विधायक रहे हैं। रायबरेली के बाहुबली विधायक रहे अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह ने रायबरेली सदर से विधायक हैं। विदेश से मैनेजमेंट की पढ़ाई करके लौंटी अदिति का युवाओं में खासा क्रेज है। अब वह भाजपा में हैं। इलाहाबाद के दिग्गज नेता अशोक बाजपेई के बेटे हर्षवर्धन वाजपेयी प्रयागराज उत्तर विधानसभा सीट से विधायक हैं। उनकी दादी राजेंद्र कुमारी वाजपयी इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में मंत्री थीं। इसी तरह कांग्रेस बड़े नेताओं में शुमार रहे जितेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद योगी सरकार में मंत्री हैं। कैसरगंज के भाजपा सांसद ब्रज भूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोंडा शहर से भाजपा विधायक हैं। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य बदायूं से भाजपा सांसद हैं।

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देश का सबसे बड़ा राजनीतिक घराना सैफई में
देश का सबसे बड़ा राजनीतिक घराने के मुखिया मुलायम सिंह यादव हैं। मुलायम के बेटे अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी की बागडोर संभाले हैं। उनके चाचा शिवपाल यादव और बेटे आदित्य, प्रो. राम गोपाल यादव और उनके बेटे पूर्व सांसद अक्षय यादव सहित कई अन्य सदस्य राजनीति में हैं। इसी तरह रामपुर से सपा सांसद मोहम्मद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम स्वार टांडा विधानसभा से विधायक थे। प्रयागराज से सपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री रेवती रमण सिंह के बेटे उज्जवल रमण सिंह करछना सीट से विधायक हैं। बाराबंकी के चर्चित नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा भी मंत्री रह चुके हैं और इस बार फिर दावेदार हैं।
मायावती आकाश आनंद को सौंप सकती हैं डोर
बसपा मुखिया सुश्री मायावती के भतीजे आकाश आनंद पार्टी में बड़ी भूमिका निभाने में जुटे हैं। लंदन से एमबीए करके लौटे आनंद पार्टी के बड़े पदाधिकारी हैं। जबकि पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्र के बेटे दीपक मिश्र पार्टी में अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
कांग्रेस में भी विरासत की राजनीति को बढ़ाने वालों की कमी नहीं है। प्रमोद तिवारी की बेटी व कांग्रेस विधानमंडल की नेता आराधना मिश्रा मोना प्रतापगढ़ के रामपुर खास से विधायक हैं। रामपुर के नवाब खानदान के हैदर अली खान ऊर्फ हमजा मियां भी राजनीति में हैं। हमजा मियां के बाबा-दादी, पिता कई बार सांसद-विधायक रह चुके हैं।

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चौधरी चरण की विरासत संभाल रहे जयंत
राष्ट्रीय लोकदल की बागडोर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी के हाथों है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह के निधन के बाद जयंत चौधरी जाट व किसानों के बीच मजबूत पैठ रखते हैं। इसी तरह पिछड़ा वर्ग के बड़े नेता रहे सोने लाल पटेल की बेटी अनुप्रिया पटेल (अपना दल-एस) से सांसद हैं और केंद्र में मंत्री भी हैं। अपने पिता की विरासत के सहारे अपना और पार्टी को एक बड़ा मुकाम देने में सफल हुईं हैं।