
Uttar Pradesh Assembly Election 2022 : आसान नहीं है सांडी सीट जीतना, भिड़ेंगे भाजपा, सपा और बसपा
हरदोई (पत्रिका न्यूज नेटवर्क). उत्तर प्रदेश की राजधानी से सटे हरदोई जिले की सांडी विधानसभा सीट ( Sandi Assembly constituency) पर अगले विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election 2022 ) को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। यहां चौथे चरण में 23 फरवरी 2022 को मतदान होगा। इस चुनाव में सत्तारूढ़ दल को समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से बड़ी चुनौती मिलेगी।
वर्तमान में सांडी विधानसभा सीट ( Sandi Assembly constituency) से भारतीय जनता पार्टी के प्रभाष कुमार विधायक हैं। प्रभाष ने वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस के ओमेंद्र कुमार वर्मा को परास्त किया था। प्रभाष को 72044 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के ओमेंद्र कुमार वर्मा को 51819 वोट। भाजपा उम्मीदवार ने यह सीट 20225 मतों के अंतर से जीती थी। पांच साल तक सरकार में रहने के कारण Uttar Pradesh Assembly Election 2022 में भाजपा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्र के मतदाताओं को संतुष्ट करना है।
वर्ष 2022 के चुनाव में चुनौती
Uttar Pradesh Assembly Election 2022 में सत्तारूढ़ भाजपा के लिए सांडी विधानसभा सीट पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की मजबूत पकड़ है और इस सीट को हर हाल में पाना चाहेगी। वर्ष 2017 के चुनाव में सपा-कांग्रेस का गठबंधन होने के कारण यह सीट कांग्रेस के खाते में गई थी लेकिन चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार के हार जाने के कारण इस सीट से कांग्रेस,सपा और बसपा के दावेदारों की भी लंबी लाइन है। भाजपा जहां जन विश्वास यात्राओं के जरिए चुनावी माहौल बना चुकी है, वहीं सपा-बसपा भी चौपालों व अन्य के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंच चुकी है। चुनाव आयोग के निर्देशों के मद्देनजर राजनीतिक दल बहुत संभल कर सोशल प्लेटफार्म से ही मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। पहले वर्ष 2012 के चुनाव में यहां से समाजवादी पार्टी की राजेश्वरी ने जीत दर्ज की थी। मोदी लहर ने वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की।
ये हैं क्षेत्र के मुख्य मुद्दे
विधानसभा क्षेत्र ( Sandi Assembly constituency) में मुद्दे जिले की अन्य विधानसभा सीटों की तरह ही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सड़क, सार्वजनिक परिवहन साधनों, और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है तो वहीं बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए अच्छे संस्थानों की कमी है। कोरोना काल में सबसे अधिक पीडि़त गरीब परिवार ही रहे। केंद्र सरकार से मुफ्त में राशन मिलने से इस वर्ग को थोड़ी राहत जरूर मिली है। विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे कभी हावी नहीं हो पाते हैं,क्योंकि पार्टियों के समर्थक कभी जाति के नाम पर वोट मांगते हैं तो कभी क्षेत्र के नाम पर। ऐसे में वास्तविक समस्याओं को लेकर कभी चर्चा ही नहीं हो पाती है।
Published on:
11 Jan 2022 05:09 pm
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