
कोरोना इफैक्ट से एक साल लेट हो चुके निकाय चुनाव दिसंबर तक जरूरी, नहीं तो फिर से बनानी होगी मतदाता सूची
कोलकाता (प. बंगाल) से रवीन्द्र राय
पिछले लोक सभा चुनाव की तरह प. बंगाल में विधानसभा चुनाव West Bengal Assembly Elections 2021 पूरी तरह ममता बनाम भाजपा लग रहा है। कॉग्रेस, वाम और आइएसएफ गठबंधन अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करने की लड़ाई लड़ रहा है। साथ ही गठबंधन को उ्मीद है कि राज्य में खंडित जनादेश आने पर वो किंगमेकर की भूमिका में होगा। कॉग्रेस सूत्र दावे करते हैं कि गठबंधन को खंडित जनादेश में किंगमेकरर की भूमिका में आने की उ्मीद है और महाराष्ट्र मॉडल से इनकार नहीं कि या जा सकता है। महाराष्ट्र में भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए शिवसेना व राष्ट्रवादी कॉग्रेस गठबंधन से कॉग्रेस ने गठबंधन किया है। एक वरिष्ठ कॉग्रेस नेता पहचान गोपनीय रखते हुए कहते हैं कि अगर त्रिशंकु विधानसभा बनती है तो हम सा्प्रदायिक शक्तियों को दूर रखने के लिए किंगमेकर की भूमिका निभा सक ते हैं। यह दो बुरी ताकतों के बीच चुनाव करने का मामला है और संभव है कि हम कम बुरी ताकत का चुनाव करें जो तृणमूल कॉग्रेस है। हम अपनी नीतियों को लागू क रेंगे और शासन पर नियंत्रण रखेंगे।
आजादी के बाद से करीब छह दशक तक शासन कर चुकी कांग्रेस और माकपा नीत वाम मोर्चा अपने वैचारिक एवं राजनीतिक अंतरों को छोड़क र 2016 के विधानसभा चुनाव के बाद दूसरी बार साथ आए हैं। धर्म गुरु पीरजादा
अबास सिद्दीकी नीत इंडियन सेयुलर फ्रं ट (आइएसएफ ) गठबंधन में तीसरा धड़ा है जो पूर्व प्रतिद्वंद्वियों का असंभव-सा दिखने वाला गठबंधन है। कॉग्रेस-वाम दल और आइएसएफ ने अपने गठबंधन को संयुक्त मोर्चा नाम दिया है और उसे उ्मीद है कि सāाारू ढ़ तृणमूल कॉग्रेस और विपक्षी भाजपा के मतों में सेंध लगाक र वो बढ़त बनाने में कामयाब होगा। विश्वसनीय विपक्ष के नहीं होने की वजह से गत सालों में भगवा पार्टी ने विरोधी मतों में सेंध लगाई है। संयुक्त मोर्चा को उ्मीद है कि पीरजादा की मौजूदगी से पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मतों को अपनी ओर आक र्षित क रने में उसे मदद मिलेगी, सिवाय उāार बंगाल के , जहां कॉग्रेस का अल्पसख्ंयक मतों पर प्रभाव है। अब तक तृणमूल कॉग्रेस समुदाय के बड़े हिस्से को अपने पक्ष में क रने में कामयाब रही है। हालांकि , आइएसएफ के साथ गठबंधन की अपनी समस्या है योंकि कॉग्रेस एवं वाम दलों पर धर्मनिरपेक्ष होने की विश्वसनीयता खोने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
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सिद्दीकी के संगठन की तुलना आजादी से पहले वाली ऑल इंडिया मुस्लिम लीग और असम की एआइयूडीएफ से की जा रही है और माना जा रहा है कि इससे हिंदू मतों का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ेगा। हालांकि , तृणमूल कॉग्रेस और भाजपा ने गठबंधन के साझेदारों को एक -दूसरे की क ठपुतली होनेका आरोप लगाया है। माना जा रहा है कि भगवा पक्ष आइएसएफ के चुनावी मैदान में उतरने से खुश है योंकि उसका मानना है कि इससे तृणमूल कॉग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की अल्पसंख्यक मतों पर पकड़ ढीली होगी।
माक पा पोलित यूरो के सदस्य मोह्मद सलीम क हते हैं कि हमें उ्मीद है कि यह गठबंधन बंगाल चुनाव की दिशा बदलने वाला होगा। भाजपा और तृणमूल कॉग्रेस इस चुनाव को दो ध्रुवीय लड़ाई में तदील क रना चाहते हैं लेकि न हमने इसे त्रिक ोणीय मुकाबला बना दिया है। लोग राज्य में तृणमूल के और के ंद्र में भाजपा के कु शासन से तंग आ चुके हैं। सलीम कहते हैं कि पिछली बार हमने 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी जिनमें से अधिक तर अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तरी एवं दक्षिणी दिनाजपुर की सीटें थी। पहचान की राजनीति में हमें उन सीटों को बरक रार रखने के लिए आइएसएफ की जरू रत थी। कॉग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य भी सलीम की बातों का समर्थन करते हुए क हते हैं कि गठबंधन के उल्लेखनीय नतीजे आएंगे जिसे नजरअंदाज नहीं कि या जा सके गा। शुरु आत में सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान के बाद गठबंधन में समझौता हो गया जिसके मुताबिक वाम दल 177, कॉग्रेस 91 और आइएसएफ 26 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। कॉग्रेस एवं वाम दलों के सूत्रों के मुताबिक गठबंधन समय क ी मांग थी, योंकि दोनों पार्टियों ने 2016 विधानसभा चुनाव साथ लड़ा था और उन्हें कु ल 36 प्रतिशत मत मिले थे जिसमें अगले तीन साल में भारी कमी आई। अलग-अलग लडऩे की वजह से वर्ष 2019 के लोक सभा चुनाव में कॉग्रेस एवं वाम को क्रमश: सात एवं पांच प्रतिशत मत मिले। लोक सभा चुनाव में वामदल खाता भी नहीं खोल सके जबकि कॉग्रेस 42 में से महज दो सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। वहीं तृणमूल ने 22 और भाजपा ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कॉग्रेस विधायक अदुल मनान्न क हते हैं कि यह गठबंधन समय की मांग थी योंकि हम अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं। तृणमूल कॉग्रेस ने अल्ससंख्यक मतों को अपने पक्ष में क र लिया है और भाजपा ने हिंदू मतों को , हम पटल पर क हीं नहीं हैं। तृणमूल कॉग्रेस द्वारा वाम एवं कॉग्रेस नेताओं का शिक ार क रने से राज्य में भाजपा के लिए रास्ता साफ हुआ।
वाम एवं कॉग्रेस नेताओं का मानना है कि वे उन हिंदू एवं मुस्लिमों के लिए तीसरा विक ल्प पेश करना चाहते हैं जो तृणमूल या भाजपा की ओर नहीं जाना चाहते हैं। माक पा नेता कहते हैं कि हम खुद को ताकत के रूप में पेश कर विपक्ष का स्थान वापस हासिल क रना चाहते हैं। न के वल इस चुनाव में, बल्कि अगर भाजपा भी सāाा में आ जाती है तब भी।
भाजपा ने आइएसएफ को दोबारा बंगाल को बांटने के लिए आए मुस्लिम लीग का उāाराधिकारी क रार दिया है। तृणमूल कॉग्रेस और भाजपा का मानना है कि वाम दलों ने सांप्रदायिक शक्ति यों के आगे समर्पण कर दिया है। तृणमूल नेता क हते हैं कि वाम दल ने धर्मनिरपेक्ष होने की अपनी विश्वसनीयता को नुक सान पहुंचाया है। इससे भाजपा के इस कथन को बल मिलेगा कि अन्य पार्टियां अल्पसंख्यको का तुष्टीक रण कर रही हैं और इससे हिंदू मत और एक जुट होंगे। राज्य ने पहले क भी मुस्लिम पार्टी नहीं देखी।
Published on:
30 Mar 2021 09:30 am
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