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150 मिनट की ‘Euphoria’ का क्लाइमेक्स तोड़ देगा दिल! आखिरी 10 मिनट में दोस्ती का वो गंदा दलदल देख छलक पड़ेंगे आंसू

Euphoria Movie: 150 मिनट की 'Euphoria' का क्लाइमेक्स एक ऐसा भावुक मोड़ लेकर आता है जो दिल को छू जाता है। आखिरी 10 मिनट में दोस्ती का वो गंदा दलदल सामने आता है, जहां रिश्तों की खूबसूरती के पीछे छुपी कड़वाहट और धोखे की परतें खुलने लगती हैं।
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Euphoria Movie

Euphoria Movie (this photo from x: @Euphoria)

Euphoria Movie: तेलुगु फिल्म 'Euphoria' केवल एक सामाजिक ड्रामा नहीं है, बल्कि ये उन कठिन सवालों को सामने लाती है जिन पर अक्सर समाज खुलकर बात करने में सोचती है। लगभग ढाई घंटे लंबी ये फिल्म एक युवा लड़की की जिंदगी में आए दर्दनाक मोड़, न्याय की लड़ाई और इंसानी इमोशंस की जटिलताओं को दिखाती है, जिसे देख आपके आखों से आसूं निकल सकते है।

दोस्ती और भरोसे के नाम पर हुए विश्वासघात

फिल्म की कहानी चैत्र नाम की एक लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सिविल सर्विस की तैयारी कर रही है। उसकी जिंदगी सामान्य तरीके से आगे बढ़ रही होती है, लेकिन एक घटना सब कुछ बदल देती है। बता दें, दोस्ती और भरोसे के नाम पर हुए विश्वासघात (धोखा) के बाद उसे अपने जीवन की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। इसके बाद कहानी केवल अपराध और सजा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ये न्याय, समाज और इंसानी बदलाव जैसे विषयों को भी छूती है।

फिल्म का पहला हिस्सा काफी प्रभावशाली है और दर्शकों को कहानी से जोड़कर रखता है। घटनाओं को संवेदनशीलता के साथ दिखाया गया है, जिससे किरदारों का दर्द और संघर्ष महसूस होता है। वहीं दूसरा भाग अदालत, सजा और उसके बाद की परिस्थितियों पर केंद्रित है। यहां फिल्म यह सवाल उठाती है कि क्या कोई व्यक्ति अपनी गलती के बाद बदल सकता है और क्या समाज उसे दूसरा मौका देने के लिए तैयार होता है।

धुरंधर के बाद इस फिल्म में सारा अर्जुन ने की दमदार एक्टिंग

धुरंधर के बाद सारा अर्जुन ने चैत्र के किरदार में शानदार एक्टिंग किया है। उन्होंने एक पीड़ित लड़की की भावनाओं, साहस और आत्मविश्वास को बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश किया है। तो दूसरी ओर 'भूमिका चावला' एक ऐसी मां के रोल में नजर आती हैं जो अपने बेटे और सच के बीच फंसी हुई है। उनकी एक्टिंग कहानी को भावनात्मक गहराई देता है। दरअसल, विग्नेश रेड्डी ने विकास के रोल में दमदार प्रदर्शन किया है। उनके किरदार का सफर दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है। तो वहीं गौतम वासुदेव मेनन ने पुलिस अधिकारी के रूप में कहानी में गंभीरता और संतुलन जोड़ा है।

Euphoria फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका क्लाइमेक्स है। इसके आखिरी सीन में चैत्र और विकास के बीच होने वाली मुलाकात कहानी को एक अलग एंगल पर ले जाती है। यहां बदले की भावना के बजाय आत्मबल, संवेदनशीलता और माफी का संदेश देखने को मिलता है। बता दें, Euphoria मॉडर्न पेरेंटिंग, युवाओं की चुनौतियों, सहमति, नशे की समस्या और समाज की सोच जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा करती है। अगर अभी तक आपने इस फिल्म नहीं देखा है तो देर ना करें और तुंरत प्राइम वीडियो पर देखें आपको मजा आएगा।