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मूवी रिव्यू: हाउसफुल से कोसों दूर ‘हाउसफुल 3’

बॉलीवुड को 'बोल बच्चन' जैसी कॉमेडी फिल्म दे चुके द्विनिर्देशक जोड़ी साजिद सामजी और फरहाद सामजी एक बार फिर अपने निराले और मनोरंजक अंदाज में अपने चाहने वालों के लिए 'हाउसफुल 3' लेकर आए हैं।

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kamlesh sharma

Jun 03, 2016

housefull 3

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बॉलीवुड को 'बोल बच्चन' जैसी कॉमेडी फिल्म दे चुके द्विनिर्देशक जोड़ी साजिद सामजी और फरहाद सामजी एक बार फिर अपने निराले और मनोरंजक अंदाज में अपने चाहने वालों के लिए 'हाउसफुल 3' लेकर आए हैं। इस साल की पहली धमाकेदार कॉमेडी वाली फिल्म की निर्देशन की कमान उन्होंने अपने जुदा अंदाज में संभाली है और उन्हें भरोसा है कि पहले की तरह ही 'हाउसफुल 3' ऑडियंस को परिवार समेत सिनेमाघरों तक खींचने में सफल रहेगी।

कहानी :

'हाउसफुल 3' शुरू होती है लंदन की एक ज्वेलरी शॉप की रॉबरी से, जिसमें तीन नवजवान धर दबोचे जाते हैं। फिर लंदन के आलीशान बंगले और बेशुमार पैसों की सल्तनत के मालिक बटुक पटेल (बोमन ईरानी) की तीन बेटियों गंगा (जैक्वेलीन फर्नांडीस), जमुना (लीसा हेडन) और सरस्वती (नरगिस फाखरी) की एक पार्टी में एंट्री होती है। यहां पर बटुक का एक नजदीकी दोस्त अपने तीनों बेटों की शादी उसकी बेटियों से कराने का प्रस्ताव रखता है तो बटुक आगबबुला हो उठता है। दरअसल, बटुक ने अपने परिवार में किसी भी लड़की की शादी न करने का रिवाज सा कायम कर रखा है।

गंगा, जमुना और सरस्वती अपने बाप की नजर में बहुत ही शरीफ हैं, लेकिन सभी का अपना-अपना ब्वॉयफ्रेंड होता है। तीनों शाम होते ही बटुक को गुड नाइट कहते ही मस्ती करने के लिए घर से बाहर एक शिप में जाती है। वहीं पर अपनी नजदीकी दोस्त से गंगा सैंडी (अक्षय कुमार), जमुना टेडी (रितेश देशमुख) और सरस्वती बंटी (अभिषेक बच्चन) के बारे में बताती हैं। अब तीनों एक दिन बटुक से अपने-अपने प्यार के बारे में बताती हैं तो बटुक कुछ नहीं कर पाता है और आखिरी पास्ता (चंकी पांडेय) को सामने कर देता है। इस पर पास्ता एक ज्योतिषी के तौर पर बताता है कि गंगा की शादी होते ही उसके पति के पैर पड़ते ही बटुक मर जाएगा।

साथ ही वह कहता है कि जमुना के पति के आते ही बटुक अंधा होकर परलोक सिधार जाएगा और सरस्वती को बताता है कि उसके पति के आते ही उसके पिता बगैर कुछ बोले ही स्वर्गवासी हो जाएंगे। इस पर गंगा अपने ब्वॉयफ्रेंड सैंडी को घर में आने के लिए एक लंगड़े बनने की सलाह देती है, जबकि सैंडी फुटबॉलर होता है, जमुना टेडी से कहती है कि उसे अंधा बनना होगा, जबकि वह कार रेस्लर होता है और सरस्वती बंटी से कहती है कि उससे शादी करने के लिए उसे गूंगा बनना होगा, जबकि बंटी पॉप सिंगर होता है।

अब सैंडी, टेडी और बंटी को पैसों के लालच में ठीक वैसा ही करते हैं, जैसा उनकी गर्लफ्रेंड्स ने कहा है। फिर बटुक उनकी हकीकत जानने के लिए तीनों पर तरह-तरह के प्रयोग करता है, जिसमें तीनों पास हो जाते हैं। आगे चलकर पता चलता है कि बटुक की बेशुमार दौलत उसकी बेटियों की शादी होने के बाद उसके हाथ से चली जाएगी तो निर्णय लेता है कि वह अपनी बेटियों की शादी अपने तीनों बेटों से कराएगा, जो शुरुआत में ही एक ज्वैलरी शॉप की लूट में पकड़े जाते हैं और अब वे रिहा हो जाते हैं। फिर अचानक पता चलता है कि जैक्वेलीन, लिसा, नरगिस के असली पिता 90 के दशक के मुंबई डॉन ऊर्जा नागरे (जैकी श्रॉफ) की बेटियां है। इसी के साथ फिल्म दिलचस्प मोड़ लेते हुए आगे बढ़ती है।

अभिनय :

अक्षय कुमार और रितेश देशमुख की जोड़ी तो इस सिरीज में पहले से ही कुछ अलग सा करता दिखाई दी और इसमें भी दोनों की जुगलबंदी देखने लायक रही। इस सिरीज में अभिषेक बच्चन की एंट्री नई हुई है और वे अक्षय व रितेश की तरह ही कुछ अनोखा और नया करते से नजर आए, जिसमें वे कुछ हद तक ही सफल रह सके। जैक्लीन फर्नांडीज व लीसा हेडन ने भी अपनी-अपनी भूमिकाओं में शत-प्रतिशत देने की पूरी कोशिश की। साथ ही नरगिस फाखरी भी फिल्म में अपनी मौजूदगी दिखाने में काफी हद तक सफल रही।

इसके अलावा बोमन ईरानी, जैकी श्रॉफ अपनी-अपनी भूमिकाओं में सफल से नजर आए, लेकिन बोमन को अपने किरदार में कुछ और ज्यादा वर्क करने की जरूरत की महसूस हूई। चंकी पांडेय फिल्म में बटुक का भरपूर सहयोग करते दिखाई दिए। इस तरह से तीनों ही अपने जुदा अंदाज में नजर आए।

निर्देशन :

इंडस्ट्री की द्विनिर्देशक जोड़ी साजिद सामजी और फरहाद सामजी ने कॉमेडी की कमान संभालने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। उन्होंने इसमें हर तरह के प्रयोग तो किए ही हैं, साथ ही इस सिरीज को आगे बढ़ाने वे कई मायनों में सफल भी रहे। हालांकि उन्होंने फिल्म में कॉमेडी का जबरदस्त तड़का तो जरूर लगाया, लेकिन कहीं-कहीं कॉमेडी थोड़ी ओवर डोज सी रही। कॉमेडी में इस जोड़ी ने वाकई में कुछ अलग करने का भरपूर प्रयास किया है, इसीलिए वे ऑडियंस की वाहवाही लूटने में सफल रहे। इसकी कहानी भले ही फस्र्ट हाफ में कुछ इधर-उधर जाती सी नजर आई, लेकिन सेकेंड हाफ में फिल्म दर्शकों को आखिर तक बांधे रखने में कुछ हद तक सफल रही। खैर, इस फिल्म की पहले की सिरीज भी सफल ही रही थीं, जिसकी वजह से शायद निर्देशकों को कोई ज्यादा जद्दोजहद करने की जरूरत नहीं पड़ी।

बहरहाल, 'चश्में की आंड़ में लड़कियां ताड़ रहा है...' और 'बाइक चलाना सीख लिया, लेकिन हेल्मेट पहनना नहीं सीखा...' जैसे कई डायलॉग्स काबिल-ए-तारीफ रहे, लेकिन अगर कॉमर्शिल और टेक्नोलॉजी अंदाज को छोड़ दिया जाए तो इस फिल्म की सिनेमेटोग्राफी में कुछ और खास किया जा सकता था। इसके अलावा फिल्म गीत-संगीत भी ऑडियंस को रिझाने के लिए कई मायनों से ठीक ही रहे।

रेटिंग: ढाई स्टार

बैनर : इरोस इंटरनेशनल, नाडियाडवाला गै्रंडसन एंटरटेनमेंट

निर्माता : साजिद नाडियाडवाला, सुनील ए लुल्ला

निर्देशक : साजिद सामजी, फरहाद सामजी

जोनर : कॉमेडी

संगीतकार : तोशी साबरी, शारिब साबरी, सोहेल सेन, मिका सिंह, तनिष्क बागची, मिलिंद गाबा

गीतकार : तोशी साबरी, शारिब साबरी, नकश अजीज, दिव्या कुमार, अनमोल मलिक, अर्ल एडगर, सोहेल सेन, मिका सिंह, नीति मोहन, ममता शर्मा, अकीरा, मिस पूजा, कुवर विर्क, कैलाश खेर, अल्तमाश फरीदी

स्टारकास्ट : अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, अभिषेक बच्चन, जैक्लीन फर्नांडीज, लिसा हेडन, नरगिर फाखरी, बोमन ईरानी, जैकी श्रॉफ, चंकी पांडेय