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मेनोपॉज पर ‘कहानी घर-घर की’ फेम अभिनेत्री श्वेता क्वात्रा का छलका दर्द, बोलीं- थेरेपी से मेरे पीरियड्स वापस आ गए

Shweta Kawaatra On Menopause And Periods: अभिनेत्री श्वेता क्वात्रा ने हाल ही में 40 की उम्र में मेनोपॉज को लेकर बात की है। क्या है पूरा मामला, चलिए जानते हैं।
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Shweta Kawaatra On Menopause And Periods

मेनोपॉज पर श्वेता क्वात्रा का छलका दर्द (फोटो सोर्स- Instagram/shynee_narang_podcast)

Shweta Kawaatra On Menopause And Periods: टीवी के लोकप्रिय शो 'कहानी घर-घर की' से घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री श्वेता क्वात्रा ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा अनुभव शेयर किया है, जिसने कई महिलाओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अभिनेत्री ने बताया कि महज 40 साल की उम्रमें उन्हें मेनोपॉज होने की जानकारी मिली थी। डॉक्टर की बात सुनने के बाद वो मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गई थीं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को संभालने और अपनी सेहत के लिए नए रास्ते तलाशने का फैसला किया।

शाइनी नारंग के साथ बातचीत के दौरान श्वेता ने बताया कि 36 साल की उम्र में उन्होंने अपनी बेटी को जन्म दिया था। कुछ साल बाद जब स्वास्थ्य संबंधी जांच कराई तो उनकी स्त्री रोग विशेषज्ञ ने बताया कि उन्हें मेनोपॉज हो चुका है। ये खबर उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी जिंदगी अचानक बदल गई हो और वो इस स्थिति को स्वीकार नहीं कर पा रही थीं।

हार मानने के बजाय तलाशा दूसरा रास्ता

अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने शुरुआत से ही तय कर लिया था कि वो इस स्थिति के सामने आसानी से हार नहीं मानेंगी। इसी दौरान किसी ने उन्हें एक्यूपंक्चर थेरेपी के बारे में बताया। उन्होंने इस वैकल्पिक उपचार को अपनाने का फैसला किया और विशेषज्ञ से सलाह ली। श्वेता के मुताबिक, डॉक्टर ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सही इलाज और धैर्य के साथ उनकी स्थिति में सुधार संभव है।

उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान उन्हें ये भी समझाया गया कि शरीर में ऊर्जा के असंतुलन और एक ऑटोइम्यून समस्या के कारण हार्मोन प्रभावित हुए थे। धीरे-धीरे उपचार शुरू हुआ और समय के साथ उन्हें पॉजिटिव बदलाव महसूस होने लगे। अभिनेत्री का दावा है कि बाद में उनके मासिक धर्म भी दोबारा शुरू हो गए।

इलाज के साथ आत्मविश्वास भी बना ताकत

श्वेता क्वात्रा का कहना है कि सिर्फ चिकित्सा ही नहीं, बल्कि उनकी मानसिक शक्ति और सकारात्मक सोच ने भी इस पूरी यात्रा में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने नियमित रूप से ध्यान, मंत्र जाप और आध्यात्मिक अभ्यास किए, जिससे उन्हें मानसिक मजबूती मिली। उनके मुताबिक, किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए दवाइयों के साथ-साथ व्यक्ति का आत्मविश्वास और विश्वास भी बेहद जरूरी होता है।

उन्होंने कहा कि हर शख्स का शरीर अलग होता है, इसलिए एक ही उपचार सभी पर समान रूप से असर नहीं करता। लेकिन यदि इंसान के भीतर ठीक होने की इच्छा और दृढ़ निश्चय हो तो मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना आसान हो सकता है।

महिलाओं को दिया पॉजिटिव मैसेज

श्वेता ने महिलाओं से अपील की कि मेनोपॉज को लेकर डरने या निराश होने की बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें और अपनी सेहत का ध्यान रखें। उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी तरह के उपचार को अपनाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है। अभिनेत्री का मानना है कि शारीरिक उपचार के साथ मानसिक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण भी स्वस्थ जीवन के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है।