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आज ट्रेलर बड़े हैं, VFX बड़ा है, लेकिन 2006 वाले सीक्वल्स का जादू आज भी मिस कर रहे हैं फैंस

2006 was golden era of Bollywood sequels: आज फिल्मों के ट्रेलर में दमदार एक्शनस होते है, VFX हॉलीवुड लेवल का होता है और बजट 500 करोड़ पार कर जाता है, फिर भी फिल्मों के सिक्वल्स में पहले जैसा दम नहीं दिखता।

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2006 was golden era of Bollywood sequels

Era of Bollywood sequels (This photo from x: @aavishhkar)

2006 was golden era of Bollywood sequels: बॉलीवुड में सीक्वल फिल्मों का चलन आज पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है और आप देख सकते है कि हर साल कई बड़ी फ्रेंचाइजी अपनी अगली किश्त लेकर आती हैं, जिनमें भारी-भरकम बजट, दमदार विजुअल इफेक्ट्स और प्रमोशन देखने को मिलता है, लेकिन इन सबके बावजूद सिनेमा लवर्स का एक बड़ा वर्ग आज भी 2006 को बॉलीवुड सीक्वल्स का सबसे सुनहरा दौर मान रहा है।

2006 में आया सीक्वल का दौर

2006 वो साल था जब सीक्वल सिर्फ किसी कामयाब फिल्म का अगला भाग नहीं होते थे, बल्कि अपनी अलग पहचान भी बनाते थे। उस दौर की फिल्मों में कहानी, इमोशन, मनोरंजन और कैरेक्टर का ऐसा मेल था, जिसने फैंस के दिलों में स्थायी जगह बना ली। इसके साथ ही, इसी साल रिलीज हुई 'फिर हेरा फेरी' ने कॉमेडी के लेवल को नई ऊंचाई दी। दरअसल, राजू, श्याम और बाबूराव की तिकड़ी ने दर्शकों को ऐसा हंसाया कि फिल्म आज भी मीम्स और सोशल मीडिया चर्चाओं का हिस्सा बनी रहती है।

तो वहीं 'कृष' ने भारतीय सुपरहीरो फिल्मों को नई दिशा दी। एक्टर ऋतिक रोशन का किरदार सिर्फ एक सुपरहीरो नहीं था, बल्कि उस समय के युवाओं के लिए प्रेरणा भी बन गया। ये फिल्म साबित करती है कि भारतीय दर्शक भी अपने सुपरहीरो को उतना ही प्यार दे सकते हैं जितना हॉलीवुड के किरदारों को। तो दूसरी ओर 'लगे रहो मुन्ना भाई' ने मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश देने का अनोखा काम किया। गांधीगिरी का कॉन्सेप्ट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया और फिल्म ने हंसी के साथ इमोशनल जुड़ाव भी पैदा किया।

ट्रेलर बड़े हैं और मार्केटिंग भी वैश्विक स्तर की

इसी साल 'धूम 2' ने स्टाइल, एक्शन और ग्लैमर का नया मानक स्थापित किया। ऋतिक रोशन के स्वैग और फिल्म की दमदार कहानी ने इसे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। आज की फिल्मों में तकनीक पहले से कहीं ज्यादा शानदार है। VFX बेहतर है, ट्रेलर बड़े हैं और मार्केटिंग भी वैश्विक स्तर की हो चुकी है, लेकिन कई दर्शकों का मानना है कि 2006 की फिल्मों में जो आत्मा और भावनात्मक जुड़ाव था, वो आज की कई बड़ी फिल्मों में देखने को नहीं मिलता। शायद यही वजह है कि लगभग 2 दशक बाद भी लोग उस दौर को याद करते हैं और उम्मीद करते हैं कि बॉलीवुड एक बार फिर ऐसी सीक्वल फिल्में बनाए, जो सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर नहीं बल्कि दर्शकों के दिलों पर भी राज करें।

बता दें, डायरेक्टर होमी अदजानिया और प्रोड्यूसर दिनेश विजान सीक्वल 'कॉकटेल ' लिए वापस आए। इस सीक्वल में बिल्कुल नई कास्ट है। ओरिजिनल फिल्म, जिसमें सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण और डायना पेंटी थे, रिश्तों के आधुनिक नजरिए और अपने एवरग्रीन गानों के लिए आज भी फैंस की पसंदीदा फिल्मों में से एक मानी जाती है, लेकिन सीक्वल फिल्म 'कॉकटेल 2' में शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की कहानी एक उलझे हुए लव ट्राएंगल पर आधारित है, और शाहिद कपूर को कृति और रश्मिका में से किसी एक को चुनना पड़ता है।

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