
मुलायम सिंह यादव के सपने को लगा झटका, सारी मेहनत पर फिर रहा पानी
दिनेश शाक्य
इटावा. आमदनी अठन्नी खर्चा रूपया वाली कहावत यहां पूरी तरह से चरितार्थ होती हुई नजर आ रही है। नेता जी के नाम से महशूर सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के प्रयासों से शुरू की गई इटावा-मैनपुरी रेल सेवा रेलवे के लिए घाटे का सौदा बन रही है। मौजूदा समय सारिणी के कारण जनता को भी इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
55 किलोमीटर के लिए केवल 15 रुपए किराया
इटावा जंक्शन अधीक्षक पूरन मल मीणा ने बताया कि कई बार ट्रेनों में अभियान चलाया गया। इस दौरान दर्जनों लोग बिना टिकट पकड़े गए। इसके बावजूद लोगा टिकट नहीं खरीदते हैं। ट्रेन के संचालन में 900 लीटर डीजल खर्च आता है। कमाई कुछ नहीं होती इसकी रिपोर्ट भेज दी गई है। शुरुआत में इटावा से मैनपुरी के यात्रियों की संख्या अच्छी थी। धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या कम हो गई। पहले जो टिकट खरीदे जाते थे अब वह भी टिकट नहीं खरीद रहे हैं। 55 किलोमीटर के लिए मात्र 15 रुपए ही किराया रखा गया है।
नहीं बिकते टिकट
मुख्य टिकट पयर्वेक्षक जगदीश प्रसाद बताते हैं कि रोजाना 6 या 7 टिकट ही बिकते हैं। इससे रेल विभाग को काफी घाटा उठाना पड़ रहा है। 55 किलोमीटर तक जाने के लिए यात्रियों से 15 रुपए लिए जाते हैं। 1 अगस्त को पांच, 2 अगस्त को सात, 3 अगस्त को छह, 4 अगस्त को पांच, 5 अगस्त को छह, 6 अगस्त को सात और 7 अगस्त को मात्र पांच रेल यात्रियों ने टिकट खरीदा है।
ट्रेन का समय बदलने की जरूरत
सपा संस्थापक मुलायम सिंह के ड्रीम प्रोजेक्ट को भले ही एक साल पूर्व चालू किया जा चुका हो, लेकिन ट्रैक पर दौड़ने वाली गाड़ी का समय यात्रियों की सुविधा के अनुसार न होने से उसका लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन इस रूट पर जाने वाले अधिकांश यात्री अन्य साधनों से अपनी मंजिल को चले जाते हैं। इसे जहां एक ओर यात्रियों को परेशानी है, वहीं रेलवे को भी घाटे का सामना करना पड़ रहा है।
मुलायम की कोशिशें लाई थीं रंग
मुलायम सिंह यादव ने इटावा से मैनपुरी के मध्य रेलवे सेवा शुरू कराने का सपना प्रदेश में पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर 1989 में संजोया था लेकिन उस समय कोई सफलता नहीं मिली थी। उनके प्रयास जारी रहे। इसके तहत 2004 में मुख्यमंत्री होने के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम से इटावा-मैनपुरी रेल परियोजना की आधारशिला रखवाने में सफल हुए थे। तमाम बाधाओं को पार करके मार्च 2016 में यह ब्रांच लाइन तैयार हो गई थी। मालगाड़ियों को दौड़ाने के बाद रेलवे प्रशासन ने इस मार्ग पर नई यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने के बजाए आगरा-बटेश्वर से इटावा के मध्य चलने वाली डीएमयू पैसेंजर ट्रेन का विस्तार करते हुए 28 दिसंबर 2016 को पैसेंजर ट्रेन सेवा का शुभारंभ करा दिया था, अभी तक यह सेवा कारगर साबित नहीं हो सकी है।
नई समय-सारिणी की जरूरत
समय सारिणी क्षेत्रीय जनता के मुफीद न होने से यह सेवा कारगर साबित नहीं हो पा रही है। इटावा जंक्शन से 10 बजे रात में इसे मैनपुरी के लिए रवाना किया जाता है, इससे अक्सर ट्रेन खाली ही जाती है। उधर से दूसरे दिन तड़के साढ़े चार बजे इटावा-आगरा के लिए चलाया जाता है। इससे मैनपुरी, करहल तथा सैफई क्षेत्र से आने वाले यात्री इस ट्रेन से सफर ही नहीं कर पाते हैं। इस ट्रेन से इटावा-मैनपुरी के मध्य महज 300-400 रुपये आमदनी के रूप में रेलवे को प्राप्त हो रही है जबकि इस ट्रेन का परिचालन कराने के लिए रेलवे रोजाना कई हजार रुपये व्यय कर रही है।
बढ़ रहा है घाटा
अगर गार्ड-चालक और अन्य स्टाफ का वेतन और जोड़ दिया जाए तो घाटा और भी बढ़ जाता है। आमदनी न के बराबर होने के कारण अब इस ट्रेन की समयसारिणी में परिवर्तन करने का प्रस्ताव प्रेषित कर दिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रस्ताव पास होने से जनता के साथ रेलवे को भी होगा लाभ।
नहीं आती सवारियां
इटावा-मैनपुरी रेल मार्ग पर रेलवे प्रशासन ने नई ट्रेन चलाने के बजाए आगरा-बटेश्वर से इटावा के मध्य जारी डीएमयू पैसेंजर ट्रेन का विस्तार मैनपुरी तक कर दिया था। यह ट्रेन सुबह साढ़े चार बजे मैनपुरी से इटावा आकर बटेश्वर-आगरा के लिए प्रस्थान करती है। वापसी में रात 10 बजे इटावा से मैनपुरी के लिए प्रस्थान करती है। दोनों ही वक्त सवारियां होती नहीं हैं। अधिकतर यात्री शाम ढलने से पहले अन्य संसाधनों से वैदपुरा, सैफई, करहल तथा मैनपुरी के लिए चले जाते हैं।
पहले सही था टाइम
पूर्व में यही ट्रेन इटावा से सुबह छह बजे बटेश्वर-आगरा के लिए प्रस्थान करती थी तो उदी, जैतपुरा, वाह, बटेश्वर से काफी संख्या में लोग आगरा के लिए सवार होते थे। मैनपुरी से चलाए जाने पर इसकी समय सारिणी इस कदर प्रभावित हुई कि निर्धारित समय से काफी देरी से चलने लगी।
इस रूट पर ट्रेन की जरूरत
रेलवे प्रशासन जनहित में तवज्जो दे तो इटावा से फर्रूखाबाद-बरेली के लिए रेल सेवा से वंचित इस क्षेत्र की जनता का फर्रूखाबाद रेल सेवा से जुड़ने का सपना पूरा हो सकता है। इटावा से मैनपुरी होते हुए फर्रूखाबाद तक पैसेंजर ट्रेन सुबह-शाम चलाई जाए तो जनता और रेलवे दोनों को लाभ होगा।
ड्राइवर की सूझबूझ से टला था हादसा
यह ट्रेन 27 जुलाई को वैदपुरा के पास लोहे की पटरी रखने से हादसे का शिकार होते बची थी उस वक्त ट्रेन में 70 सवारियां थी ड्राइवर की सूझबूझ से हादसा बच गया। टिकट ना होने के कारण सवारियों की संख्या नौ दो ग्यारह हो गई। इटावा मैनपुरी रेलवे लाइन के 55 किलोमीटर रास्ते पर 5 स्टेशन है। इटावा, सैफई, करहल, मैनपुरी मुख्य है। यात्रियों को ड्यूटी करने जाना होता है। डयूटी का समय 9 बजे होने से यह दूसरे साधनों से निकल जाते हैं।
Published on:
10 Aug 2018 08:46 am
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