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Faridabad news: फरीदाबाद के 45 साल के अतुल जोशी जो एक हॉस्पिटल में मैनेजर थे, की मौत के कुछ दिन बाद भी घटनास्थल के हालात में कोई खास सुधार नजर नहीं आया है। इस हादसे के लिए सिविक व्यवस्था की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। मंझावली पुल के पास, जहां यह हादसा हुआ था और जो फरीदाबाद को ग्रेटर नोएडा और दनकौर से जोड़ता है, वहां अब भी मिट्टी के ढेर, गड्ढे और आसपास बिखरा कचरा दिखाई दे रहा है। मौके पर टूटी बोतलें और चिप्स के खाली पैकेट भी पड़े मिले। यह हादसा दिल्ली के जनकपुरी इलाके में 7 फरवरी को हुई घटना को याद दिलाता है जब दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने सीवर काम के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरने से एक युवक की मौत हो गई थी।
पुलिस ने बताया कि 14 जून की रात करीब 11 बजे अतुल जोशी बाइक से फरीदाबाद से नोएडा जा रहे थे। अंधेरे में उन्हें अधूरी सड़क का आखिरी हिस्सा दिखाई नहीं दिया और उनकी बाइक सड़क छोड़कर सीधे गड्ढे में जा गिरी। हादसे में उनके हेलमेट को नुकसान पहुंचा और उन्हें गंभीर चोटें आईं। गड्ढे में गिरने के आठ घंटे तक मदद का इंतजार करते करते दम तौड़ दिया। सुनसान इलाका होने के कारण उन्हें मदद नहीं मिल पाई। सुबह करीब 7:30 बजे स्थानीय लोगों ने उन्हें देखा, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
फरीदाबाद पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जोशी रविवार रात अपने घर से नोएडा जा रहे थे। बताया जा रहा है कि वह बाइक तेज रफ्तार में चला रहे थे। अंधेरे में सड़क का आखिरी हिस्सा नजर नहीं आया और उनकी बाइक अचानक सड़क से उतरकर गड्ढे में जा गिरी। हादसे में उनका हेलमेट टूट गया और उन्हें गंभीर चोटें आईं थी।
जब द इंडियन एक्सप्रेस ने गुरुवार को मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का दौरा किया तो पता चला कि वहां कोई बैरिकेड या बैरियर है ही नहीं, जो शायद गिरने से बचा सकता था। पुल के ठीक अखिर में कच्ची सड़कों से नोएडा की ओर और वहां से आने-जाने वाले वाहन दिखाई दे रहे थे। घटनास्थल के चारों ओर खाली खेत हैं। पास के खेतों में काम करने वाले मजदूरों और अन्य लोगों ने बताया कि कच्ची सड़क के उस हिस्से का इस्तेमाल सिर्फ पुल की ओर यू-टर्न लेने के लिए किया जाता है। नोएडा की ओर जाने वाली कैब और दूसरी गाड़ियों को घटना वाली जगह से होकर गुजर रही है। कई ड्राइवर रास्ता पूछते दिखे, जिससे पता चला कि गूगल मैप्स उन्हें सही रास्ता नहीं दिखा पा रहा था क्योंकि सड़क का कुछ हिस्सा अभी अधूरा है।
हादसे के बाद दोनों राज्यों के अधिकारियों ने दुर्घटना स्थल को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। यूपी के दनकौर थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि दुर्घटना स्थल और मामला हरियाणा के अधिकार इलाके में आता है। वहीं, गौतमबुद्ध नगर पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि सड़क निर्माण में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के कारण देरी हुई है और सुरक्षा इंतजाम हरियाणा को करने चाहिए थे।
दूसरी ओर, हरियाणा प्रशासन का दावा है कि उनके हिस्से का निर्माण कार्य एक साल पहले पूरा हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क खत्म होने का संकेत देने के लिए मिट्टी के ढेर लगाए गए थे और आगे की सुरक्षा व्यवस्था उत्तर प्रदेश को करनी थी। पुलिस और प्रशासन के बीच जारी इस बयानबाजी ने एक बार फिर अधूरी परियोजनाओं और सुरक्षा लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Updated on:
19 Jun 2026 08:54 am
Published on:
19 Jun 2026 08:54 am
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