
फर्रुखाबाद. Rajpoot Regimental Center में जंग के मैदान में प्रयोग होने वाले सभी Shastro की वैदिक तरीके से बाहर खुले मैदान में लगाकर उनका Shastra Pujan किया गया है। हाथियारो में 81mm, 84mm, 57mm मोटार, रॉकेट लांचर, एस एल आर रायफल, इंशास रायफल, एके47, एके56, पिस्टल, एमएमजी, एलएमजी, टेली स्कोप, कार्बाइन मशीनगन, बैण्ड का सामान, कम्पास, गाड़ियां, घोड़ा, नीलकण्ठ पक्षी, सफेद कबूतर आदि सभी का पूजन किया गया है।
कमांडेंट ने धर्मगुरु सूबेदार श्यामसुंदर उपाध्याय के द्वारा वेदमंत्रो के साथ सर्बप्रथम सेना के झंडे का पूजन किया। उसके बाद घोड़े का, फिर गाड़ियों, हथियारों का पूजन किया है। विजय का प्रतीक माना जाने बाला पंक्षी नीलकण्ठ का भी पूजन किया है। बिग्रेडियर टीसी मल्होत्रा ने बताया कि Indian Army में यह परंपरा कोई नई नहीं है। आदि काल से चाहे वह द्वापर, सतयुग, कलयुग हो सभी युगों में जो भी सेना रही वह सभी अपने Weapons का प्रदर्शन करने के साथ पूजन करते चले आ रहे हैं। दूसरी तरफ राम ने रावण का वध आज के दिन ही किया था। उस युद्ध मे सच्चाई से लड़ने वाली सेना की विजय हुई थी। इन हथियारों की पूजा करना एक परम्परा है लेकिन देश व समाज की रक्षा में सहयोग करने वाले इन हथियारो का ध्यान रखना हमारा कर्तब्य है।
इस मौके पर सेना के प्रमुख अधिकारी डिप्टी कमांडेंट रविन्द्र सिंह, सीआरओ लेफ्टिंडेन्ट जैकब थामस, एडम बटालियन कमांडर लेफ्टिंडेन्ट विवेक मिश्रा, सूबेदार मेजर ट्रेनिंग हरपाल सिंह, कार्यपालक सूबेदार हरेंद्र सिंह, क्यू आर टी जेसीओ सूबेदार सुमेर सिंह, जीएमपी के राजेश कुमार आदि लोग मौजूद रहे।
आर्मी में कानून व नियमों का पालन समय क्यों होता
भारतीय सेना में कानून समय पर अपने काम को अंजाम तक पहुंचाने जो जज्बा दिखाई देता है। शायद सेना के बाद किसी विभाग में नही देखने को मिलता है। यदि धर्मगुरु ने Vijayadshami के महापर्व पर 8:30 बजे का मुहर्त बताया तो आर्मी के सभी अधिकारी पूजन स्थल पर कमांडेंट के पहुंचने से पहले ही सभी तैयारियां पूरी कर लेते है। जिस कारण उनके किसी काम मे देरी नही दिखाई देती है। सलामी से लेकर हर कार्य मे सतर्कता ध्यान उनका काबिले तारीफ है।
Updated on:
30 Sept 2017 02:27 pm
Published on:
30 Sept 2017 01:56 pm
बड़ी खबरें
View Allफर्रुखाबाद
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
