18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Holi Bhai Dooj 2023: अगर आप भी मनाते हैं होली की भाई दूज, आज है भाई-बहन का यह पर्व, इस मुहूर्त में करें तिलक

Holi Bhai Dooj 2023 Significance and shubh muhurat: अगर आप भी होली के बाद भाईदूज मनाते हैं, तो पत्रिका.कॉम के इस लेख को जरूर पढ़ लें। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य पं. जगदीश शर्मा के मुताबिक भाई दूज का महत्व, तिलक करने का शुभ मुहूर्त और तरीका भी...

3 min read
Google source verification

image

Sanjana Kumar

Mar 09, 2023

bhai_dooj_aaj_tilak_karne_ka_sabse_shubh_muhurat.jpg

Holi Bhai Dooj 2023 Significance and shubh muhurat: भाई दूज का पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। एक बार होली के बाद और एक बार दीपावली के बाद। इस दिन बहनें भाई को तिलक करती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। सुबह से वे इसके लिए व्रत रखती हैं और तिलक और पूजन वगैरह करने के बाद ही व्रत को खोलती हैं। भाई दूज का ये पर्व उनके बीच आपसी प्यार बढ़ाने वाला और उनके रिश्ते को मजबूत बनाने वाला पर्व माना गया है। तो अगर आप भी होली के बाद भाईदूज मनाते हैं, तो पत्रिका.कॉम के इस लेख को जरूर पढ़ लें। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य पं. जगदीश शर्मा के मुताबिक भाई दूज का महत्व, तिलक करने का शुभ मुहूर्त और तरीका भी...

ये भी पढ़ें : Grah Gochar in March 2023: होली उत्सव के बाद होगा इन ग्रहों का गोचर, इन राशियों के लोगों को रहना होगा अलर्ट

जानें होली भाई दूज का महत्व
वैसे तो दिवाली पर मनाई जाने वाली भाई दूज का अधिक महत्व है, लेकिन होली के अगले दिन पडऩे वाली भाई दूज का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्व भाई-बहन को एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम प्रकट करने का अवसर देता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के लिए सुखी, स्वस्थ और समृद्ध जीवन की कामना करती हैं। इसके साथ ही इस दिन भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। माना जाता है कि भाई दूज के दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर अपनी बहन से अपने माथे पर तिलक लगवाए और उसके हाथों से पकाया हुआ भोजन खाए तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी। शास्त्रों में बताया गया है कि होली के अगले दिन अगर कोई भाई अपनी बहन से तिलक लगवाता है तो, वह कई प्रकार की बीमारियों से मुक्त हो जाता है।

भाई दूज पर तिलक का शुभ मुहूर्त
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि 8 मार्च 2023 को शाम 7 बजकर 42 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 9 मार्च 2023 को रात 8 बजकर 54 मिनट पर खत्म होगी। इसीलिए उदया तिथि के हिसाब से भाई दूज का पर्व 9 मार्च गुरुवार को मनाया जाएगा। 9 मार्च को राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। राहुकाल के समय तिलक नहीं करना चाहिए।

तिलक करने की विधि
- होली की भाईदूज के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और श्रीगणेश तथा श्रीविष्णु भगवान का विधिवत पूजन करें।
- भाई दूज की कथा पढ़ें और उनसे अपने भाई की दीर्घायु की प्रार्थना करें।
- इसके बाद भाई को तिलक करने के लिए आरती का थाल सजाएं।
- इस थाल में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, सुपारी या सूखा गोला आदि रखें।
- इसके बाद चौक लगाकर उस पर पटा रखें या आसन बिछाएं।
- इस पर भाई को बैठाएं और फिर सबसे पहले तिलक लगाएं। अक्षत लगाएं। फिर हाथ में कलावा बांधें और आरती उतारें।
- फिर मिठाई खिलाएं। इसके बाद भाई को सुपारी या गोला दें।
- अब भाई अपनी बहन के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लें। बहनें भाई की लंबी आयु और सुंदर जीवन की प्रार्थना करें।
- आशीर्वाद लेने के बाद बहन को सामथ्र्य के अनुसार कोई उपहार देकर उसका भी मुंह मीठा कराएं। इस दिन भाई को भोजन कराने के बाद ही घर से विदा करना चाहिए।

भाई को तिलक करने की सही दिशा जरूर जान लें
भाई को तिलक करते समय ध्यान रखें कि भाई का मुंह पूर्व दिशा में, उत्तर दिशा में या फिर उत्तर पूर्व दिशा में होना चाहिए।

ये भी पढ़ें :Guruwar Ke Upay: गुरुवार के ये उपाय कुंडली में गुरु की स्थिति को करते हैं मजबूत, धीरे-धीरे आप हो जाते हैं अमीर

इस दिन भूलकर भी न करें ये काम
- बहन को भाई के तिलक करने के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।
- भाई दूज के दिन आपस में झगड़ा नहीं करना चाहिए।
- भाई से उपहार में मिले तोहफे का बहनों को निरादर नहीं करना चाहिए।
- इस दिन झूठ बोलने से बचना चाहिए।
- ध्यान रखें कि पूजा में काले वस्त्र धारण न करें।

पौराणिक कथा
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था और उसके बाद उन्होंने अपनी बहन सुभद्रा से मुलाकात की थी। सुभद्रा ने श्री कृष्ण के माथे पर तिलक लगाया और गले में माला पहनाकर उनका स्वागत किया। सुभद्रा ने उन्हें मिठाई खिलाई और फिर अपने भाई की लंबी उम्र की प्रार्थना की। इस कथा के अलावा इस दिन के पीछे यम और यमी की कहानी भी है।

यम और यमी की कहानी
हिंदू पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि इस दिन भगवान यम लंबे समय के बाद अपनी बहन यमी से मिले थे। यमी अपने भाई यम से मिलकर इतनी खुश हुई थीं कि उन्होंने उनका स्वागत मालाएं पहनाकर और आरती करके किया था। साथ ही उनके माथे पर सिंदूर का तिलक लगाया था। फिर यमी ने यम के लिए एक शानदार दावत का आयोजन किया था। यम ने यह सारा दिन अपनी बहन के साथ खुशियों में बिताया था। उन्होंने घोषणा की कि जब कोई भाई इस दिन अपनी बहन से मिलने जाएगा, तो उसे लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलेगा।

ये भी पढ़ें : Gajlakshmi Rajyoga 2023 : मिथुन राशि पर जमकर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, आप भी देखें किन भाग्यशाली राशियों की चमकने वाली है किस्मत