
विवाहित स्त्रियों की कामना पूर्ति का सर्व वरदायी पर्व, जया-पार्वती व्रत 14 से 20 जुलाई 2019
प्रत्येक विवाहित स्त्रियों की कामना होती है कि उसका सौभाग्य सदैव अखंड बना रहे और वे इसके के लिए वे आएं दिन तरह तरह के व्रत या पूजा पाठ करती रहती है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी की 14 जुलाई से जया पार्वती व्रत का आरंभ हो रहा है जिसकी समापन 20 जुलाई 2019 को होगा। इस पर्व में विवाहित महिलाएं जगतमाता माँ पार्वती की विशेष पूजा अर्चना करती है। इस व्रत को करने से अनेक कामनाएं पूरी होने का वरदान मिलता है। जानें पूरा विधान।
अखंड सौभाग्य की कामना
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से लेकर सावन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीयी तिथि तक जया पार्वती व्रत, पूजन का शास्त्रों विधान है। महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य की कामना से मां पार्वती को प्रसन्न करने के लिए की इन दिनों में विशेष पूजा अर्चना करती है। यह व्रत गणगौर, हरतालिका, मंगला गौरी और सौभाग्य सुंदरी व्रत की तरह ही है। यह व्रत करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त होता है। इस दिन बालू (रेत) का हाथी बना कर उन पर 5 प्रकार के फल, फूल और प्रसाद चढ़ाकर पूजन किया जाता है।
इस विधि से करें माँ पार्वती की पूजन
1- व्रत रखने वाली विवाहित स्त्रियां प्रातःकाल स्नान के बाद धुले हुए वस्त्र पहनकर घर के पूजा स्थल या मां पार्वती के मंदिर में कुशा के आसन पर बैठकर हाथ में जल, अक्षत, पुष्प लेकर व्रत करने का संकल्प लें- माता पार्वती का ध्यान करते हुए अपनी मनोकामना पूर्ति की इच्छा माता से कहे।
2- सबसे पहले भगवान शिव को चंदन का तिलक लगायें एवं मां पार्वती को हल्दी कुमकुम के साथ दोनों का शतपत्र, कस्तूरी, अष्टगंध, ऋतुफल, श्रीफल और फूल चढ़ाकर पूजा करें।
3- उपरोक्त पूजन के बाद विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन माता पार्वती का करें।
4- पूजन के बाद माता का स्मरण करते हुए उनकी आरती, स्तुति एवं कथा का पाठ करें, एवं हाथ जोड़कर सुख-सौभाग्य और गृहशांति के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें।
5- अगर बालू (रेत) का हाथी बनाया है तो रात्रि जागरण के पश्चात उसे किसी नदी या जलाशय में विसर्जित करें।
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Published on:
13 Jul 2019 04:06 pm
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