Ramdan: पाक महीने रमजान में ये गलतियां करने से बचें, वरना किसी काम का नहीं रहेगा रोजा

पाक महीने रमजान में ये गलतियां करने से बचें, वरना किसी काम का नहीं रहेगा रोजा

By: Tanvi

Updated: 05 May 2019, 03:58 PM IST

रमजान का महीना इस्लाम धर्म में सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इन दिनों में मुस्लिम धर्म के लोग एक माह तक रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं। रमजान के महीने में ज्‍यादा से ज्‍यादा इबादत करके अल्‍लाह को राजी किया जाता है। हदीस के मुताबिक इस महीने में किया जाने वाला हर नेक काम का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। नए चांद के साथ शुरू होने वाले रोजे रखने पर कई तरह के नियमों का पालन करना होता है। इस दौरान सबसे ज्यादा ध्यान रखना होता है, हर तरह की बुरी आदत से दूर रहकर खुदा की इबादत करना होता है। इस बार रमजान की तारीख संभावित 6 मई हो सकती है। दरअसल, रमजान की तारीख चांद की स्थिति पर तय की जाती है। रोजे रखने के कई नियम होते हैं आइए जानते हैं उन नियमों के बारे में...

ramzan 2019

1. इस्लाम धर्म में बताए नियमों के अनुसार पांच बातें करने पर रोजा टूट जाता है। वे हैं- झूठ बोलना, बदनामी करना, पीठ पीछे किसी की बुराई करना, झूठी कसम खाना और लालच करना।

2. अगर कोई शख्‍स सहरी के वक्‍त रोजे की नियत करें और सो जाएं, फिर यदि नींद सूर्यास्त के बाद खुले तो उसका रोजा नहीं माना जाता है और यह रोजा किस भी मायनों में स्वीकार नहीं किया जाता है।

3. रमजान के महीने में इंसान बुरी लतों से दूर रहता है, सिगरेट की लत छोड़ने के लिए रमजान का महीना बहुत अच्‍छा है। रोजा रखकर सिगरेट या तंबाकू खाने से रोजा टूट जाता है।

4. रोजे के दौरान खुद की आंख, कान और जीभ का भी रोज़ा रखा जाता है। यानि न बुरा देखें, न बुरा सुनें और न ही बुरा कहें। इसके साथ ही इस बात का भी ध्‍यान रखें कि आपके द्वारा बोली गई बातों से किसी की भावनाएं आहत न हों।

5. हर मुसलमान के लिए जरूरी है कि वह रोजे के दौरान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच खान-पान न करें। यहां तक कि सेक्स या इससे संबंधित बुरी सोच से भी दूर रहने की हिदायत दी जाती है।

6. रोजे की सबसे अहम परंपराओं में शामिल है सहरी। सहरी का नियम है कि सूर्योदय से पहले उठकर रोजेदार खाना-पीना कर लेते हैं। इसे ही सहरी कहते हैं जिसके बाद सूर्यास्त तक खाने-पीने की मनाही होती है। सूर्यास्त के बाद रोजा खोला जाता है जिसे इफ्तार कहते हैं।

7. मानसिक आचरण भी शुद्ध रखते हुए पांच बार की नमाज और कुरान पढ़ी जाती है। इस दौरान मन में किसी भी प्रकार के बुरे विचार या मन में किसी के भी प्रति गलत भावना नहीं लानी चाहिए।

 

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