सर्व पितृ पक्ष अमावस्या : इन 19 पित्रों का तर्पण इस विधान से करना न भूलें, सैदव बना रहेगा पित्रों का आशीर्वाद

Sarva Pitru Amavasya : 19 pitru tarpan vidhi : अगर कोई इस दिन अपने इन 19 पितरों के निमित्त केवल जल से तर्पण करते हैं तो पितृ प्रसन्न होकर भरपूर आशीर्वाद देते हैं। जानें वे कौन से 19 पितृ है जिनका विशेष तर्पण सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन करना चाहिए।

By: Shyam

Published: 26 Sep 2019, 10:41 AM IST

अगर पितृ पक्ष में अपने दिवंगत पितरों को श्राद्ध नहीं कर पाएं तो उसकी पूर्ति करने के लिए ही सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध कर्म करने का विधान हमारे पूर्वजों ने बनाया है। इस साल सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या तिथि 28 सितंबर को है। अगर कोई इस दिन अपने इन 19 पितरों के निमित्त केवल जल से तर्पण करते हैं तो पितृ प्रसन्न होकर भरपूर आशीर्वाद देते हैं। जानें वे कौन से 19 पितृ है जिनका विशेष तर्पण सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन करना चाहिए।

 

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तर्पण के लिए सामग्री

- तर्पण के लिए पात्र पीतल या स्टील के दो गंजी। (एक पात्र जिसमें तर्पण किया जाए, दूसरा पात्र जिसमें जल अर्पित करते रहें।)
- कुशा, चावल, जौ, तिल थोड़ी- थोड़ी मात्रा में रखें।
- पूजन वेदी पर चित्र, कलश एवं दीपक के साथ एक छोटी ढेरी चावल की यम तथा तिल की पितृ के लिए रखें।

तर्पण विधि

- हाथ में चावल फूल लेकर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए श्राद्ध करने का संकल्प करें।

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य, अद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीये पर्राधे श्रीश्वेतवाराहकल्पे, वैवस्वतमन्वन्तरे, भूर्लोके, जम्बूद्वीपे, भारतवर्षे, भरतखण्डे, आर्यावर्त्तैकदेशान्तर्गते, .......... क्षेत्रे, .......... विक्रमाब्दे .......... संवत्सरे .......... मासानां मासोत्तमेमासे .......... मासे .......... पक्षे .......... तिथौ .......... वासरे .......... गोत्रोत्पन्नः .............. नामाहं...... नामकमृतात्मनः प्रेतत्वनिवृत्ति द्वारा अक्षय्यलोकावाप्तये स्वकत्तर्व्यपालनपूवकं पितृणाद् आनृण्याथर् सर्वेषां पितृणां शान्तितुष्टिनिमित्तं पंचयज्ञ सहितं श्राद्धकर्म अहं करिष्ये।।

 

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यम आवाहन

ॐ यमाय त्वा मखाय त्वा, सूर्यस्य त्वा तपसे।।
देवस्त्वा सविता मध्वानक्त, पृथिव्याः स स्पृशस्पाहि।।
अचिर्रसि शोचिरसि तपोऽसि॥
ॐ यमाय नमः।। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि ।।

- पितर आवाहन

ॐ विश्वेदेवास ऽ आगत, शृणुता म ऽ इम हवम् ।। एदं बहिर्निर्षीदत ।। ॐ विश्वेदेवाः शृणुतेम हवं मे, ये अन्तरिक्षे यऽ उप द्यविष्ठ ।। ये अग्निजिह्वा उत वा यजत्रा, आसद्यास्मिन्बहिर्षि मादयध्वम् ।- ७.३४,३३.५३ ॐ पितृभ्यो नमः ।। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि ।।

ऐसे करें तर्पण

अब जल से इनका तर्पण करें, (उन्हीं के लिए तर्पण करें जो जीवित नहीं है-)

1- पिता
अस्मत्पिता (पिता) अमुकशर्मा अमुकसगोत्रो वसुरूपस्तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः॥
2- दादा
अस्मत्पितामह (दादा) अमुकशर्मा अमुकसगोत्रो रुद्ररूपस्तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः॥
3- परदादा
अस्मत्प्रपितामहः (परदादा) अमुकशर्मा अमुकसगोत्रो वसुरूपस्तृप्यताम्।।इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः॥
4- माँ
अस्मन्माता (माता) अमुकी देवी दा अमुक सगोत्रा गायत्रीरूपा तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥
5- दादी
अस्मत्पितामही (दादी) अमुकी देवी दा अमुक सगोत्रा सावित्रीरूपा तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥
5- परदादी
अस्मत्प्रत्पितामही (परदादी) अमुकी देवी दा अमुक सगोत्रा लक्ष्मीरूपा तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥

 

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6- पत्नी
अस्मत्पतनी अमुकी देवी दा अमुक सगोत्रा वसुरूपा तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥
7- बेटा
अस्मत्सुतः (बेटा) अमुकशर्मा अमुकसगोत्रो वसुरूपस्तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥ सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः॥
8- बेटी
अस्मत्कन्याः (बेटी) अमुकी देवी दा अमुक सगोत्रा वसुरूपा तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः ॥
9- चाचा
अस्मत्पितृव्यः (चाचा) अमुकशर्मा अमुकसगोत्रो वुसरूपस्तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः॥
10- मामा-
अस्मन्मातुलः (मामा) अमुकशर्मा अमुकसगोत्रो वुसरूपस्तृप्यताम् ।। इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः ॥
11- सगा भाई
अस्मद्भ्राता (अपना भाई) अमुकशर्मा अमुकसगोत्रो वुसरूपस्तृप्यताम् ।। इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः ॥
12- बुआ
अस्मत्पितृभगिनी (बुआ) अमुकी देवी दा अमुक सगोत्रा वसुरूपा तृप्यताम् ।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः ॥
13- मौसी
अस्मान्मातृभगिनी (मौसी) अमुकी देवी दा अमुक सगोत्रा वसुरूपा तृप्यताम् ।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः ॥
14- सगी बहन
अस्मदात्मभगिनी (अपनी बहिन) अमुकी देवी दा अमुक सगोत्रा वसुरूपा तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥

 

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15-ससुर
अस्मद श्वशुरः (श्वसुर) अमुकशर्मा अमुकसगोत्रो वसुरूपस्तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः॥
16- सास
अस्मद श्वशुरपतनी (सास) अमुकी देवी दा अमुक सगोत्रा वसुरूपा तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः॥
17- गुरु
अस्मद्गुरु अमुकशर्मा अमुकसगोत्रो वसुरूपस्तृप्यताम्।। इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः॥
18- गुरु माता
अस्मद् आचायर्पतनी अमुकी देवी दा अमुक सगोत्रा वसुरूपा तृप्यताम् ।। इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नमः ॥
19- स्वयं का तर्पण (मुखमार्जन)- इसमें जल से स्वंय आचमन करें।। भाव करें अपनी काया में स्थित जीवात्मा की तुष्टि-पुष्टि के लिए भी यह कर्म किया जाता है।
ॐ संवर्चसा पयसा सन्तनूभिः, अगन्महि मनसा स शिवेन।। त्वष्टा सुदत्रो विदधातु रायः, अनुमाष्टुर् तन्वो यद्विलिष्टम॥

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