वामन जयंती 2019 : व्रत रखने से हो जाती है हर मनोकामना पूरी, जानें पूजा विधि व महत्व

वामन जयंती 2019 : व्रत रखने से हो जाती है हर मनोकामना पूरी, जानें पूजा विधि व महत्व
वामन जयंती 2019 : व्रत रखने से हो जाती है हर मनोकामना पूरी, जानें पूजा विधि व महत्व

Shyam Kishor | Updated: 09 Sep 2019, 10:36:13 AM (IST) त्यौहार

Vamana Jayanti : 10 September, Puja Vidhi vrat vidhan : इस दिन व्रत रखने से एक साथ अनेक मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। जानें पूजा विधि, व्रत का शुभफल एंव महत्व।

Vamana Jayanti : प्रतिवर्ष भादो मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु ने वामन अवतार की जयंती मनाई जाती है। इस साल 2019 में भगवान वामन जयंती ( Vamana Jayanti ) का पर्व 10 सितंबर 2019 दिन मंगलवार है। कहा जाता है इस दिन व्रत रखने से एक साथ अनेक मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। जानें पूजा विधि, व्रत का शुभफल एंव महत्व।

 

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वामन द्वादशी व्रत फल

भगवान वामन की जयंती के दिन श्रावण नक्षत्र हो तो इस व्रत की महत्ता और भी बढ़ जाता है। अगर कोई इस दिन उपवास करके वामन भगवान का पंचोपचार सहित पूजन श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक करता है तो भगवान वामन उनके सभी कष्टों को उसी तरह दूर कर देते हैं, जैसे उन्होंने देवताओं को राजा अपने परम भक्त बलि के सभी कष्टों को दूर कर दिया था।

वामन जयंती पूजा विधि

इस खास दिन प्रातःकाल भगवान श्री वामन जी का पंचोपचार विधि एवं षोडषोपचार पूजन करने से पहले चावल, दही आदि जैसी वस्तुओं का दान करने का विधान सबसे उत्तम माना गया है। व्रत रखकर शाम के समय भगवान वामन का पूजन करें और व्रत की कथा का श्रवण करने से जीवन की सभी समस्याओं का निराकरण हो जाता है, अर्थात भगवान वामन जी अपने भक्तों की हर मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

 

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वामन जयंती कथा

शास्त्रों में वामन अवतार को भगवान विष्णु का महत्वपूर्ण अवतार माना जाता है, श्रीमद्भगवद पुराण में वामन अवतार का उल्लेख मिलता है। वामन अवतार कथा अनुसार देव और दैत्यों के युद्ध में देव पराजित होने लगते हैं, असुर सेना अमरावती पर आक्रमण करने लगती है, तब इन्द्र भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं। भगवान विष्णु उनकी सहायता करने का आश्वासन देते हैं और वामन रुप में माता अदिति के गर्भ से जन्म लेते हैं। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन अदिति के गर्भ से प्रकट हो अवतार लेते हैं तथा ब्राह्मण-ब्रह्मचारी का रूप धारण करते हैं।

वामन जयंती 2019 : व्रत रखने से हो जाती है हर मनोकामना पूरी, जानें पूजा विधि व महत्व

भगवान वामन और राजा बलि
महर्षि कश्यप ऋषियों के साथ उनका उपनयन संस्कार करते हैं वामन बटुक को महर्षि पुलह ने यज्ञोपवीत, अगस्त्य ने मृगचर्म, मरीचि ने पलाश दण्ड, आंगिरस ने वस्त्र, सूर्य ने छत्र, भृगु ने खड़ाऊं, गुरु देव जनेऊ तथा कमण्डल, अदिति ने कोपीन, सरस्वती ने रुद्राक्ष माला तथा कुबेर ने भिक्षा पात्र प्रदान किए। बाद में भगवान वामन पिता से आज्ञा लेकर बलि के पास जाते हैं राजा बली नर्मदा के उत्तर-तट पर अन्तिम अश्वमेध यज्ञ कर रहे होते हैं।

 

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भगवान वामन जी ब्राह्माण वेश धर कर, राजा बलि के पास भिक्षा मांगने पहुंते हैं, और भिक्षा में तीन पग भूमि मांगते हैं, राजा बलि अपने वचन पर अडिग रहते हुए, तीन पग भूमि दान में दे देते हैं। वामन रुप श्री भगवान ने एक पग में स्वर्ग ओर दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लेने के बाद तीसरा पैर रखने के लिए ब्रह्मांड में कोई जगह ही नहीं बची तब राजा बलि ने अपना सिर भगवान के पैर के नीचे रखते हुए कहा हे भगवन तीसरा पग मेरे सिर पर रखें। राजा बलि के द्वारा वचन का पालन करने पर, भगवान वामन अत्यन्त प्रसन्न होते हैं और बलि को पाताललोक का स्वामी बना देते हैं इस तरह भगवान वामन देवताओं की सहायता कर उन्हें पुन: स्वर्ग का अधिकारी बनाते हैं।

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