
पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा रहा डायरेक्ट टैक्स-GDP रेश्यो, टैक्सपेयर्स की इनकम में हुई बढ़ोतरी
नई दिल्ली। 8 नवंबर 2016 में मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी का ऐलान किया गया था। तब से ही नोटबंदी को कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। तमाम आलोचनाओं के बावजूद नोटबंदी डायरेक्ट टैक्स के लिहाज से काफी फायदेमंद रही है। इसके साथ ही मोदी सरकार में दस साल का रिकॉर्ड बन गया है क्योंकि अगर हम बीते दस सालों की बात करें तो वित्त वर्ष 2017-18 में डायरेक्ट टैक्स-जीडीपी (GDP) रेश्यो सबसे ज्यादा रहा है। वित्त मंत्रालय के अनुसार इस साल डायरेक्ट टैक्स-जीडीपी रेश्यो 5.98 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया है। 2016-17 में यह आंकड़ा 5.57 फीसदी और 2015-16 में 5.47 फीसदी था।
पिछले तीन सालों से हो रही है ग्रोथ
वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2018 के रिव्यू में कहा कि, 'डायरेक्ट टैक्स-जीडीपी रेश्यो में बीते तीन साल से लगातार ग्रोथ दिख रही है। 2017-18 में यह आंकड़ा बढ़कर 5.98 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया,जो बीते 10 साल में सबसे अच्छा डीटी-जीडीपी रेश्यो है।' मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बीते चार वित्त वर्ष के दौरान रिटर्न की संख्या 80 फीसदी बढ़कर 2013-14 के 3.79 करोड़ से बढ़कर 2017-18 में 6.85 करोड़ के स्तर पर पहुंच गई।
टैक्सपेयर्स की घोषित इनकम बढ़ी
वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा कि इंडिविजुअल रिटर्न फाइलिंग लगभग 65 फीसदी बढ़कर 2013-14 के 3.31 करोड़ से बढ़कर 2017-18 में 5.44 करोड़ के स्तर पर पहुचं गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते तीन एसेसमेंट ईयर्स के दौरान रिटर्न के माध्यम से टैक्सपेयर्स की सभी कैटेगरीज में घोषित इनकम भी लगातार बढ़ रही है। एसेसमेंट ईयर 2014-15 के लिए रिटर्न फाइलर्स ने 26.92 लाख करोड़ रुपए की ग्रॉस इनकम घोषित की थी, जो एसेसमेंट ईयर 2017-18 में 67 फीसदी बढ़कर 44.88 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई। इससे सरकार के टैक्स चोरी रोकने की दिशा में किए गए प्रयासों के चलते टैक्स कंप्लायंस बढ़ने का पता चलता है।
Read the Latest Business News on Patrika.com. पढ़ें सबसे पहले Business News in Hindi की ताज़ा खबरें हिंदी में पत्रिका पर।
Published on:
03 Jan 2019 11:47 am
