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मोदी-माल्या के सामने बेबस बैंकों ने गरीबों से ठगे 11500 करोड़, सरकारी बैंक सबसे आगे

एक ही गलती के लिए बैंक मनमाने ढंग से अलग-अलग रकम वसूल रहे हैं।
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मोदी-माल्या के सामने बेबस बैंकों ने गरीबों से ठगे 11500 करोड़, सरकारी बैंक सबसे आगे

नई दिल्ली। भगौड़े शराब कारोबारी विजय माल्या और हीरा कारोबारी नीरव मोदी जैसे कर्जदार के सामने देश के सरकारी और प्राइवेट बैंक भले ही बेबस हों, लेकिन वे देश के गरीब और आम आदमी का खून चूसने में कभी पीछे नहीं रहते हैं। बड़े कर्जदारों की वजह से भले ही बैंकों का नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) बढ़ रहा हो, लेकिन वे गरीबों के खाते से छोटी-छोटी गलती पर वसूली कर हर साल मोटा पैसा कमा रहे हैं। यही नहीं, एक ही गलती के लिए बैंक मनमाने ढंग से अलग-अलग रकम वसूल रहे हैं। इससे बैंकों की आमदनी बढ़ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश के बैंकों ने बीते चार सालों में खाते में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने की एवज में करीब 11500 करोड़ रुपए की वसूली की है। इनमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के बैंक शामिल हैं।

ये है चौंकाने वाला आंकड़ा

बैंकों में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने की एवज में वसूले जाने वाले शुल्क को लेकर हाल में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से आई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2017-18 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर अपने खाताधारकों से करीब 3500 करोड़ रुपए की वसूली की है। वहीं, बीते चार सालों में सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंक और निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई, एक्सिस और एचडीएफसी बैंक ने इस मद में करीब 11,500 करोड़ रुपए की वसूली की है। खास बात यह है कि इन बैंकों ने यह वसूली खातों की सर्विसिंग के नाम पर की है।

ये है बैंकों का तर्क

बैंकों की ओर से खाते में एक न्यूनतम राशि रखने का नियम है। यदि खाते में इस जमा तय राशि से कम हो जाता है तो बैंक कुछ राशि काट लेते हैं। थोड़ी-थोड़ी राशि के रूप में की जाने वाली यह कटौती धीरे-धीरे लाखों और करोड़ों में हो जाती है। हालांकि, कुछ खातों पर यह नियम लागू नहीं होता है। न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर की जाने वाली कटौती पर बैंकों का कहना है कि वह खाते के संचालन के लिए बुनियादी खर्च निकालने के लिए यह वसूली करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर वसूली करने वालों में सबसे आगे देश का सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई है। एसबीआई ने वित्त वर्ष 2017-18 में अकेले इस मद में करीब 2500 करोड़ रुपए की वसूली की है। वहीं निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक ने इस मद में बीते वित्त वर्ष में करीब 600 करोड़ रुपए वसूले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर हर बैंके मनमाने ढंग से वसूली करता है। एसबीआई इस मद में सभी करों समेत 5 से 15 रुपए तक वसूलता है। वहीं एचडीएफसी बैंक सबसे ज्यादा वसूली करता है।