
देश के स्कूली बच्चों को दी जाएगी वित्तीय शिक्षा, तैयार हुअा पाठ्यक्रम
नर्इ दिल्ली। देश में पिछले डेढ़ साल में नोटबंदी आैर जीएसटी जैसे दो बड़े आर्थिक डिसीजन लिए गए। लेकिन सरकार आैर आरबीआर्इ इस दोनों ही मामलों में बड़ी भूल कर गर्इ। इन दोनों ही के लागू होने के बाद जनता को जो आर्थिक फायदे आैर नुकसान का अंदाजा अपने आप लगना चाहिए था वो नहीं लग सका। जिसका मुख्य कारण था देश की जनता में वित्तीय शिक्षा का अभाव। अब इस गलती को सुधारने के लिए आरबीआर्इ ने एक नर्इ योजना बनार्इ है। जिससे देश को को अर्थिक शिक्षा प्राप्त हो सके। आइए आपको भी बताते हैं कि सरकार आैर आरबीआर्इ क्या करने जा रही है?
स्कूली बच्चों को दी जाएगी वित्तीय शिक्षा
देश में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए जल्द ही स्कूलों के पाठ्यक्रम में वित्तीय शिक्षा को शामिल किया जाएगा। रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिल्ली कार्यालय के क्षेत्रीय निदेशक ईई कार्तक ने आज एक कार्यक्रम में बताया कि वित्तीय शिक्षा पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार हो चुका है और इसे जल्द ही पाठ्य पुस्तकों में शामिल कर लिया जाएगा।
पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा यह
कार्तक ने कहा कि छठी कक्षा से छात्रों को वित्तीय शिक्षा देने की योजना है। इसमें पारंपरिक और डिजिटल बैंकिंग में ग्राहकों के अधिकार, उनकी जिम्मेदारी तथा बैंकिंग की सामान्य जानकारी के साथ शेयर बाजार और निवेश के बारे में भी बताया जाएगा।
इन्होंने तैयार किया पाठ्यक्रम
यह पाठ्यक्रम पेंशन फंड नियामक पीएफआरडीए, बीमा नियामक इरडा और शेयर बाजार नियामक सेबी के साथ मिलकर तैयार किया गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार कर लिया है। आरबीआई द्वारा आज से आयोजित वित्तीय साक्षरता सप्ताह कार्यक्रम की दिल्ली क्षेत्र में शुरुआत करते हुए श्री कार्तक ने कहा कि वित्तीय साक्षरता से वित्तीय समावेशन में मदद मिलती है। जानकर ग्राहक बेहतर ग्राहक बन सकते हैं। वे बाजार से नर्इ-नर्इ जानकारियाँ माँगते हैं जो प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है।
Published on:
04 Jun 2018 03:23 pm
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