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एशियाई चैंपियनशिप के लिए उड़ान भरने वाली थीं तभी पिता की मौत, अब मनीषा भानवाला ने रचा है अविश्वसनीय इतिहास

एक बेटी अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करने के लिए कितनी दूर जा सकती है, मनीषा भानवाला की कहानी से समझिए।
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Ravi Gupta

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Updated: 31 Oct 2026, 1:00 PM IST

Credit- AIR and DD Sports

यह कहानी है इतिहास रचने से कहीं ज्यादा एक बेटी की है जिसने पिता के अधूरे सपने को पूरा किया। जो कभी एशियाई चैंपियनशिप के लिए फ्लाइट में बैठने वाली थीं लेकिन पिता के अचानक मौत ने सबकुछ बदल दिया था। अब शुक्रवार (30 अक्टूबर, 2026) को वही लड़की मनीषा भानवाल ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला बनी हैं।

मनीषा ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 59 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता है। उनके पिता ने यह सपना 2013 में मनीषा को कुश्ती अखाड़े में ले जाकर जगाया गया था।


पिता की मौत की खबर ने भी नहीं तोड़ा हौंसला

उनके पिता का निधन 2022 में हुआ, ठीक उसी दिन जब मनीषा एशियाई चैंपियनशिप के लिए उड़ान भरने वाली थीं। पिता की अचानक मौत ने उन्हें तोड़ दिया, लेकिन परिवार ने उनके हौसले की आग को बरकरार रखने में मदद की। उन्होंने उस दर्दनाक समय में भी टूर्नामेंट में भाग लिया, और कांस्य पदक जीता।

उसके बाद मनीषा ने लगातार मेहनत की। उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में तीन और पदक जीते, जिनमें पिछले साल का स्वर्ण भी शामिल है। लेकिन असली मुकाम 30 अक्टूबर 2026 को आया, जब उन्होंने अस्ताना, कजाखस्तान में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में अमेरिका की अबीगैल नेट को 8-6 से हराकर इतिहास रच दिया। बता दें, फाइनल के पहले दौर में 1-6 से पिछड़ने के बाद, दूसरे दौर में सात लगातार अंक लेकर 8-6 से जीत हासिल की।

पिताजी की टी-शर्ट के साथ ग्रहण किया पदक

उनकी यह जीत सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि पिता के सपने की पूर्ति थी। फाइनल जीतने के बाद उन्होंने एक सफेद टी-शर्ट उठाई, जिस पर अपने पिता की तस्वीर छपी थी - यह भावनात्मक श्रद्धांजलि थी, जिसने दर्शकों के दिलों को छू लिया।

उनकी ट्रेनिंग और मानसिक मजबूती की मिसाल है कि वे हर दिन बिना छुट्टी के अभ्यास करती थीं। राष्ट्रीय कोच विरेंद्र कुमार ने बताया कि मनीषा का समर्पण अद्वितीय है - वे शादी में भी रुचि नहीं रखतीं और कुश्ती के प्रति उनका लगाव साधु-संत जैसा है।