
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
राजस्थान के कबड्डी नायकों की कहानी में हम जानेंगे कि कैसे कुछ खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मेहनत और जुनून से ओलंपिक या एशियाई जैसे बड़े टूर्नामेंट में सफलता की ओर बढ़ते हैं|? यह लेख उन खिलाड़ियों की प्रेरक यात्रा, चुनौतियों और युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा है।
राजस्थान के कई युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर चमक रहे हैं। हाल ही में, 2026 के एशियाई बीच कबड्डी गेम्स के लिए भारतीय टीम में राजस्थान के 4 खिलाड़ी बिजेंद्र सिंह चौधरी, जितेंद्र यादव, जय भगवान और मनीप्रीत कौर को शामिल किया गया है। यह चयन राज्य में कबड्डी के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों के लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण हुआ है। साथ ही, 2025 के तीसरे यूथ एशियन गेम्स (बहरीन) में भारत की कबड्डी टीम ने स्वर्ण पदक जीता, जिसमें राजस्थान के पांच युवा खिलाड़ियों ने अहम भूमिका निभाई। उन्हें राज्य के खेल मंत्री, सेवानिवृत्त कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर ने सम्मानित किया। इन उपलब्धियों से स्पष्ट होता है कि राजस्थान में कबड्डी का स्तर तेजी से सुधर रहा है, लेकिन यह सफर आसान नहीं रहा।
राहुल लाल चौधरी: अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी हैं। उनका जन्म 12 फरवरी 1988 को जयपुर में हुआ था। उन्होंने प्रो कबड्डी लीग में जयपुर पिंक पैंथर्स और बेंगलुरु बुल्स के लिए खेला। 2018 के एशियाई खेलों में वे भारतीय टीम का हिस्सा थे, जिसने कांस्य पदक जीता। यह दर्शाता है कि राज्य से निकलने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
सचिन तंवर: राजस्थान के झुंझुनू से हैं। सचिन का जन्म 19 जुलाई 1999) को हुआ था। उन्होंने 2017 में एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में सीनियर इंडिया टीम में पदार्पण किया। इसके बाद प्रो कबड्डी लीग में पटना पाइरेट्स और तमिल थलाइवाज के लिए खेले। यह युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है कि वे भी राष्ट्रीय टीम में स्थान बना सकते हैं।
राजस्थान के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर भी चमक रहे हैं। नेवनीत गौतम को 2006 में अर्जुन पुरस्कार मिला था, जो राज्य के लिए एक बड़ा सम्मान है। राजस्थान की टीमों ने हाल के राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। 2024 में बोधगया (बिहार) में नेशनल चैंपियनशिप और 2025 में ऋषिकेश–शिवपुरी (उत्तराखंड) में 38वें नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
2026 में मछलीपट्टनम (आंध्र प्रदेश) में नेशनल गेम्स में रजत पदक और खेलो इंडिया (दमन-दीव) में दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीता गया।
इन उपलब्धियों से स्पष्ट होता है कि राजस्थान में कबड्डी के लिए आधार मजबूत हो रहा है, चाहे वह युवा स्तर हो, राष्ट्रीय चैंपियनशिप हो या एशियाई प्रतियोगिताएं। कोचिंग, संरचना और आगे का रास्ता राजस्थान ओलंपिक संघ और कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से खिलाड़ियों को समर्थन मिल रहा है। राज्य ओलंपिक संघ के अध्यक्ष तेजस्वी सिंह गहलोत ने चयनित खिलाड़ियों को बधाई दी और स्कूल-कॉलेज स्तर पर बीच कबड्डी को बढ़ावा देने की बात कही। यह दर्शाता है कि संस्थागत स्तर पर भी खेल को प्रोत्साहन मिल रहा है।
राजस्थान में जूनियर और सब-जूनियर स्तर पर नियमित चैंपियनशिप आयोजित हो रही हैं। उदाहरण के लिए, 2025 में 35वीं सब-जूनियर राज्य स्तरीय कबड्डी चैंपियनशिप और 2026 में 52वीं जूनियर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित हुई। यह युवा खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा का मंच और अनुभव प्रदान करती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी को पहचान 1936 में मिली। उस दौरान कबड्डी को बर्लिन ओलंपिक में एक प्रदर्शन खेल के रूप में दिखाया गया था। 1990 में बीजिंग एशियाई खेलों में कबड्डी को मुख्य खेल के रूप में शामिल किया गया, जहां भारत ने स्वर्ण पदक जीता। 1993 में दूसरा एशियाई चैम्पियनशिप भारत (जयपुर- राजस्थान) में आयोजित हुआ, जिसमें मलेशिया और जापान ने पहली बार भाग लिया।
Updated on:
21 Oct 2026 07:27 pm
Published on:
21 Oct 2026 07:27 pm
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