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आरुषि-हेमराज हत्याकांड: आज शाम तक घर आ जाएंगे तलवार दंपति, वकील ने बताया रिहाई की कार्यवाही होगी शुरू

9 साल बाद तलवार परिवार में मनेगी दिवाली, परिवार को है तलवार दपंति का बेसब्री से इंतजार

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Aarushi murder Case

आरुषि मर्डर केस

गाजियाबाद. देश के सबसे बड़े मिस्ट्री मर्डर केस आरुषि-हेमराज हत्या कांड में तककरीब चार साल जेल की सजा काट चुके आरुषि के माता-पिता डॉक्टर राजेश और नुपुर तलवार सोमवार को बरी हो सकते हैं। गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने तलवार दंपति को आरुषि और हेमराज हत्या का आरोपी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 12 अक्टूबर को आरुषि हत्याकांड में सजा काट रहे राजेश और नूपुर तलवार को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया। बतादें कि तलवार दंपति गाजियाबाद के डासना जेल में बंदी हैं।

तलवार दंपति के वकील के की मानें तो 12 अक्टूबर को कोर्ट का फैसला आने के बाद तलवार दंपति को शनिवार को रिहा होना था लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट से स्टिफाइएड कॉपी नहीं मिलने की वजह से इनकी रिहाई टल गई है। जो आज यानी 16 अक्टूबर को हो सकती है। कोर्ट के इस फैसले से तलवार दंपति के साथ-साथ उनके परिजनों में भी खुशी की लहर दौड़ गई। आपको बतादें कि तलवार दंपति गाजियाबाद के डासना जेल में बंदी हैं। डासना जेल के एसपी दधिराम मौर्य का कहना है कि जब तक कोर्ट की ओर से सरकारी दस्तावेज नहीं मिल जाता, तब तक वो तलवार दंपित को रिहा नहीं करेंगे।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद तलवार परिवार में थोड़ी खुशी दिखी क्योंकि अब सोमवार को राजेश आैर नुपूर तलवार अपने घर वापस आ रहे हैं। तकरीबन 4 सालों के बाद इलाहाबाद हार्इकोर्ट ने राजेश आैर नुपूर के खिलाफ कोई सबूत न पाते हुए उन्हें बरी करने के आदेश दे दिए हैं। इस बीच नुपूर तलवार के पिता यानि आरुषि के नाना बीजी चिटनिस ने बताया कि एक बेटी को तो खो चुके हैं, अब तक दूसरी भी बिछड़ी हुर्इ थी। अब नुपूर आैर राजेश के लौटने पर साढ़े नौ साल बाद घर में पहला त्योहार दिवाली मनाएंगे। आरुषि की मौत के बाद जैसे सब खत्म हो गया था। नाना बीजी चिटनिस ने बताया कि आरुषि की हत्या के बाद से ही घर की सभी खुशियां खत्म हो गर्इ थी। एक एक दिन बहुत ही दुख में काटा है। उधर कई सालों से दामाद आैर बेटी भी उस गुनाह की सजा काट रहे थे, जो उन्होंने किया ही नहीं था। कुछ समय जरूर लगा लेकिन न्यायालय ने सही फैसला किया। लेकिन आज भी हमारे मन कर्इ सवाल बाकी है। हम आज भी आरुषि के हत्यारों की तलाश में हैं। खबर ये भी है कि जेल के अंदर से नुपूर तलवार ने बोला है कि वह आरुषि के असली कातिल को सलाखों के पीछे लाने के लिए जंग लड़ती रहेंगी।

सेक्‍टर-25 स्थित जलवायु विहार में डेंटिस्‍ट डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नुपूर तलवार अपनी 14 साल की बेटी आरुषि तलवार के साथ रहते थे। आरुषि नौवीं की छात्रा थी। 15/16 मई 2008 की रात को उनके घर में आरुषि का मर्डर हो गया। पहले तो शक उनके नौकर हेमराज पर गया, पर बाद में उसका शव भी छत से मिला। इस मर्डर केस पर किताब लिखी गई, फिल्म बनाई गई लेकिन हत्या की गुत्थी नहीं सुलई पाई है।

इस हत्याकांड की जानें पूरी टाइम लाइन, कब क्या-क्या हुआ।


साल 2008
मई 16 : आरुषि तलवार का नोएडा के घर के बेडरूम में लाश मिली। शव का गला कटा हुआ था। हत्या का शक नौकर हेमराज पर गया।
मई 17 : अगले दिन नौकर हेमराज की लाश तलवार के घर के छत से बरामद हुई।
मई 23 : आरुषि के पिता डॉ राजेश तलवार को नोएडा पुलिस ने आरुषि और हेमराज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।
जून 1 : सीबीआई को इस केस की जांच सौंपी गई।
जून 13 : डॉ राजेश तलवार के कम्पाउंडर कृष्णा को इस मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया। तलवार के दोस्त दुर्रानी के नौकर राजकुमार और तलवार के पड़ोसी के नौकर विजय मंडल को भी बाद में गिरफ्तार किया। सीबीआई ने तीनों को दोहरे हत्याकांड का आरोपी बनाया।
जुलाई 12 : इधर राजेश तलवार को गाजियाबाद की डासना जेल से जमानत पर रिहा किया गया।
सितंबर 12 : कुछ महीनों बाद कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को लोअर कोर्ट से जमानत मिल गई. सीबीआई 90 दिनों तक चार्जशीट फाइल नहीं कर सकी थी।


साल 2009, 10 सितंबर को इस हत्याकांड की जांच के लिए सीबीआई की दूसरी टीम बनाई गई।

साल 2010, 29 दिसंबर को सीबीआई ने आरुषि हत्याकांड में अदालत में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी।

साल 2011

जनवरी 25 : राजेश तलवार ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ लोअर कोर्ट में पिटीशन दर्ज की।
फरवरी 9 : लोअर कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी और आरुषि के मां-बाप, राजेश और नुपुर तलवार को हत्या का दोषी माना।
फरवरी 21 : डॉ राजेश और नुपुर तलवार ट्राइल कोर्ट के समन को रद्द करवाने हाइकोर्ट गए।
मार्च 18 : हाईकोर्ट ने समन रद्द करने की तलवार की अपील को खारिज की और उन पर कार्यवाही शुरू करने को कहा।
मार्च 19 : तलवार दंपति सुप्रीम कोर्ट गए, जिसने उनके खिलाफ ट्राइल को स्टे कर दिया।


साल 2012
जनवरी 6 : सुप्रीम कोर्ट ने तलवार दंपति की अर्जी को खारिज करते हुए ट्राइल शुरू करने की परमिशन दी।
जून 11 : गाजियाबाद में विशेष सीबीआई जज एस लाल के सामने ट्राइल शुरू हुआ।

साल 2013
अक्टूबर 10 : कोर्ट में फाइनल बहस हुआ।
नवंबर 25 : फाइनल सुनवाई के बाद तलवार दंपति को गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।


साल 2014
जनवरी : तलवार दंपत्ति ने लोअर कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।


साल 2017
जनवरी 11 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति की अपील पर फैसला सुरक्षित किया।
अगस्त 01 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तलवार की अपील दुबारा सुनेंगे क्योंकि सीबीआई के दावों में विरोधाभास हैं।
सितंबर 08 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि हत्याकांड में फैसला सुरक्षित किया।
अक्टूबर 12 : इलाहाबाद हाईकोर्ट में आरुषि हत्याकांड पर सजा काट रहे राजेश और नूपुर तलवार को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया।
अक्टूबर13: गाजियाबाद के डासना जेल में सजा काट रहे राजेश और नूपुर तलवार को रिहा होना था लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट से स्टिफाइएड कॉपी नहीं मिली वजह से इनकी रिहाई टल गई है। खबरों की मानें तो अब इनको 16 अक्टूबर को बरी किया जाएगा।