14 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Harish Rana Euthanasia: पैरेंट्स ने दान किए हरीश राणा के अंग, इसी साल मार्च में दी गई थी इच्छामृत्यु

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गाजियाबाद के हरीश राणा को इसी साल 24 मार्च को दिल्ली AIIMS में इच्छामृत्यु (Harish Rana Ichchamrityu) दी गई थी। अब हरीश राणा (Harish Rana) के माता-पिता ने उनके शरीर के जरूरी अंगों को दान कर दिया है।

2 min read
Google source verification
Harish Rana Ichchamrityu

इच्छामृत्यु के बाद माता-पिता ने हरीश के अंग दान किए (File Photo- Patrika)

Harish Rana Ichchamrityu: उत्‍तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले 32 वर्षीय हरीश राणा ने इसी साल 24 मार्च को दिल्ली AIIMS में अंतिम सांस ली थी। हरीश राणा को सु्प्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत इच्छामृत्यु दी गई थी। हरीश राणा 13 सालों तक कोमा में थे। हरिश के माता-पिता ने बेटे के लिए इच्छामृत्यु मांगी थी। अब हरीश राणा से जुड़ी बड़ी जानकारी सामने आई है।

माता-पिता ने दान किए हरीश राणा के अंग

हरीश राणा की मौत के बाद उनके माता-पिता ने अंग दान किए हैं। डॉक्टरों की सलाह पर माता-पिता ने हरीश के दिल का वॉल्व, कॉर्निया और आंखें दान की हैं। परिवार का मानना है कि भले ही हरीश अब उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों के जरिए वे किसी और के जीवन में जीवित रहेंगे।

हरीश राणा के परिवार की तरफ से वकील ने मृत्यु का प्रमाणपत्र सर्वोच्च न्यायालय रजिस्ट्री में प्रस्तुत किया है। वकील ने बताया कि हरीश राणा के निधन के बाद उनके दिल का वॉल्व और कार्निया दान किए गए, क्योंकि ये अंग ही दान के लिए उपयुक्त पाए गए थे।

डॉक्टरों की स्पेशल टीम की निगरानी में हुआ अंगदान

AIIMS के डॉक्टरों ने बताया कि कॉर्निया डोनेशन से आम तौर पर शरीर में कोई साफ दिखने वाली विकृति नहीं आती, जबकि हार्ट वाल्व निकालने का काम भी पूरी इज्‍जत के साथ किया जाता है। उसके बाद शरीर को ठीक करने की उचित प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। AIIMS के अधिकारियों ने बताया कि टिश्यू के बंटवारे और ट्रांसप्लांटेशन से जुड़े गोपनीयता के नियमों के चलते, आम तौर पर दान पाने वालों के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती है।

AIIMS के डॉ. मिश्रा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डॉक्टरों ने परिवार के साथ विस्तार से चर्चा की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चिकित्सकीय रूप से किसी भी प्रकार का दान संभव है या नहीं। इस स्थिति में पारंपरिक अंगदान संभव नहीं था, इसलिए AIIMS की टीमों ने टिशू दान की संभावनाओं का आकलन किया, जिसमें कॉर्निया और हार्ट वाल्व शामिल थे। इस काम के लिए विशेष टीमों को लगाया गया था। स्पेशल टीम की निगरानी में अंगदान किए गए हैं।

कई सालों तक भावनात्‍मक पीड़ा से गुजरा हरीश का परिवार

AIIMS में ऑन्कोएनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन की विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा मिश्रा ने के मुताबिक, इच्छामृत्यु और अंगदान जैसी प्रक्रिया के समय परिवार काफी भावनात्‍मक पीड़ा से गुजरना है। इस प्रक्रिया के अंतिम चरण तक पहुंचने से पहले, हरीश के परिवार को कई सालों तक भावनात्मक पीड़ा और कानूनी संघर्ष से गुजरना पड़ा। भले ही परिवार खुद को कानूनी और चिकित्सकीय रूप से तैयार कर ले, लेकिन किसी अपने को खोने का वह वास्तविक पल भावनात्मक रूप से बेहद भारी होता है।

बड़ी खबरें

View All

गाज़ियाबाद

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग