
गाजियाबाद। जिस तरह पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के साथ उसी जगह सीबीआई द्वारा पूछताछ की गई जिस जगह का उन्होंने ही उद्घाटन किया गया था। ठीक उसी तरह जनपद गाजियाबाद में भी 90 के दशक में ऐसा ही एक मामला उस वक्त सामने आया था। जब उत्तर प्रदेश कैडर के एक सीनियर आईएएस अफसर द्वारा जनपद गाजियाबाद के डासना में जेल बनाने के लिए जमीन मुहैया कराई गई थी। इसके बाद इसी जेल में उन्हें बंदी बनकर रहना पड़ा।
दरअसल, यहां बात हो रही है उत्तर प्रदेश कैडर में एक आईएएस अफसर प्रदीप शुक्ला जोकि अपने बैच के टॉपर रहे हैं। उनकी पत्नी आराधना शुक्ला भी आईएएस हैं। प्रदीप शुक्ला सन् 1993 से 1996 के बीच गाज़ियाबाद के ज़िलाधिकारी रहे थे। तभी उन्होंने वहां की कचहरी के नए भवन और नवनिर्मित डासना जेल के लिए जमीन मुहैया कराई थी। उस वक्त बद्रीनारायण जेल मंत्री रहे थे और उनके द्वारा ही जेल का उदघाटन किया गया था। उनके नाम का पत्थर आज भी वहां लगा हुआ है। उस दौरान समाजवादी पार्टी की सरकार थी। संयोग देखिए कि एनआरएचएम घोटाले में फंस कर प्रदीप शुक्ला उसी गाज़ियाबाद कचहरी में बतौर मुलजिम आते-जाते रहते हैं। उसी डासना जेल में वह बन्दी बने।
बता दें कि प्रदीप शुक्ला प्रदेश पर 15 जिलों के सरकारी अस्पतालों में मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम का क्रियान्वयन कराने में 2,40,00,000 रुपए के घोटाले का आरोप लगा और 2009 एवं 2010 में यह घोटला उजागर हुआ। जिसके बाद इनके प्रति तमाम जांच शुरू हो गई और आखिरकार सीबीआई की जांच के बाद मामला साफ होने पर इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। तभी से लगातार उसी कोर्ट परिसर में प्रदीप शुक्ला के केस की सुनवाई चल रही है और आरोप सिद्ध होने के बाद प्रदीप शुक्ला को उसी डासना जेल में पहुंचाया गया। जहां पर उन्होंने जेल का उद्घाटन किया था।
Updated on:
23 Aug 2019 05:17 pm
Published on:
23 Aug 2019 04:59 pm
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