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महिलाओं के लिए मिसाल बनी पारुल सिंघल, 44 की उम्र में तोड़ा रिकॉर्ड

225 किलो वेट उठाकर कायम किया नया नेशनल रिकार्ड

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Ghaziabad

वैभव शर्मा गाजियाबाद. यूं तो मुक्केबाजी की दुनिया में मैरीकॉम महिलाओं और युवतियों के लिए आदर्श हैं। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हमेशा से आगे बढ़ने का संदेश दिया। पावर लिफ्टिंग के खेल में भी पारूल ऐसी ही मैरीकॉम हैं, जिन्होंने शादी और दो बच्चे होने के बाद भी हार नहीं मानी। आठ साल पति के साथ एक्सपोर्ट का बिजनेस संभालने के बाद फैमिली से सपोर्ट मिला तो वेट लिफ्टर बनीं और पावर लिफ्टिंग की दुनिया में कदम रखा। आज उन्होंने अपने ही नेशनल चैम्पयिनशिप के रिकार्ड को तोड़कर 225 किलो वेट का नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

शादी के बाद बिजनेस सपोर्ट के लिए छोड़ा सीए का करियर

पारूल सिंघल के पिता गाजियाबाद के राजनगर सेक्टर आठ मे रहते हैं। उनकी स्कूलिंग होली चाइल्ड स्कूल और ग्रुजेएशन इन्द्रप्रस्थ कॉलेज से पूरी हुई है। सीए की पढ़ाई के दौरान शादी होने के बाद उन्होंने पति विकास सिंघल के एक्सपोर्ट बिजनेस को सपोर्ट किया। इस दौरान उन्हें एक बेटा और बेटी हुई तो सीए की पढ़ाई को बीच में ही छोड़ दिया। सात साल तक बिजनेस में सपोर्ट करने बाद फिर से स्पोट्समैन बनने की अलख जगी। इसके बाद खुद को पावर लिफ्टर के तौर पर स्थापित किया।

शादी के बाद 44 साल की उम्र में बनाया रिकार्ड

शादी के बाद पारूल के एक बेटा (13) और बेटी (20) साल की है। खुद उनकी उम इस समय 44 साल की है। इस उम्र में पारूल सिंघल ने 225 किलो हैवी वेट में नेशनल पावर लिफ्टिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने अपने ही नेशनल के रिकार्ड 197 किलो को तोड़ा है। इससे पहले 2017 जम्मू में वे नेशनल चैम्पियन, 2018 में दिल्ली स्टेट चैम्पियन रही हैं। यहां उन्हें स्ट्रांग वूमेन का खिताब भी मिला। बुधवार को उन्होंने कोयम्बटूर में हुई नेशनल पावर लिफ्टिंग चैम्पियनशिप में नया रिकार्ड बनाया है। वे कई बार के नेशनल चैम्पियन रहे प्रदीप यादव से पावर लिफ्टिंग के गुर सीख रही हैं।

महिलाओं और युवतियों के लिए संदेश

पावर लिफ्टर पारूल सिंघल का कहना है कि वे 35 की उम्र के बाद इस लाइन में आई। आज शादी और दो बच्चों की मां होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। इसलिए शादीशुदा महिलाओं को कहना चाहती हैं कि कभी भी देर नहीं होती अपने सपनों से हार नहीं माननी चाहिए। उनको पूरा करने की ललक को मन में रखकर आगे बढ़ना चाहिए।

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