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Person of The week: बचपन में दादा की सीख से प्रेरणा लेकर पेड़ों को बचाने का शुरू किया अभियान, अमेरिका ने दी ग्रीन मैन की उपाधि

Highlights अब तक 15 लाख पेड़ों का बचा चुके हैं ग्रीन मैन पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दूल कलाम भी कर चुके है सम्मानित अब तक अनगिनत लगा चुके हैं पौधे, पेड़ों के लिए कर रह यूआईडी की मांग

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गाजियाबाद। बचपन में दादा के साथ जाते समय पेड़ को कटते देखा तो उसमें से पानी निकल रहा था। इसकी वजह पूछने पर दादा जी ने बताया कि यह पेड़ के आंसू है। वह रो रहा है। बस यही बात जहन में ऐसी बैठी की विजय पाल बघेल ग्रीन मैन के मुकाम तक पहुंच गये। इतना ही नहीं अब तक लाखों पौधे लगाने के साथ ही करीब 15 लाख पेड़ों को बचा चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित करने पर उन्हें ऐसी बात कही गई। जिसके बाद उन्होंने अपने कपड़े भी बदल लिये। जी हां हम पत्रिका आप को मिलवाने जा रहा है विजय पाल बघेल से, जिन्हें गाजियाबाद में ग्रीन मैन के नाम से जाना जाता है।

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दादा की एक बात ने कराया ऐसा असर की आज बन गये ग्रीन मैन

विजय पाल बघेल बताते है कि जब वह पांचवीं कक्षा में पढ़ते थे तो एक बार अपने बाबा के साथ कही जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक गांव से गुजरते समय देखा कि तीन लोग गूलर का पेड़ काट रहे थे। इस पेड़ में पानी टपक रहा था। जब मैंने अपने दादाजी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि चोट लगने से पेड़ रो रहा है। ऐसा सुनते ही मुझ पर इसका गहरा असर पड़ा। इसके बाद मैं रोते हुए उस पेड़ से लिपट गया और तब तक पेड़ नहीं छोड़ा जब तक उसे काटने वाले लोग बिना पेड़ काटे वहां से चले नहीं गए। इसके बाद से ये सिलसिला चल पड़ा जो आज तक जारी है।

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15 लाख पेड़ों को बचा चुके हैं बघेल

विजय पाल बताते हैं कि अब तक वह करीब 15 लाख पेड़ों को कटने से बचा चुके हैं। इसके साथ ही वह देशभर में अनगिनत पौधे रोपण चुके हैं। यूनेस्को के बुलावे पर आज से 19 साल पूर्व वर्ष 2000 में विजय पाल अमेरिका में पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां तब के अमेरिकी उपराष्ट्रपति अल गोर ने उन्हें क्लाइमेट लीडर्स संगठन में शामिल कर ग्रीन मैन ऑफ इंडिया की उपाधि से नवाजा था। इसी के बाद से उन्हें ग्रीन मैन के नाम से जाना जाने लगा।

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पेड़ बचाने के लिए देश भर में चला रहे हैं कई अभियान

ग्रीन मैन ने बताया कि उन्होंने देशभर में पेड़ बचाने के लिए कई अभियान चलाए हैं। इनमें मेरा वृक्ष योजना, ऑपरेशन ग्रीन, ग्लोबल ग्रीन मिशन, पेड़ लगाएं सेल्फी भेजें, मेरा पेड़-मेरी शान और मिशन सवा सौ करोड़ शामिल हैं। उनके मुताबिक देश के 724 जिलों में ग्लोबल ग्रीन पीस मिशन के तहत उनकी इकाई काम कर रही हैं। ग्रीन मैन ने बताया कि जहां कैनेडा समेत दूसरे देशों में एक आदमी पर एक से डेढ़ लाख पेड़ है। वहीं अपने देश में एक आदमी पर सिर्फ 28 पेड़ है। यह बहुत ही चिंताजनक है।

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पेड़ों के लिए यूआईडी नंबर की कर रहे मांग, मिल चुके हैं कई अवॉर्ड

ग्रीन मैन को अब तक हरित ऋषि, हिमालय भूषण, जेपी अवार्ड, ग्रीन मैन जैसे अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं। वहीं अब उनकी मांग है कि पेड़ों को भी जीवित प्राणी का दर्जा दिया जाए और सम्मान मिले। उन्होंने मांग की है कि राष्ट्रीय वृक्ष नीति के तहत पेड़ों के लिए यूआईडी नंबर हो, राष्ट्रीय वृक्ष बरगद को अन्य प्रतीकों की तरह ही सम्मान मिले।