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बंदियों ने ठुकराया सरकार का प्रस्ताव, बोले- पैरोल पर रिहाई नहीं चाहिए, जेल बाहर कोरोना का खतरा

गाजियाबाद डासना जेल में बंद बंदियों ने बाहर कोरोना संक्रमण बताते हुए विशेष पैरोल पर रिहा होने से किया इनकार

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
गाजियाबाद. 2020 की तरह ही इस साल भी कोरोना संक्रमण को देखते हुए उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद कुछ बंदियों को पैरोल पर छोड़ा जा रहा है, लेकिन प्रदेश के 21 बंदियों ने यह कहते हुए पैरोल को अस्वीकार कर दिया है कि वह जेल में महफूज हैं। बाहर गए तो कोरोना वायरस (Coronavirus) की चपेट में आ सकते हैं। इन्हीं में गाजियाबाद के डासना स्थित जिला कारागार में बंद चार बंदी भी शामिल हैं, जिन्होंने पैरोल स्वीकृति के बावजूद जेल से बाहर जाने से साफ-साफ मना कर दिया है। जेल अधीक्षक आलोक सिंह के मुताबिक, बंदियों का कहना है कि कोरोना महामारी के इस दौर में जेल ज्यादा महफूज स्थान है। इसलिए वह जेल से बाहर नहीं जाना चाहते हैं। जेल अधीक्षक ने चारों बंदियों के पैरोल पर नहीं जाने की सूचना सरकार को भेज दी है।

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उल्लेखनीय है कि कोर्ट के आदेश पर कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार ने 2020 में सैकड़ों बंदियों को पैरोल पर छोड़ा था, जिनमें से कुछ बंदी समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जेल नहीं लौटे थे। वहीं, 2021 में भी कोरोना संक्रमण के चलते सरकार ने जेलों में बंद बंदियों की संख्या कम करने के लिए 60 दिन की विशेष पैरोल देने का फैसला लिया था। इसमें उन बंदियों को शामिल किया गया, जिनकी सजा सात सल तक है और 65 वर्ष से अधिक उम्र के दोषसिद्ध बंदी हैं। इसी कड़ी में डासना जिला जेल में बंद 7 सौ बंदियों की सूची जिला न्यायाधीश हापुड़ और गाजियाबाद को भेजी गई। इसके अलावा 13 महिलाओं सहित कुल 84 दोषसिद्ध बंदियों को विशेष पैरोल पर छोड़ने के लिए यूपी सरकार को लिस्ट भेजी गई है। जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि अब तक 750 विचाराधीन बंदियों को 60 दिन की अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया है। इसके साथ ही 54 दोषसिद्ध बंदी भी छोड़े गए हैं।

इन बंदियों ने किया पैरोल पर जाने से इनकार

आलोक सिंह का कहना है कि लुधियाना के अशोक सहगल, गाजियाबाद निवासी भीमा, अलीगढ़ निवासी महीपाल सिंह और शामली के रहने वाले बिजेंद्र को भी 60 दिन की पैरोल पर छोड़ा जाना था, लेकिन चारों बंदियों ने पैरोल पर जाने से साफ मना कर दिया है। इन चारों बंदियों का कहना है कि कोरोना वायरस बाहर तेजी से फैल रहा है। लाखों लाेग कोरोना संक्रमण से जान गंवा चुके हैं। इसलिए वह जेल में ज्यादा महफूज हैं। बाहर जाने पर उनकी जान को भी खतरा है। आलोक सिंह ने बताया कि इन चारों के पैरोल नहीं लेने की सूचना सरकार को भेज दी गई है। जबकि अन्य तीन बंदियों की पैरोल का प्रस्ताव सरकार के पास लंबित है।

पिछले साल छोड़े सात बंदी आज तक नहीं लौटे वापस

बता दें कि जेल में बंदियों का खास ख्याल रखा जा रहा है। बंदियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के कई स्तर पर कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही बंदियों को इम्युनिटी बढ़ाने वाला खाना परोसा जा रहा है। हालांकि इसके बावजूद सौ से ज्यादा बंदी संक्रमित हो चुके हैं। फिलहाल केवल दो बंदी ही जेल में संक्रमित हैं। उन्हें जेल में अलग से आइसोलेट किया गया है। जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष भी 66 बंदी पैरोल पर रिहा हुए थे। इनमें से सात बंदी पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद भी आज तक वापस नहीं लौटे हैं।

मेरठ में भी कैदी ने पैरोल का प्रस्ताव ठुकराया

वहीं, मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में भी एक कैदी ने विशेष पैरोल पर रिहा होने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। कैदी का कहना है कि जेल से बाहर नहीं जाऊंगा, बाहर कोरोना संक्रमण का खतरा है। जबकि जेल में उसका जीवन असुरक्षित है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. बीडी पांडे ने बताया कि आशीष ने पैरोल पर रिहा होने से साफ मना कर दिया है। इसके पीछे का कारण उसने जेल की कोरोना से जुड़ी व्यवस्था को बताया है। उन्होंने आशीष का लिखित पक्ष सरकार को भेज दिया है।

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