
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने कहा- मैंने प्रोटोकॉल तोड़कर उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती से मांगी थी मदद
गाजियाबाद. जम्मू-कश्मीर के लोगों को मारकर जन्नत नहीं मिल सकती, लेकिन शांति दूत बनें तो जीते जी जन्नत मिल सकती है। अगले छह माह में कश्मीर की सूरत और बदल जाएगी। उक्त बातें जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satya Pal Malik) ने गाजियाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मैं राज्यपाल के प्रोटोकोल का परवाह किए बगैर राज्य में बेहतर कानून व्यवस्था बनाने और तरक्की के लिए पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की मदद मांगने के लिए व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलने उनके निवास पर गया था। हम राज्य में आतंकवाद का सफाया कराने के बाद ही दम लेंगे। राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब पूरा परिदृश्य अलग है। ग्रामीण भी अब आतंकवादियों को शरण देने के बजाय सुरक्षाबलों और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कराने में मदद करने लगे हैं।
बता दें कि शनिवार को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक गाजियाबाद के जावली गांव में एक निजी कार्यक्रम शिरकत करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि आतंकियों को हथियार रखकर खाना खाने का न्योता दिया। उन्होंने आतंकियों से कहा कि तुम्हें मरने के बाद जन्नत मिलने के नाम पर बरगलाया जा रहा है। कश्मीर के युवाओं को अगर पढ़ाई की ओर मोड़ दिया जाए तो वे गलत दिशा में जाने से बच सकते हैं। मलिक ने कहा कि आतंकवाद (व्यक्ति के) 'दिमाग' में है न कि बंदूकों में और उनकी प्राथमिकता राज्य में आतंकवादियों का नहीं, बल्कि आतंकवाद का सफाया कराना है।
राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब पूरा परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। वहां के ग्रामीण अब आतंकवादियों को शरण देने के बजाय सुरक्षाबलों और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कराने में मदद करते हैं। यही वजह है कि इस बार निकाय चुनाव में कोई हिंसा नहीं हुई। लोगों का रुख आतंकवाद से हट रहा है। उन्होंने दावा किया कि कश्मीर का कोई युवा पिछले चार माह के दौरान किसी आतंकी संगठन में शामिल नहीं हुआ है। मलिक ने कहा कि भारत की फौज एक माह में आतंकियों को खत्म करने में सक्षम है, लेकिन आतंकवाद गोलियों से नहीं बल्कि प्रेम से ही खत्म किया जा सकता है।
Published on:
16 Dec 2018 09:28 am
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