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MP-MLA कोर्ट में माफिया: ब्रजेश सिंह बनाम मुख्तार अंसारी, सबसे पहले किसके हक में आएगा फैसला?

पूर्वाञ्चल के दो बड़े माफियाओं का फैसला अब जल्द ही एमपी एमएलए कोर्ट से होने वाला है, जिसमें मुख्तार अंसारी की ओर से जमानत के लिए दी गई अर्जी पर फिलहाल सुनवाई नहीं हो सकी है। वहीं ब्रजेश सिंह भी एक बार फिर से पूर्वाञ्चल में अपना दम दिखाने की तैयारी कर रहे हैं।  

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File Photo of Mafia Mukhtar Ansari and Brajesh Singh

File Photo of Mafia Mukhtar Ansari and Brajesh Singh

गाज़ीपुर की एमपी एमएलए कोर्ट में आज पूर्व एमएलसी और यूपी के बाहुबलियों में शुमार बृजेश सिंह जमानत मिलने के बाद आज दूसरी बार अपने वकीलों के साथ भारी पुलिस सुरक्षा में पेश हुए, इस दौरान उनके खिलाफ मुकदमें का अहम गवाह मुख्तार अंसारी का ड्राइवर रमेश राम भी पुलिस सुरक्षा में एमपी एमएलए कोर्ट में पेश हुआ। इस दौरान वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से त्रिभुवन सिंह भी मौजूद रहे। दरअसल पूरा मामला हाई प्रोफाइल है।

बात 15 जुलाई 2001 की है। मोहम्मदाबाद के उसरी चट्टी पर मुख्तार अंसारी के काफिले पर माफिया बृजेश सिंह के गैंग ने हमला बोल दिया था। दोनो तरफ से चली गोली में 3 लोगों की मौत हुई थी। आज उसी मामले में गाजीपुर की एमपी एमएलए कोर्ट में माफिया बृजेश सिंह की पेशी हुई और माफिया त्रिभुवन वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए थे।

जिसमे माफिया बृजेश सिंह, माफिया त्रिभुवन सिंह समेत अन्य 15 लोग आरोपी है। गाजीपुर के चर्चित उसरी कांड का चश्मदीद मुख्य गवाह व मुख्तार अंसारी का ड्राइवर रमेश राम भी पुलिस अभीरक्षा में एमपी एमएलए कोर्ट में पेश हुआ। कोर्ट में जिरह के दौरान गवाह रमेश राम ने आरोपी के पहचानने की बात की। लेकिन सरकारी वकील के द्वारा आरोपियों के पहचानने की बात नहीं की गई। जिसके बाद पहचान के लिए एक प्रार्थना पत्र दिया गया है। फिलहाल मामले में जिरह जारी करते हुए अगली तारीख 13 सितंबर कोर्ट के द्वारा मुकर्रर की गई है।

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मामले में मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता लियाकत अली ने कहा कि उसरी कांड के मुख्य गवाह रमेश राम की पुलिस अभिरक्षा में पेशी हुई है। जिसमे सरकारी वकील के जिरह जारी करते हुए अगली तारीख 13 सितंबर को कोर्ट द्वारा मुकर्रर की गई है। उन्होंने मुख्य गवाह के पुलिस अभिरक्षा में हुई पेशी को लेकर कहा कि पिछली तारीख में गवाह रमेश राम ने न्यायालय से सुरक्षा की गुहार लगाई थी।

जिसपर न्यायालय ने रमेश राम को थाने में सुरक्षा देने का आदेश जारी किया गया था। लेकिन मोहम्मदाबाद थाने की पुलिस द्वारा बंदी की तरह व्यवहार की जा रहा था। न तो उनकी पत्नी, बच्चों और उनके अधिवक्ता से मिलने दिया जा रहा था। आज पेशी के दौरान न्यायालय ने गवाह रमेश राम को उनके घर पर रहने और सुरक्षा देने का आदेश दिया गया है। वहीं उन्होंने बताया कि सरकारी वकील के द्वारा घटना के आरोपियों की पहचान के लिए पूछा गया। जिसपर गवाह ने पहचानने की बात कही गई। लेकिन सरकारी अधिवक्ता के द्वारा आरोपियों की पहचान नहीं कराई गई। जिसके संबध में प्रार्थना पत्र दिया गया है।

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वहीं एडीजीसी क्रिमिनल नीरज श्रीवास्तव ने भी आज कोर्ट करवाई में गवाह रमेश राम के गवाही की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले में जिरह जारी है अगली तारीख 13 सितंबर सुनवाई मुकर्रर की गई है। वहीं घटना के आरोपियों की पहचान कराने की बात पर कहा कि एक प्रार्थना पत्र दिया गया है। जो खारिज हो आएगा। वही गवाह के सुरक्षा के बाबत बताया कि गवाह द्वारा सुरक्षा की बात कही गई है जो न्यायालय द्वारा घर पर सुरक्षा दी जाएगी और सुरक्षा की जिम्मेदारी मरदह थाने को दी गई है।