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गाजीपुर: घर पहुंचा जवान अखिलेश पाल का पार्थिव शरीर, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

जिला प्रशासन की तरफ से पूरे राजकीय सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार किया गया, 29 जून को इलाज के दौरान हुई थी मौत

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Martyr akhilesh pal

शहीद अखिलेश पाल

गाजीपुर. जिले की धरती वीर सपूतों की धरती के नाम से भी जाना जाता है, ग़ाज़ीपुर में ही एशिया का सबसे बड़ा गांव गहमर है, जहां हर घर में एक सैनिक है जो देश सेवा में लगे हुए है। जब भी देश की आन बान शान की बात आती हो या बार्डर पर देश की रक्षा की बात आती हो उसमें ग़ाज़ीपुर का लाल जरूर हिस्सेदारी करता है। चाहे कारगिल की जंग हो या आतंकी मुठभेड़ हो हर वक्त ग़ाज़ीपुर का लाल अपने मातृभूमि की रक्षा अपने प्राणों को न्यौयछावर करने से पीछे नहीं रहता है।

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गाजीपुर के मनिहारी ब्लॉक के छिड़ी गांव का रहने वाला जवान अखिलेश पाल जो 2010 में अरुणाचल प्रदेश मैं आर्मी के बीआरओ ग्रुप में भर्ती हुए थे, कुछ दिनों पूर्व इनकी तबीयत खराब हुई, और इनका आर्मी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान पता चला कि अखिलेश पाल को ब्रेन ट्यूमर है । जिसके बाद आर्मी अस्पताल से एम्स दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया था, जहां इलाज के दौरान 29 जून को इनका निधन हो गया था। घटना की जानकारी के बाद परिवार समेत पूरे गांव में शोक छा गया। जवान अखिलेश का पार्थिव शरीर सोमवार को पैतृक गांव छिड़ी लाया गया। वहीं ग्रामीणों ने जवान के पार्थिव शरीर आने की सूचना जिला प्रशासन समेत जवान के यूनिट को भी दिया गया। वहीं जब जवान के पार्थिव शरीर आने की सूचना जब जिला प्रशासन को हुई तो आनन फानन में जखनिया तहसील के एसडीएम, सीओ और तहसीलदार समेत अन्य पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गये, जहां जिला प्रशासन की तरफ से पूरे राजकीय सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार गाजीपुर के श्मशान घाट पर किया गया। इस दौरान जिला प्रशासन की तरफ से तहसीलदार एसडीएम और क्षेत्राधिकारी मौजूद रहे और जवान को जिला प्रशासन की तरफ से श्रद्धांजलि भी अर्पित किया। बता दें कि जवान अखिलेश पल का एक बेटा आदित्य, और एक बेटी आराध्या है।

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ग्राम प्रधान संतोष यादव ने बताया कि उनकी पत्नी की मांग है कि उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाए क्योंकि इनकी मौत ड्यूटी के दौरान हुई है जिसके लिए जवान के परिजनों के साथ ग्राम प्रधान जिलाधिकारी को मांग पत्र भी सौपेंगे।

BY- ALOK TRIPATHI

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