
गोण्डा. बीते एक दशक से धान खरीद के नाम पर अन्नदाता अपने को ठगा महसूस कर रहा है। धान की खरीद एक बार फिर 62 व 67 के फेरे में फंस गयी है। यही कारण है कि खरीद शुरू होने के सप्ताह बाद भी 95 प्रतिशत क्रय केन्द्रों पर खरीद शुरू नहीं हो सकी। ऐसे में खरीद न हो पाने की सम्भावनाएं बलवती होती नजर आ रही हैं।
जिले में धान खरीद करने के लिए चार क्रय संस्थाओं के माध्यम से 66 धान क्रय केन्द्र खोले गये थे। इन केंद्रों पर एक नवम्बर से धान खरीद की जानी थी, लेकिन एक सप्ताह बाद 95 प्रतिशत क्रय केन्द्रों पर खरीद नहीं हो सकी। वैसे तो सूबे व केन्द्र दोनों सरकारें किसानों की आय को दोगुनी करने का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन योगीराज में भी किसान बिचैलियों के हाथ धान बेचने को विवश है। यह हाल तब है जब किसानों को खरीफ की फसल बेचकर रबी की बुवाई करना है। मिलर्स किसी भी कीमत पर 67 प्रतिशत चावल देने की शर्त पर धान की कुटाई करने को तैयार नहीं यह अलग बात है।
खाद्य एवं विपणन विभाग द्वारा मिलों को नामित कर दिया गया है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि जब तक चावल की रिकवरी 62 प्रतिशत नहीं होगी, प्रशासन व मिलर्स के बीच में नूराकुश्ती चलती रहेगी। इस नूराकुश्ती का फायदा बिचौलिए पूरी तरह से उठा रहे हैं। कड़ी मेहनत के बाद तैयार धान की फसल को किसान औने-पौने दामों में बेच रहे। हालत यह है कि बिचैलिए 1000 से लेकर 1100 रुपये तक धान की खरीद कर रहे हैं। जब तक मिलर्स शासन व प्रशासन अपनी ताल बैठायेंगे तब तक किसानों के पास धान रह ही नहीं जायेगा। फिर मिलर्स व केन्द्र प्रभारियों द्वारा कागजों में आंकड़ों की बाजीगरी कर खरीद कागजों में हो जायेगी। जैसा कि एक दशक से होता चला आ रहा। सपा शासन काल में इस बात के आरोप लगते रहे कि केन्द्र सरकार राइस मिल के रिकवरी में संसोधन नहीं कर रही, जिससे खरीद नहीं हो पा रही है। किसानों का तर्क है कि इस बार भी वही हाल है, जब केन्द्र व प्रदेश दोनों में भाजपा की सरकार है।
धान व बोरा दोनों उपलब्ध फिर भी नहीं हो रही खरीद
धान क्रय केन्द्र की जमीनी हकीकत देखने के लिए इस संवाददाता ने विकास खण्ड कटरा के अहियाचेत के सरकारी समिति धान क्रय केन्द्र का जायजा लिया। यहां पर सारी व्यवस्था चाक चौबन्द होने के बाद भी एक छटाक धान की खरीद नहीं की गयी। बैनर क्रय केन्द्र की शोभा बढ़ा रहे हैं। क्रय केन्द्र प्रभारी सुखराम सोनकर का कहना है कि राइस मिले धान लेने को तैयार नहीं हैं, इसलिए खरीद नहीं किया जा रहा है। झौहना के प्रभारी नीरज तिवारी का कहना है कि जब तक मिलर्स तैयार नहीं होंगे तब तक धान खरीद पाना सम्भव नहीं होगा।
छलका किसानों का दर्द
दुबहा बाजार निवासी किसान शिव बहादुर का कहना है कि एक तरफ सरकार किसानों की आय को दोगुना करने की बात कर रही है। वहीं हम लोगों का धान समर्थन मूल्य के तहत नहीं बिक पा रहा है। हम लोग औने - पौने दाम में धान बेचने को विवश है। किसान बलराम यादव का कहना है कि सरकार किसानों को सिर्फ जुबान से सब कुछ दे रही है। हकीकत कुछ और है। जब किसानों का धान समाप्त हो जायेगा तब व्यापारियों से खरीद कर कागज का कोरम पूरा कर दिया जायेगा।
जिले में घट रही राइस मिलों की संख्या
जिले में राइस मिलो की संख्या लगातार घट रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि बीते एक दशक से राइस मिलें सरकारी धान की नाम मात्र कुटाई कर रहीं 67 प्रतिशत चावल देने की शर्त पर मिलों को घाटा हो रहा है। यही कारण है कि 2012 के दशक में जिले में करीब 55 राइस मिलें थीं, जिनकी संख्या घटकर अब एक दर्जन के आस पास रह गयी है।
कहते हैं जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
धान की खरीद न होने के संदर्भ में जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी अजय विक्रम सिंह ने दावा किया कि एक नवम्बर से क्रय केन्द्र सक्रिय है। अब तक 67 केन्द्रों को मिलाकर 26 कुण्टल की खरीद की गयी। सभी केन्द्रों पर धन व बोरा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। लेकिन साहब के दावे ही खुद हकीकत बयां कर रहे हैं।
वीडियो में देखें- क्या बोले अजय विक्रम सिंह, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
Published on:
08 Nov 2017 01:42 pm
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