
गोण्डा. जिला स्तरीय सलाहकार/समीक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी जेबी सिंह ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की समीक्षा के दौरान सामने आया कि जनवरी 2017 से दिसम्बर 2017 के दौरान 26342 किसानों के केसीसी बनाये गये, जबकि लक्ष्य 26342 किसानों का क्रेडिट कार्ड बनाया गया था। केसीसी के तहत बैंकों ने इस समयाविधि के दौरान 51797.81 लाख रुपये का लोन दिया गया। बैंकों द्वारा लक्ष्य न पूरा कर पाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सभी बैंक किसानों का केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) बनाना शुरू कर दें। उद्योग आदि लगाने के लिए लम्बित लोन के आवेदनों को 10 दिन के अन्दर निपटाकर रिपोर्ट दें। बैठक के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कैसे हो।
जिलाधिकारी ने कहा कि फसली ऋण मोचन योजना के तहत ऑनलाइन प्राप्त शिकायतों के सम्बन्ध में बैंक अपनी स्पष्ट आख्या पांच मार्च तक हर हाल में दे दें, ताकि पात्र किसानों को किसान कर्जमाफी योजना का लाभ दिया जा सके। जिलाधिकारी ने बैंक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सब किसानों, उद्यमियों की फाइलों को कतई न लम्बित न रखें तथा आवेदनों के सम्बन्ध पात्रता व अपात्रता का कारण स्पष्ट करते हुए स्वीकृति अथवा निरस्तीकरण की कार्यवाही करें, ताकि किसान व उद्यमी कतई परेशान न हों।
इन योजनाओं की हुई समीक्षा
जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने बैंकवार ऋण जमा अनुपात, वार्षिक ऋध योजना 2017-18 की प्रगति, एनुअल ऑडिट पलन 2017-18, प्राथमिकता क्षेत्र एवं कमजोर वर्गों को ऋण वितरण की समीक्षा, जनपद में बैंक शाखाओं के विस्तार, किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं स्टैण्ड अप इंण्डिया की प्रगति तथा रोजगार हेतु बैंकों द्वारा ऋण देने की समीक्षा की।
बैकों को दिये ये निर्देश
कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय सलाहकार/समीक्षा समिति की बैठक में डीएम जेबी सिंह ने इस बात पर भी चर्चा की कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कैसे हो। उन्होंने बैंकों को निर्देश देते हुए कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार की तमाम लाभार्थीपरक योजनाओं के लम्बित आवेदनों को 10 दिन के अंदर निस्तारित किया जाये, ताकि किसानों और उद्यमियों को कोई दिक्कत न हो। बैंक इसकी रिपोर्ट की प्रतिलिपि जिला अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और संबंधित को देना सुनिश्चित करें।
वर्ष 2018-19 के लक्ष्य पर भी हुई चर्चा
समीक्षा बैठक में वार्षिक ऋण योजना 2018-19 के निर्धारण पर विचार करते हुए कृषि, उद्यान, वानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण आदि को बढ़ावा देने पर निर्णय लिया गया। इसी प्रकार आरसेटी के माध्यम से ग्रामीण अंचल के लोगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण निःशुल्क दिलाने तथा प्रशिक्षण के उपरान्त उन्हें आत्मनिर्भर एवं रोजगार शुरू करने के लिए बैंक से सहायता दिलाने पर भी चर्चा की गई।
सामने आई बैंकों की लापरवाही
समीक्षा में ज्ञात हुआ कि बैंकों के स्तर पर तमाम विभिन्न योजनाओं के तहत स्वरोजगार, उद्यम, केसीसी तथा अन्य कई प्रकार के आवेदन काफी संख्या में लम्बित हैं, जिनके सम्बन्ध में बैंकों द्वारा कोई कार्यवाही न करते हुए आवेदन लम्बित हैं। जिलाधिकारी ने प्रकरण का संज्ञान लेते हुए सभी बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए हें कि वे सब आवेदनों की पात्रता की जांच कर अतिशीघ्र पात्र आवेदको को ऋण उपलब्ध करा दें तथा अपात्र आवेदकों को भी उनका आवेदन निरस्त किए जाने की सूचना व कारण भी बता दें।
Published on:
27 Feb 2018 01:52 pm
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