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डीएम की भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज, सचिव पर गिर सकती गाज

Gonda Panchayat Scam: गोंडा की देवरियाकला ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग पर डीएम प्रियंका निरंजन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में सड़क और ह्यूम पाइप निर्माण में अनियमितता मिलने पर ग्राम प्रधान निर्मला देवी के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए हैं। पंचायत सचिव पर भी विभागीय कार्रवाई की तैयारी है।

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डीएम प्रियंका निरंजन फाइल फोटो सोर्स विभाग

डीएम प्रियंका निरंजन फाइल फोटो सोर्स विभाग

गोंडा जिले की देवरियाकला ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जांच में सड़क और ह्यूम पाइप निर्माण में भारी अनियमितता मिलने पर डीएम प्रियंका निरंजन ने ग्राम प्रधान निर्मला देवी के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए। मामले में पंचायत सचिव पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिससे जिले में हड़कंप मच गया है।

गोंडा जिले की देवरियाकला ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में गड़बड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला उजागर होने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने ग्राम प्रधान निर्मला देवी के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं। इसके साथ ही संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत के रहने वाले अखिलेश तिवारी ने करीब डेढ़ साल पहले प्रशासन से शिकायत की थी कि गांव में सड़क निर्माण और ह्यूम पाइप लगाने के कार्य में बड़े स्तर पर अनियमितता की गई है। शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए मुख्य कोषाधिकारी और जल निगम के अधिशासी अभियंता की संयुक्त टीम गठित की थी।

दो अधिकारियों की समिति करेगी जांच

जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अभिलेखों में विकास कार्य पूरा दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया। जबकि मौके पर लगभग 134 मीटर लंबा ह्यूम पाइप लगाया ही नहीं गया था। आरोप है कि बिना कार्य कराए ही सरकारी राशि खर्च दिखा दी गई। इसके अलावा पंचायत भवन की मरम्मत के नाम पर भी भुगतान किए जाने की शिकायतों की जांच अभी जारी है।
जांच पूरी होने के बाद प्रशासन ने ग्राम प्रधान से स्पष्टीकरण मांगा था। लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद डीएम ने उनके अधिकार सीज करने का आदेश जारी कर दिया। मामले की अंतिम और विस्तृत जांच के लिए जिला उद्यान अधिकारी और सरयू नहर खंड-दो के अधिशासी अभियंता को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पंचायत में त्रिस्तरीय कमेटी गठित करने के आदेश

वहीं, पंचायत के विकास कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए प्रशासन ने खंड विकास अधिकारी के माध्यम से त्रिस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव भी मांगा है। यह समिति फिलहाल पंचायत के कार्यों की निगरानी और संचालन करेगी। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले में पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच जारी रही तो कई और मामलों का खुलासा हो सकता है।

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