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Prithvinath Temple: 5.5 फीट ऊपर, 64 फीट जमीन के अंदर है शिवलिंग, पांडवों से जुड़ा मंदिर का रहस्य

Prithvinath Temple: पृथ्वीनाथ मंदिर गोंडा के खरगूपुर में स्थित प्रसिद्ध शिवधाम है। यहां करीब साढ़े 5 फीट ऊंचा शिवलिंग दिखाई देता है। जबकि मान्यता है कि इसका 64 फीट हिस्सा जमीन के अंदर है। पांडवों से जुड़ी इस मंदिर की प्राचीन कहानी कजली तीज, महाशिवरात्रि और सावन में उमड़ने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ इसे खास बनाती है।
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Prithvinath temple

पृथ्वीनाथ मंदिर पर जलाभिषेक करते लोग फोटो सोर्स पत्रिका

Prithvinath Temple: गोंडा से करीब 30 किलोमीटर दूर खरगूपुर के पास स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां स्थापित विशाल शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि इसकी स्थापना पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान की थी। बताया जाता है कि शिवलिंग जमीन के अंदर करीब 64 फीट तक है। जबकि ऊपर इसका करीब साढ़े पांच फीट हिस्सा दिखाई देता है। सावन और कजली तीज पर यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।

गोंडा जिले के खरगूपुर कस्बे के पास स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं और विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पांडव अज्ञातवास के दौरान अपनी मां कुंती के साथ इस क्षेत्र में रहे थे। कहा जाता है कि उस समय इलाके के लोग एक ब्रह्म राक्षस के आतंक से परेशान थे। भीम ने उसका वध कर लोगों को भय से मुक्ति दिलाई। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन में पांडवों ने भगवान शिव की उपासना की और भीम ने यहां विशाल शिवलिंग की स्थापना की।

जमीन के अंदर 64 फीट तक है शिवलिंग

पृथ्वीनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग की विशालता इसे दूसरे शिव मंदिरों से अलग बनाती है। धार्मिक मान्यताओं मंदिर से जुड़ी जानकारी के अनुसार शिवलिंग का करीब साढ़े पांच फीट हिस्सा जमीन के ऊपर दिखाई देता है। जबकि इसका बड़ा हिस्सा जमीन के अंदर है। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार शिवलिंग जमीन के अंदर करीब 64 फीट तक है। इसी वजह से इसे एशिया के सबसे बड़े शिवलिंगों में शामिल बताया जाता है।

सपने में मिला मंदिर बनाने का संकेत

मंदिर के नाम को लेकर भी एक रोचक मान्यता है। बताया जाता है कि खरगूपुर के राजा गुमान सिंह की अनुमति से पृथ्वी सिंह यहां मकान बनाने के लिए जमीन की खुदाई करवा रहे थे। इसी दौरान एक रात उन्हें सपने में जमीन के नीचे सात खंडों में शिवलिंग होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने उस स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया। तभी से यह स्थान पृथ्वीनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

सावन में पहुंचते लाखों श्रद्धालु

पृथ्वीनाथ मंदिर में सामान्य दिनों में भी भक्तों की आवाजाही रहती है। लेकिन सावन में यहां का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। सोमवार और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। हरितालिका तीज (कजली तीज) के अवसर पर भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कर्नलगंज क्षेत्र की सरयू नदी से श्रद्धालु पैदल नंगे पैर कांवड़ या जल लेकर मंदिर पहुंचते हैं। कजली तीज के अवसर पर श्रद्धालुओं की संख्या इतनी बढ़ जाती है कि प्रशासन को भीड़ संभालने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ती है। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। इसके लिए कई जिले की फोर्स लगाई जाती है।

5 से 6 किलोमीटर तक करनी पड़ती है बैरिकेडिंग

मंदिर के पुजारी जगदंबा प्रसाद तिवारी के अनुसार सावन, महाशिवरात्रि और कजली तीज जैसे अवसरों पर मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ होती है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को करीब 5 से 6 किलोमीटर तक बैरिकेडिंग करनी पड़ती है। पृथ्वीनाथ मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपनी प्राचीन कहानी और विशाल शिवलिंग के कारण भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है। सावन में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।