3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बिल गेट्स फाउंडेशन और टाटा ने बनाया अस्पताल, मशीनें खरीदने को दिए 200 करोड़, लेकिन सरकार टेक्नीशियन ही नहीं रख पायी

-16 वेंटीलेटर अभी तक अनपैक ही नहीं हुए, नहीं हैं टेक्नीशियन- पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था उद्घाटन
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

गोंडा

•

image

Hariom Dwivedi

•

Updated: 24 Apr 2021, 2:03 PM IST

bill gates foundation and Tata trust

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
गोंडा. कोरोना की दूसरी लहर ने तबाही मचा रखी है। कहीं ऑक्सीजन की कमी से लोग मर रहे हैं तो कहीं मरीजों के लिए बेड ही नहीं है। आनन-फानन में अस्थायी बेड और चिकित्सीय उपकरण खरीदने की बात हो रही है। मरीजों के बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गयी हैं। इस बीच कई जिलों से यह खबरें भी आ रही हैं कि अस्पताल हैं, मशीनें हैं लेकिन, न तो डॉक्टर हैं और न हीं मशीनों को चलाने के लिए टेक्नीशियन। उदाहरण के लिए गोंडा का कोविड अस्पताल यूपी सरकार की काहिली को समझने के लिए काफी है। इस अस्पताल का उद्घाटन पिछले साल कोविड के लिए खासतौर किया गया, लेकिन आज तक यह अस्पताल चल ही नहीं पाया।

160 बेड का है अस्पताल
मुख्यमंत्री ने पिछले साल इस अस्पताल का उद्घाटन किया था। 160 बेड के इस अस्पताल का निर्माण टाटा ट्रस्ट और बिल गेटस फाउंडेशन ने मिलकर किया है। अस्पताल में 200 करोड़ की मशीनें भी लगाई गईं हैं, यहां 16 वेंटीलेटर भी लगा दिए गए, लेकिन योगी सरकार इसमें टेक्नीशियन रखना ही भूल गई। लिहाजा, वेंटिलेटर चलाने वाला ही कोई नहीं है।

यह भी पढ़ें : यूपी में ऑक्सीजन नहीं मिलने से थम रही सांसें, हांफ रहे तीमारदार

...तो मिल जाता स्टॉफ
योगी सरकार समय रहते इस अस्पताल को उच्चीकृत कर लेवल 3 का बना देती तो इसमें वेंटिलेटर चलाने वाले स्टाफ व कर्मचारियों को रखा जा सकता और गोण्डा के साथ-साथ अन्य जिले के मरीज को इसका लाभ मिलता। लेकिन करोड़ों की मशीनें और वेंटिलेटर होने के बावजूद उसका फायदा लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

नोएडा में भी बनवाया था अस्पताल
बिल गेट्स फाउंडेशन और टाटा ट्रस्ट ने पिछले साल जुलाई में नोएडा में सेक्टर 39 में नया जिला अस्पताल बनाया था। इस अस्पताल में भी 400 बेड हैं। लेकिन अभी यहां भी पूरी तरह से स्टॉफ की नियुक्ति नहीं हो पायी है। यहां भी वेंटीलेटर के लिए 17 करोड़ दिए गए थे।

यह भी पढ़ें : सांसों की सप्लाई, जानिए ऑक्सीजन सिलेंडर की एबीसी...