
गोरखपुर। गुजरात, महाराष्ट्र से उठी जातीय हिंसा की आग में अब यूपी भी सुलगने लगा है। दिल्ली के रामलीला मैदान में भाजपा सांसद उदित राज द्वारा मनुस्मृति जलाए जाने के प्रकरण पर यूपी में विरोध शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में सीजेएम कोर्ट में परिवाद दाखिल हो गया है। एक शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने मामले को संज्ञान में लिया है।
मुख्य दंडाधिकारी की अदालत में शहर के रानीबाग पथरा के रहने वाले अवधेश कुमार मिश्र ने एक परिवाद दायर किया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता वीरेंद्र धर दुबे ने बताया कि 26 दिसम्बर 2017 को दिल्ली के रामलीला मैदान में भारतीय जनता पार्टी के सांसद उदित राज ने अपने समर्थकों के साथ मनुस्मृति को जलाया था। यह भारतीय सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ा सबसे प्राचीनतम ग्रंथ है। यह एक धर्म एवं संस्कृति से जुड़ा हुआ मामला है। लेकिन भाजपा सांसद ने उस ग्रंथ को जलाकर देश के करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहंुचाया है। इससे लाखों लोगों की धार्मिक भावना आहत हुई है। सांसद का यह कृत्य बेहद अपमानजनक व निंदनीय है। एक जनप्रतिनिधि को ऐसा करना अशोभनीय है। यह प्रकरण संज्ञेय अपराध की श्रेणी में भी आता है। कानून की नजर में यह संज्ञेय प्रकृति की आपीसी की धारा 295 व 295 क के अपराध की श्रेणी में आता है।
सीनियर एडवोकेट ने बताया कि उनके मुवक्किल ने भाजपा सांसद के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए पुलिस के अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिया था। लेकिन पुलिस विभाग ने इस मामले में कार्रवाई करने से परहेज किया। इसलिए अब न्यायालय की शरण में है।
शिकायतकर्ता अवधेश मिश्र की शिकायत को न्यायालय ने संज्ञान में लेते हुए भाजपा सांसद उदित राज के खिलाफ परिवाद दाखिल करने की अनुमति दे दी। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि न्यायालय ने पूरी बात सुनने के बाद यह परिवाद को स्वीकार कर लिया है।
Published on:
05 Jan 2018 01:38 pm
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