
आरक्षण को लेकर हाल ही में दिए गए निर्णय को लेकर विभिन्न अनुसूचित जाति, जन जाति व राजनीतिक संगठनों की तरफ से बुधवार को भारत बंद का आह्वान किया गया था। इसे लेकर पुलिस की तरफ से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।थानेदार, चौकी प्रभारी चौराहे पर सुबह से ही मुस्तैद है।
एसएसपी डा.गौरव ग्रोवर ने बताया कि एसपी सिटी को शहर,एसपी उत्तरी व दक्षिणी को अपने क्षेत्र का नोडल बनाया गया है।सीओ के साथ ही थानेदार व चौकी प्रभारी अपने क्षेत्र में सुबह से ही मुस्तैद व भ्रमणशील हैं। जबरन बंदी कराने का प्रयास करने व हुड़दंग करने वालों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।रेलवे स्टेशन, बस अड्डा के साथ ही सभी प्रमुख स्थानों पर अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी गई है। क्यूआरटी दस्ता भी बनाया गया है।
शहर में विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। आंबेडकर चौराहे से लेकर गोलघर तक पुलिस तैनात रही। एसपी सिटी केके बिश्नोई की अगुवाई में पुलिस फोर्स गस्त करती रही। जुलूस और प्रदर्शन के कारण जाम की स्थिति रही। एक लेन में वाहनों का संचालन हो सका। दोपहर साढ़े 12 बजे तक विभिन्न संगठनों के लोग प्रदर्शन करते रहे।रक्षाबंधन और मंगलवार की बंदी के बाद बुधवार को खुले बाजार में आम दिनों की तरह ही चहल पहल दिख रही है। गोलघर, घंटाघर, आर्यनगर, मोहद्दीपुर से लेकर मेडिकल रोड पर दुकानों पर लोग खरीदारी कर रहे हैं।
महेवा थोक मंडी में बुधवार को सुबह से ही खरीदारी हो रही है। चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष संजय सिंघानिया ने बताया कि फल और सब्जी मंडी सुबह से ही गुलजार हो गई थी। आम दिनों की तरह ही कारोबार हो रहा है। कस्बाई इलाकों से भी व्यापारी खरीदारी को आ रहे हैं।
वहीं चैंबर ऑफ ट्रेडर्स अनूप किशोर अग्रवाल का कहना है कि साहबगंज से लेकर खूनीपुर में थोक मंडी में बंदी का कोई असर नहीं है। आम दिनों की तहर की बिक्री है। रक्षाबंधन और मंगलवार की बंदी के बाद बाजार खुलने से व्यापारी अधिक संख्या में आए हैं। गोलघर में व्यापारी संगठन के समीर राय का कहना है कि गोलघर में बंदी का कोई असर नहीं है। कुछ संगठन प्रदर्शन करते हुए गुजरे हैं लेकिन दुकानों का बंद करने का कोई दबाव नहीं डाल रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमीलेयर को लेकर फैसला सुनाते हुए कहा था, ''सभी एससी और एसटी जातियां और जनजातियां एक समान वर्ग नहीं हैं। कुछ जातियां अधिक पिछड़ी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए - सीवर की सफाई और बुनकर का काम करने वाले।
ये दोनों जातियां एससी में आती हैं, लेकिन इस जाति के लोग बाकियों से अधिक पिछड़े रहते हैं। इन लोगों के उत्थान के लिए राज्य सरकारें एससी-एसटी आरक्षण का वर्गीकरण (सब-क्लासिफिकेशन) कर अलग से कोटा निर्धारित कर सकती है। ऐसा करना संविधान के आर्टिकल-341 के खिलाफ नहीं है।''
सुप्रीम कोर्ट ने कोटे में कोटा निर्धारित करने के फैसले के साथ ही राज्यों को जरूरी हिदायत भी दी। कहा कि राज्य सरकारें मनमर्जी से यह फैसला नहीं कर सकतीं। इसमें भी दो शर्त लागू होंगी।
Published on:
21 Aug 2024 04:05 pm
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